Talented View : जोड़-तोड़ की कुर्सी

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एक बच्चे ने 96% अंक लाकर पूरी कक्षा में टॉप किया। लेकिन अगले साल मेहनत में कमी की वजह से उसे 86% अंक ही मिल पाए। हालांकि प्रदर्शन में गिरावट के बाद भी उसके अंक सर्वाधिक थे। दूसरा कोई छात्र उसके आसपास भी नही आ पाया था। लेकिन दूसरे बच्चों ने उसका मज़ाक उड़ाना शुरू कर दिया। दूसरे बच्चों के अनुसार ये उसकी नैतिक हार थी। ये बात बच्चों की थी। लेकिन आजकल के नेता (Cartoon On Dushyant Chautala) बच्चो से भी गए-गुज़रो की तरह बर्ताव कर रहे है।

Talented View : ऊंट किस करवट बैठेगा

महाराष्ट्र और हरियाणा (Haryana Election 2019) में पिछली बार से कम सीट लाने पर विपक्ष इसे भाजपा की नैतिक पराजय बतला रहा है। शरद पवार, सुप्रिया सुले, भूपेंदर हुड्डा और गुलाम नबी आजाद जैसे मंझे हुए नेता इस जनादेश को भाजपा के खिलाफ बता रहे है। और ऐसा बताते हुए इनके चेहरे खुशी से दमक रहे है। समझ नही आता कि इन नेताओं की अक्ल क्या घांस चरने गयी हुई है? अगर ये जनादेश दोनो राज्यों में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने वाली भाजपा के खिलाफ है तो फिर पक्ष में किसके है?

Talented View : देश की दुश्मन दोहरी मानसिकता

हरियाणा (Haryana News) में भाजपा पिछले विधानसभा चुनाव से 3%वोट ज्यादा लेकर आयी है। सीटों के लिहाज़ से देखा जाए तो सीटें निश्चित रूप से कम हुई है लेकिन जनाधार बढ़ा है। इधर महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर गयी है। पिछले 50 सालों में पहली बार महाराष्ट्र में कोई मुख्यमंत्री अपने 5 साल का कार्यकाल पूरा करके दुबारा चुना गया है। सरकार बनाने की संभावनाओं में भी भाजपा अपने विरोधियों से मीलों आगे है।

ये नैतिक पराजय कहलाती है क्या? अगर भाजपा से नाराज़ी के बावजूद जनता ने उस पर सबसे ज्यादा भरोसा जतलाया है तो ये सोचने की बात भाजपा के लिए है या विपक्ष के लिए? विपक्ष के निकम्मेपन का इससे बड़ा उदाहरण हो नही सकता कि भाजपा की सीट कम होने का ये लौग बेशर्मी से जश्न मना रहे है। इन्हें सोचना चाहिए कि जनता भाजपा से नाराज़ी के बाद भी इन्हें बहुमत नही दे रही है तो आत्ममंथन करने की जरूरत किसे है? भाजपा तो सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते पुनः सरकार बना लेगी, लेकिन अब विपक्ष कहाँ जायेगा?

जेजेपी के दुष्यंत चौटाला (Cartoon On Dushyant Chautala) जो कल तक ‘किंगमेकर’ की भूमिका में थे वो सबसे ज्यादा पछतायेंगे। भाजपा हरियाणा में निर्दलीयों का सहयोग लेकर आसानी से सरकार बना लेगी। लेकिन अगले पांच सालों तक बिना सत्ता के अपने विधायकों को टूट-फूट से बचाने में दुष्यंत के पसीने छूट जाएंगे। एक सुनहरा अवसर जो उनके हाथ लगा था उसका फायदा उठाने में दुष्यंत बुरी तरह फैल हुए है। अगले पांच साल कांग्रेस से भी ज्यादा दुष्यंत दुखी होंगे ये साफ दिखाई दे रहा है।

Talented View  :  ख़ुद को ख़त्म करती कॉंग्रेस

दोनो राज्यो में भाजपा (BJP) अपनी सरकार 5 साल निर्विघ्न रूप से चलाएगी, इसमें कोई शक नही है। केंद्र में सत्ता जिसके पास होती है उसके पास विधायक कबाड़ने के तमाम हथकंडे होतें ही है। भाजपा को कोसने की बजाय विपक्षी दलों को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। भाजपा की जीत को नैतिक हार बताने की बच्चों जैसी हरकतें विपक्ष को शोभा नहीं देती। विपक्ष की ऐसी नादानी भरी बातें सुनकर लगता नही की जनता अगली दफा भी इन पर विश्वास जताएगी।

        – सचिन पौराणिक

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