Talented View : कांग्रेस छोटी बातों को छोड़कर ढंग के मुद्दों पर ध्यान दे

0

कल इंदौर के विधायक आकाश विजयवर्गीय ने सरेआम एक निगम अधिकारी को बल्ले से पीट दिया। आकाश के पिताजी कैलाश विजयवर्गीय ने इस पर भी बजाय अपने बेटे की गलती मानने के मीडिया को ही औकात में रहने की सलाह दे डाली। मामला तूल भी पकड़ा, लेकिन कांग्रेस के नेता इतने मंदबुद्धि हैं कि वे इतनी बड़ी घटना को भी मुद्दा नहीं बना पा रहे हैं। कांग्रेस का ध्यान मोदी के भाषण, मुसलमानों पर उनके पूर्व नेता के बयान और भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी के रंग जैसे गैर-ज़रूरी मुद्दों पर ही लगा हुआ है।

Talented View : सच्चाई यही है कि भ्रष्टाचार हर तरफ है

आईसीसी यानी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कॉउंसिल का नियम बिल्कुल स्पष्ट है कि दो टीमों की जर्सी एक जैसे रंग की नहीं हो सकती। फिलहाल, भारत और इंग्लैंड की जर्सी का रंग मिलता-जुलता है। इंग्लैंड चूंकि विश्वकप का मेजबान है इसलिए भारत की जर्सी में कोई दूसरा रंग जोड़ने का प्रस्ताव बीसीसीआई को दिया गया। भारत की टीम ने नीले के साथ नारंगी रंग को चुन लिया क्योंकि यह कॉम्बिनेशन अच्छा दिखता है। यह घटना बेहद सामान्य है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के नियमों के अंतर्गत है, लेकिन भारत के नेता इसमें भी राजनीति ढूंढ लिए।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने भारतीय टीम की जर्सी के बहाने केंद्र सरकार पर ही “भगवाकरण” का आरोप लगा दिया। वैसे तो भारतीय टीम नीले और नारंगी रंग की जर्सी पहनकर अपने मैच खेलेगी किन्तु भारत के नेताओं को ऐसा लग रहा है कि हमारे खिलाड़ी भगवा अंगवस्त्र गले में डाले, माथे पर तिलक लगाकर और हाथ में त्रिशूल लेकर इंग्लैंड में “जय श्रीराम” के नारों से स्टेडियम को गुंजा डालेंगे।

Talented View : घटनाओं को सांप्रदायिक चश्मे में बिल्कुल नहीं देखा जाए

उन्हें लग रहा है कि मैच शुरू होने से पहले भी “जन-गण-मन” की जगह “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि” की धुन बजाई जाएगी। विपक्ष के नेता शायद सोच रहे हैं कि आने वाले दिनों में भारतीय क्रिकेट टीम खाकी चड्डी पहनकर पहले मैदान में पथ-संचलन करेंगी और फिर टॉस होगा। मैच खत्म होने के बाद भी ध्वज वंदन होगा, जिसके बाद टीम मैदान से बाहर निकलेगी।

हर विकेट लेने और हर चौके-छक्के के बाद हमारी टीम “जय श्रीराम” और “वंदे मातरम” के नारे लगाएगी। देश का विपक्ष इतना नाकारा है कि जनता से जुड़े मुद्दे उठाने की उन्हें याद नहीं आएगी, लेकिन नारंगी जर्सी के नाम पर छाती पीटना उन्हें ‘देशहित’ का काम नज़र आएगा। एक बार सोचकर देखिए अगर कांग्रेस के किसी बड़े नेता का विधायक पुत्र किसी अधिकारी पर बल्ला चलाता तो क्या होता? भाजपा वाले सारे मुद्दे छोड़कर उस नेता को घेर लेते और कांग्रेस पर इतना दबाव बना लेते कि उन्हें कार्रवाई करनी ही पड़ती, लेकिन कांग्रेस के नाकारा नेता इतना बड़ा मुद्दा भी लपक नहीं पा रहे हैं।

अमेरिका : युद्ध में कूदने को आतुर

जो लड़ाई भाजपा बनाम विपक्ष होना थी, वह सिर्फ भाजपा बनाम मीडिया (वो भी सिर्फ एक धड़ा) बनकर कमजोर हो चुकी है। ‘बल्लेबाज़’ आकाश जेल गए हैं तो वे सरकार की दिलेरी की वजह से नहीं बल्कि सिर्फ मीडिया में खबर आने की वजह से गए हैं।  कांग्रेस के नेताओं में इतनी समझ होना चाहिए कि वे जर्सी के रंग जैसी छोटी बातों को छोड़कर ढंग के मुद्दों पर ध्यान दें।

जर्सी के रंग से जनता का कोई सरोकार नहीं है, लेकिन विधायक की सरेआम गुंडागर्दी से ज़रूर जनता सहमी हुई है परन्तु जिस पार्टी को अपने अध्यक्ष को मनाने से ही फुरसत नहीं मिल रही, वह क्या जनता के मुद्दे उठा पाएगी ? आकाश विजयवर्गीय कल को मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी बल्ले से कूट देंगे तो भी कांग्रेस इसका विरोध नहीं कर पाएगी क्योंकि कांग्रेस को पता ही नहीं है कि किस मुद्दे को पकड़ना है और किस मुद्दे पर मुंह बंद रखना है?

Share.