website counter widget

Talented View : भगवान बच्चे के परिवार को हालातों से उबरने की शक्ति दे

0

सूचना क्रांति के वर्तमान दौर में कुछ वीडियो ऐसे देखने में आ जाते हैं, जिन्हें एक बार देखने के बाद भुलाना मुश्किल हो जाता है। यूं तो फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर पर रोज़ ही आंखें दर्जनों वीडियो देख लेती हैं, परंतु कुछ को देखकर मन उदासी से भर जाता है। कल ही एक वीडियो टीवी चैनलों पर देखा, जिसमें महज 2 साल का एक मासूम खेलते-खेलते खुले नाले में जा गिरा। बदहवासी में बच्चे को उसके परिजन ने ढूंढना शुरू किया, लेकिन जब सीसीटीवी की तस्वीरें सामने आईं और राहगीरों ने बताया, तब पता चला कि बच्चा नाले में गिर गया है।

Talented View : ‘अतिआत्मविश्वास’ से हमेशा बचकर रहना चाहिए

देशभर में इस समय मानसून छाया हुआ है। मुम्बई की बारिश पूरे शहर को तरबतर कर रही है, लेकिन इन सबके बीच बदइंतजामी भी खुलकर सामने आ रही है। मैनहोल, खुले नालों में गिरने से हर साल सैकड़ों लोग मारे जाते हैं, लेकिन हर बारिश में हालात वैसे ही बन जाते हैं। नालों में, मैनहोल में गिरकर अपनी जान गंवाने वालों की खबरें हम पढ़ते ही हैं| इन खबरों से हमारी भावनाएं ज्यादा उफान पर आती भी नहीं है, लेकिन कल उस मासूम बच्चे को मौत के मुंह में जाते देखकर दु:ख और गुस्से के बीच की भावनाओं में दिल कहीं अटक गया है। मासूम नाले में गिरते ही कैसे असहाय हो गया होगा, यह सोचकर ही किसी की आत्मा कांप सकती है।

Talented View : महकमों का निजीकरण कर जनता को राहत दें

मामला यह है कि मुम्बई के गोरेगांव में एक मासूम बच्चा “दिव्यांश” खेलते-खेलते खुले नाले में जा गिरा। बताया जा रहा है कि नाला ज्यादा गहरा नहीं है, लेकिन आगे जाकर बड़े सीवर से मिलता है, जो काफी गहरा है। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस, बीएमसी और फायर ब्रिगेड के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और बचाव का काम शुरू कर दिया, लेकिन दु:खद खबर यह है कि आज सुबह तक भी बच्चे का पता नहीं चल पाया है। बच्चे के घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है क्योंकि उन्हें पता नहीं है कि उनका दुलारा दोबारा घर लौटेगा भी या नहीं?

आंकड़ों की बात करें तो एक आरटीआई के मुताबिक, बीते पांच सालों में मुम्बई में मैनहोल, नाले और समुद्र में हुई दुर्घटनाओं में 328 लोगों की जान जा चुकी है। इतने व्यापक पैमाने पर सालाना होने वाले हादसों के बाद भी अगर हमारी व्यवस्था नहीं सुधर पा रही है तो इसका दोषी कौन है?  हमेशा ही बजट का रोना रोने वालों से पूछना चाहिए कि नालों और मैनहोल के ढक्कन बंद करने में भी क्या करोड़ों का बजट लगता है ? हमसे नालियों के ढक्कन तो लग नहीं पा रहे हैं, हम क्या खाक विश्वस्तरीय सीवरेज बना पाएंगे?  जिसका बच्चा नाले में डूबा है, उस मां के दर्द की कोई कल्पना कर सकता है? उस परिवार पर क्या आपदा आई है, उसकी कोई भरपाई हो सकती है?

Talented View : कश्मीर और देश की शांति के लिए यह बहुत ज़रूरी

बीएमसी के जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारियों को शर्म आनी चाहिए कि उनकी लापरवाही से एक घर का चिराग बुझने को है। रात को वह वीडियो देखा तो मन विचलित हुआ, सुबह इस उम्मीद में सबसे पहले टीवी चालू किया कि शायद कोई चमत्कार हो गया हो, लेकिन अब तक बचाव मुहिम किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। कहने को बचाव कार्य अब भी जारी है, लेकिन अब बच्चे के बचने की उम्मीद नगण्य है। भगवान बच्चे और उसके परिवार को इन हालातों से जल्दी उबरने की शक्ति दें।

ट्रेंडिंग न्यूज़
Share.