Talented View : ‘जज साहब’ का भी अपहरण हो जाए तो भी कोई आश्चर्य नहीं

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कुछ दिन पहले एक स्टाम्प लेने जिला कोर्ट जाना हुआ। बेतरतीब ढंग से लगी वकीलों की कुर्सियां, यहां-वहां टेबलों पर टाइपराइटर रखकर लगाई गई दुकानों के बीच चाय-पानी करते वकील और उनके मुवक्किलों के नज़ारे ने हमारा स्वागत किया। वहीं पास के गलियारे से बंदियों को रस्सी और हथकड़ियों से बांधकर जज के सामने पेश करने के लिए ले जाया जा रहा था| साथ ही उनके रिश्तेदार भी उनसे बातचीत करते चल रहे थे। जज साहब के कैबिन के बाहर दालान में चक्कर काटते झक सफेद कपड़ों में खड़े चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपनी पारखी नज़रों से लोगों को टटोल रहे थे कि कौन उनकी जेबें गर्म कर सकता है? बीच-बीच में कुछ पुलिस वाले भी स्टेनगन लिए घूमते नज़र आ रहे थे, लेकिन उनकी दिलचस्पी चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बजाय लड़की भगाने और दहेज प्रकरणों के कुछ चर्चित मामलों की जानकारी निकलवाने में ज्यादा नज़र आ रही थी।

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खैर, जो मुख्य बात कोर्ट को देखकर मुझे समझ आई वह यह थी कि यहां सुरक्षा के कोई खास इंतजाम नहीं हैं। सड़क से चलकर जज की कोर्ट के बाहर तक हर कोई बेरोकटोक आ-जा सकता था। कुछ विशेष मामलों की पेशी के दौरान ज़रूर कोर्ट छावनी में तब्दील कर दिया जाता है, लेकिन आम दिनों में वहां सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं रहती है। कोई सुरक्षाकर्मी किसी से यह पूछने वाला नहीं है कि वह किस वजह से कोर्ट परिसर में आया है? आज सुबह खबर आई कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के ठीक बाहर से एक महिला और पुरुष का अपहरण कर लिया गया। बताया जा रहा है कि प्रेमी जोड़ा अपने लिए सुरक्षा मांगने कोर्ट के दर पर आया था, लेकिन कोर्ट के बाहर से पहले से उनका इंतज़ार कर रहे बदमाशों ने वहीं से उनका अपहरण कर लिया।

प्रयागराज के एडीजी एसएन साबत ने कहा कि अपहरणकर्ता सशस्त्र थे, लेकिन हमने गाड़ियों की चेकिंग का आदेश जारी कर दिया है। संदिग्ध वाहनों को कुछ जगह रोका भी गया, लेकिन असली प्रश्न यह है कि जब हाई कोर्ट के बाहर से अपराधी किसी का बेखौफ होकर अपहरण कर रहे हैं तो बाकी जगहों पर क्या होता होगा? सभी को सुरक्षा दिलवाने वाली कोर्ट खुद अपने परिसर की सुरक्षा करने में असमर्थ है क्या ?

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कोर्ट जैसी संवेदनशील जगह पर बदमाश ऐसी संगीन वारदातों को अंजाम दे रहे हैं तो पूरे प्रदेश में सुरक्षा के क्या हाल होंगे ?  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही अपराधियों पर सख्ती से पेश आ रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी यूपी में हालात बेकाबू हो रहे हैं ।

यह एक सच्चाई है कि हमारी कोर्ट की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। आए दिन खबरें आती हैं कि पेशी के दौरान अपराधी कोर्ट से भाग गए, लेकिन उसके बाद भी कोर्ट की सुरक्षा के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाए जाते हैं? विधायक मिश्रा और उनकी बेटी साक्षी के प्रकरण के बाद से देशभर के “प्रेमी जोड़े” अदालतों के पास सुरक्षा मांगने पहुंच रहे हैं। अदालत बेशक उन्हें सुरक्षा देगी भी, लेकिन उसके लिए जोड़े का कोर्ट तक पहुंचना तो ज़रूरी है। ‘बाहुबली’ किस्म के लोगों के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि कोर्ट की नाक के नीचे से भी वे अपहरण करने से बाज़ नहीं आ रहे हैं।

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भारत जैसे विशाल देश में ‘इंसाफ’ वैसे ही दूर की कौड़ी है। कहने के लिए कानून सबके लिए बराबर है, लेकिन सच यही है कि कमजोर और निर्धन के लिए कोर्ट में भी कोई न्याय नहीं है। इन बेचारों की बात भी ‘जज साहब’ और न्याय की देवी के कानों तक नहीं पहुंच पाती है । कोर्ट के बाहर ज़मीनी हालातों की विवेचना यदि की जाए तो यही निष्कर्ष निकलेगा कि प्रेमी जोड़े का अपहरण एक बहुत छोटी बात है। कोर्ट में सुरक्षा इतनी कम है कि कल को यदि कोई कोर्ट में घुसकर ‘जज साहब’ का भी अपहरण कर ले तो भी कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। जिस दिन ऐसा होगा, ज़मीनी हालात उसी दिन से बदलने शुरू हो जाएंगे।

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