Talented View : अपराधियों को तुरंत फांसी हो

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अपराध किस देश में नहीं होते ? अंतर बस इतना है कि कहीं ज्यादा तो कहीं कम, लेकिन खाड़ी देशों में जहां अपराधियों को क्रूरतम और तत्काल सज़ा का प्रावधान है, वहां अपराध दर निम्नतम है। दूसरी तरफ भारत जैसे देश भी है, जहां अपराधियों को सज़ा दिलवाने में सालों बीत जाते हैं इसलिए अपराधी भी बेखौफ होकर अपराध करते हैं। इसमें कुछ गलतियां कानून की है और कुछ इसे लागू करने वालों की। कई अपराधी कानून की खामियों का फायदा उठाते हैं तो कुछ कानून से डरते ही नहीं।

इसी का परिणाम है कि अपने यहां अपराध दर बाकी देशों के मुकाबले अधिक है। ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के चित्रकूट में सामने आया है, जहां फिरौती के रुपए देने के बाद भी दो मासूमों को मौत के घाट उतार दिया गया। श्रेयांश और प्रियांश नाम के दो जुड़वा भाइयों का पहले स्कूल की बस से गन पॉइंट पर अपहरण किया गया। इसके बाद फिरौती मांगी गई। 20 लाख फिरौती दे भी दी गई, लेकिन पहचान उजागर होने के डर से बदमाशों ने बच्चों को मार डाला। बच्चे के पिता एक बड़े कारोबारी हैं और उनसे पैसे वसूलने के लिए बच्चों का अपहरण किया गया था। अपराधी पूरे समय बच्चों को मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में घुमाते रहे और पुलिस हाथ मलते रह गई।

जिस किसी ने भी मासूम बच्चों की तस्वीरें देखी वह यही सोचता रह गया कि कैसे कोई इनका कत्ल कर सकता है? दोनों मासूम बच्चों का क्या कसूर था यह कोई समझ ही नहीं पा रहा है? अब अपराधियों को जल्दी और कठोर सज़ा की मांग हो रही है, लेकिन ऐसा होगा इसमें बहुत संशय है। लंबी कानूनी कार्यवाही और सबूत, गवाहों की इस कबड्डी में इंसाफ दूर की कौड़ी ही साबित होता आया है। जनता इस जघन्य हत्याकांड से आंदोलित है और यही वक्त की भी मांग है कि ऐसे अपराधियों को तुरंत फांसी की सज़ा दे दी जाए।

अब समय आ गया है जब हमें बच्चों की हत्या, महिलाओं से बलात्कार, तेज़ाब फेंकने, कोल्ड ब्लडेड खून और किसी लड़की की निजी तस्वीरें सार्वजनिक करने वालों को समयसीमा के भीतर फांसी की सज़ा सुनिश्चित करना होगी। कुछ अपराध बहकावे, आवेश में आकर हो जाते हैं, लेकिन सोची-समझी साजिश रचने वालों पर रहम करना अब बंद होना चाहिए। एक बार कुछ अपराधी लटकाए जाएंगे तो बाकियों को अपने आप संदेश मिल जाएगा कि अब कानून पंगु नहीं बल्कि शक्तिशाली हो गया है।

मानव अधिकार, इंसानियत जैसी फालतू की बात करने वालों को यह समझना चाहिए कि अगर उन्हीं के बच्चे की हत्या हो जाए या उन्हीं की सगी बहन के साथ दरिंदगी होती तो क्या तब भी वे ऐसी बातें करते? अपराधी चाहे किसी भी विचारधारा को मानने वाला हो, किसी भी धर्म/मजहब को मानने वाला हो| वह चाहे किसी भी उम्र का हो, लेकिन उसे कठोरतम सज़ा शीघ्र दिलाना अब ज़रूरी हो गया है। राज्य सरकार को भी अफसरों के तबादले करने से फुरसत मिले तो एक बार कानून व्यवस्था की भी सुध ले लेनी चाहिए। दो मासूम निर्ममता के साथ मौत के घाट उतार दिए गए और पुलिस प्रशासन कुछ नहीं कर सका। ऐसे रुकेंगे प्रदेश में अपराध?

कमलनाथ के सरकार सम्हालते ही तीन भाजपा नेताओं की हत्या हो गई थी, लेकिन वो मामले राजनैतिक और आपसी रंजिश के निकले इसलिए सरकार पर अंगुली उठाना सही नहीं था, लेकिन मासूम बच्चों के कत्ल के बाद सरकार की अक्षमता और प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल उठेंगे ही। बच्चों की हत्या का दर्द उस पिता और परिवार से ज्यादा कौन समझ सकता है, जिन्होंने अपने चिराग को बुझते हुए अपनी आंखों से देख लिया है ?

जनता भी इस हत्याकांड से दुखी है और अपना गुस्सा सड़कों पर निकाल भी रही है, लेकिन इस बार फौरी कार्रवाई से बात नहीं बनेगी। कानून में आमूलचूल बदलाव और हिम्मत के साथ अपराधियों को फांसी के फंदे पर झुलाना पड़ेगा। साम, दाम, दंड के बाद आप आखिरी विकल्प ‘भेद’ ही बचा है इसलिए इन अराजक तत्वों को अब जल्द ही फांसी की सज़ा दिलाना सरकारों का कर्तव्य है।

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-सचिन पौराणिक

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