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Talented View : अपराधी कौन- पुलिस या बलात्कारी?

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देशभर में ठगी करने वाली चिटफंड और फ़र्ज़ी कंपनियों पर पुलिस कार्यवाही करने में ढिलाई बरतती है। लेकिन इस तरह की ठगी में अगर किसी राज्य की पुलिस त्वरित कार्यवाही करती है तो वो है तेलंगाना पुलिस। इस तरह की शिकायतों में तेलंगाना पुलिस देश के किसी भी शहर में हेलिकॉप्टर लेकर फिल्मी स्टाइल में तुरन्त कार्यवाही करने चल पड़ती है। बिना उस राज्य की पुलिस को सूचना दिए, संदेहास्पद लोगों को पकड़कर हेलीकॉप्टर में बैठाकर तेलंगाना ले जाने वाली पुलिस की इस कार्यवाही का जनता भी उत्साहवर्धन करती है।

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लेकिन तेलंगाना के शमशाबाद में हुई वारदात ने देश को स्तब्ध कर दिया है। षड्यंत्रपूर्वक एक युवती का पहले सामुहिक बलात्कार और उसके बाद उसे जिंदा जलाना कुछ ऐसा है, जिसने मानवीयता को शर्मसार कर दिया है। सोशल मीडिया और समाचार के माध्यम से सब जान चुके हैं कि कैसे पहले प्रियंका की स्कूटी पंचर की गई और उसके बाद कई लोगों ने मिलकर उसे नोचा। जब उनका मन भर गया तो प्रियंका को जिंदा जलाकर मार डाला।

समझ नही आता ऐसे वहशी दरिंदे किस मानसिकता में पले-बड़े होते है। महिलाओं के साथ इस दर्जे की क्रूरता कोई शैतान भी नही कर सकता। सब लोग इस घटना से दुःखी है, गुस्से में है, सरकार जल्द न्याय का भरोसा भी दे रही है। लेकिन असली दुख ये है कि इस तरह की ये आख़िरी घटना नही रहने वाली। हमारे लाख गुस्से के बावजूद कुछ दिन बाद हम ऐसी ही किसी घटना पर आक्रोश व्यक्त कर रहे होंगे, सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है।

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कैसा समाज़ बन गया है हमारा जहाँ उद्योगपतियों को देश का माहौल सही नही लग रहा जबकि ऐसे बलात्कारियों को सब सही लग रहा है। उद्योगपति त्रस्त है तो अपराधी मस्त। इस तरह के जघन्य हत्यारो को क्या हम तत्काल फांसी नही दे सकते? क्या सिर्फ कानून बनाने से अपराध रुक जाते हैं? अगर भारत के संविधान में ऐसे हत्यारों, शैतानो को भी अपने बचाव का अधिकार मिल रहा है तो क्या ऐसे संविधान की हमें जरूरत है? इक्कसवीं सदी और विकास के सारे दावे किसी काम के नही अगर हम समाज की महिलाओं को सुरक्षा तक नही दे पा रहे है।

प्रियंका की बहन ने बताया कि उसकी बहन बच जाती, अगर पुलिस उन्हें टालने के बजाय तत्काल कार्यवाही कर देती। पुलिस ने पहले उन्हें एक थाने से दूसरे थाने टरकाया, फिर कई घंटे बीतने के बाद उनकी मदद शुरू की। ऐसे समय मे जबकि महिलाओं पर अपराध में राज्य को नंबर1 का तमगा प्राप्त हो, तब तेलंगाना पुलिस का ऐसा रवैया माफी लायक नही है। घटना की गंभीरता को ही पुलिस नही समझ पाती है तो अपराधों को रोका कैसे जायेगा?

तेलंगाना पुलिस जिस तरह की तेज़ी साइबर अपराधों में दिखाती है वैसी महिलाओं को लेकर क्यों नही दिखा सकती? हेलीकॉप्टर लेकर इंदौर आने का इनके पास समय है लेकिन थाने में अपनी बेटी की गुमशुदगी की शिकायत लेकर पहुंचने वाली एक माँ की बात सुनने का समय नही है? हेलीकॉप्टर लेकर देशभर में घूमने वाली तेलंगाना पुलिस को एक-दो हेलीकॉप्टर महिलाओं की आबरू बचाने में भी लगा देने चाहिये। पुलिस को अपनी हरकतें सुधारने की सख्त जरूरत है। और ऐसे अपराधी जब तक समाज मे है हमें भी महिलाओं से आंखे मिलाने में भी शर्म आनी चाहिये।

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      – सचिन पौराणिक

 

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