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Talented View : सच्चाई यही है कि भ्रष्टाचार हर तरफ है

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पिछले दिनों एक काम के सिलसिले में कई बार कलेक्टोरेट जाना हुआ। पहले पहल तो कुछ समझ नहीं आया कि काम आखिर होगा कैसे ?  एक-दो दिन के भीतर ही मैं समझ गया था कि काम सब होगा, लेकिन ‘दक्षिणा’ के बिना नहीं। वहां का हर बाबू-अधिकारी बिना पैसे के कोई काम करने को तैयार नहीं। इसके अलावा आपको शायद यह जानकर आश्चर्य होगा कि कलेक्टोरेट का एक मामूली भृत्य (चपरासी) तक फाइलों को ऊपर-नीचे करने के रोज़ के हज़ारों रुपए कमा रहा है।

चपरासी के लिए भर्तियों में पीएचडी और एमबीए किए हुए लड़के यूं ही नहीं लाइन लगाकर खड़े होते हैं। सभी जानते हैं कि एक बार सरकारी सिस्टम में शामिल हो जाओ, उसके बाद ज़िंदगीभर की ऐश है। न नौकरी जाने का खतरा, न कोई भविष्य की चिंता और उसके बाद दिनभर मक्कारी अलग। ऐसा कोई सरकारी महकमा नहीं है, जहां भ्रष्टाचार मौजूद नहीं। आज खबर आई है कि पीएचई के एक सेवानिवृत्त एसडीओ के यहां 400 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्ति का खुलासा हुआ है।

Talented View : घटनाओं को सांप्रदायिक चश्मे में बिल्कुल नहीं देखा जाए

जी हां, आपने सही पढ़ा है, 400 करोड़ की संपत्ति। ये वह संपत्ति है, जो पकड़ में आ गई है| इसके अलावा और भी जमीन, जायदाद, ज़ेवर, नकदी होने की पूरी संभावना है, जो अब तक सामने नहीं आ पाई हो। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने इस छापे की कार्रवाई को मंगलवार सुबह कई ठिकानों पर एक साथ छापे मारकर अंजाम दिया। रिटायर्ड एडीओ सुरेश उपाध्याय ने हाल ही में 100 एकड़ जमीन का सौदा किया, जिससे वे निशाने पर आ गए थे।

इसके अलावा एक खबर और है, जिसमें आबकारी आरक्षक की 2 करोड़ की संपत्ति राजसात करने की तैयारी है। मध्यप्रदेश के अधिकारियों की ऐसी “काली कमाई” के किस्से नए नहीं है।  ये किस्से मात्र उन 1% अधिकारियों के उजागर हो रहे हैं, जो पकड़ में आ गए। 99%अधिकारी अब भी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, करोड़ों कमा रहे हैं, लेकिन कोई सीबीआई, लोकायुक्त, आर्थिक अपराध और एन्टी-करप्शन वाले उन तक पहुंच नहीं पा रहे हैं।

आबकारी, लोक निर्माण, नगर निगम, श्रम, उद्योग, पुलिस, रेलवे ऐसा कोई महकमा और अधिकारी नहीं, जो “ऊपरी कमाई” नहीं करता हो। ऐसे कितने ही अधिकारी हैं, जिनकी कमाई और संपत्ति में कोई अनुपात ही नहीं है। उनके जलवे, ठाठ औऱ रहन-सहन सिर्फ ‘तनख्वाह’ से पूरे हो ही नहीं सकते।  एक उद्योगपति जहां ज़िंदगीभर मेहनत करके भी 400 करोड़ की संपत्ति इकट्ठी नहीं कर पाता, वहीं ये भ्रष्ट अधिकारी सिस्टम को खोखला करके हजारों करोड़ की संपत्ति बिना किसी निवेश के ही बना लेते हैं।

Talented View : न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम

सोचने की बात है कि जो आदमी 400 करोड़ इकट्ठे कर रहा है, उसने भ्रष्टाचार कितने करोड़ का किया होगा? 400 करोड़ कमाने में उसने सिस्टम को कम से कम हजार करोड़ का चूना लगाया होगा और दु:ख की बात यह है कि ऐसे अधिकारी हर महकमे में हैं और जनता को जमकर लूट रहे हैं और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।  केंद्र और राज्य सरकारें ईमानदारी के चाहे लाख दावे कर लें किन्तु सच्चाई यही है कि भ्रष्टाचार हर तरफ है। भ्रष्ट अधिकारी रोज़ ही सरकार को करोड़ों की चपत लगा रहे हैं और उनका हिसाब लेने वाला कोई नहीं है।

Talented View : उन्हें परेशान करने का भी उन्हें कोई हक़ नहीं बनता

मध्यप्रदेश सरकार जहां एक तरफ ईमानदारी से काम कर रहे उद्योगपतियों से अतिरिक्त कर वसूलने की तैयारी कर रही है वहीं ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई की उनके पास कोई योजना नहीं है। मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी पर ही जब भ्रष्टाचार के आरोप लग सकते हैं तो बाकी अधिकारियों से ईमानदारी की अपेक्षा करना ही बेमानी हो जाता है। मध्यप्रदेश का भगवान भला करे।

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