Talented View : हिन्दू पाकिस्तान या मुस्लिम हिंदुस्तान..?

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नागरिकता संसोधन बिल (Citizenship amendment bill) पर देशभर में हंगामा मचा हुआ है। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए जा रहे है और इसे ऐतिहासिक भूल बताया जा रहा है। संसद में इस बिल पर चर्चा के दौरान यहां तक कहा गया कि अगर ये बिल पास हो गया तो इसे जिन्ना के विचारों की जीत माना जायेगा। इससे पहले सरकार पर देश को हिन्दू पाकिस्तान बनाने के आरोप भी लग चुकें है। लेकिन इन आरोपों पर कभी विस्तृत चर्चा नही हो पायी।

भारत का बंटवारा मजहब की बुनियाद पर  हुआ था जिसके बाद पाकिस्तान एक मुस्लिम राष्ट्र बना और भारत धर्म-निरपेक्ष देश। जब बंटवारा हुआ था देश की कमान कांग्रेस के हाथ में थी। मजहब की बुनियाद पर देश के टुकड़े होने देना कांग्रेस की एक बड़ी गलतीं थी। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी संसद में बोल रहे थे कि “लम्हो ने गलतियां की और सदीयों ने सज़ा पायी” लेकिन इसका सबसे बड़ा उदाहरण देश का बंटवारा ही हैं, जो कि कांग्रेस ने किया।

खेर, मुद्दा ये है कि भारत का भविष्य धर्म निरपेक्ष देश के रूप में सुरक्षित है, हिन्दू पाकिस्तान के रूप में या फिर मुस्लिम हिंदुस्तान के रूप में। इस सवाल का जवाब ढूंढने से पहले एक तथ्य सामने आना जरूरी है कि दुनिया के सभी मुस्लिम देशों में एक भी धर्म-निरपेक्ष नही है। उनके देश का मजहब इस्लाम है और बाकी धर्मावलंबियों को अल्पसंख्यक होने की कोई विशेष रियायत या सुविधाएं वहां नही दी जाती जैसी भारत मे दी जाती है।

इसका मतलब ये होता है कि अल्पसंख्यकों को विशेष रियायतें, सुविधाएं तभी मिलती है जबकी देश धर्म-निरपेक्ष हो और जनसंख्या का बड़ा हिस्सा उदारवादी हो। मुस्लिम देश न धर्म-निरपेक्ष है और न ही उदारवादी। इसलिए वो दुनिया के देशों में शरण के लिए भटक रहे मुस्लिम शरणार्थियों को भी अपने देश मे नही बुलाते और न ही अन्य धर्मावलम्बियों को अपने देश में कोई विशेष छूट देते है। इस पर कोई हंगामा भी नही होता। लेकिन भारत या फिर यूरोप का देश अगर ऐसा करता है तो दुनिया भर में मानवता के नाम पर हंगामा मचाना शुरू कर दिया जाता है।

दुनिया के परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारत विश्व के चुनिंदा हिन्दू बहुल देशों में एक है। दुनिया की सबसे बड़ी हिन्दू जनसंख्या भारत में है। लेकिन धर्म निरपेक्षता के नाम पर बहुसंख्यक वर्ग की अनदेखी यहां हमेशा की गई। धर्मनिरपेक्षता की बड़ी कीमत हमने चुकाई है। लेकिन अगर यही धर्मनिरपेक्षता हमारे देश को इस्लामी देश बनने की तरफ अग्रसर करती है तो हमे इससे पल्ला छुड़ा लेना चाहिये। भारत में म्यांमार, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से घुसपैठिये आएंगे तो सवाल उठना ही चाहिए कि आपको भारत ही क्यों आना है? इसके पीछे कोई षड्यंत्र तो नही है?

पाकिस्तान की भारत के प्रति “गज़वा-ऐ-हिन्द” की चालों का हम शिकार तो नही हो रहे है? भारत का मुसलमान देशभक्त है, भारत के लिए जीता-मरता है इसमें कोई शक नही। लेकिन बाहर से आये इन घुसपैठियों पर विश्वास नही किया जा सकता। ये लौग भारत को भीतर से खोखला करना चाहतें है इसलिए इन पर लगाम लगानी जरूरी है। अब जो सवाल था उस पर लौटतें है की भारत के लिए क्या ठीक है? धर्म निरपेक्ष देश, हिन्दू पाकिस्तान या फिर मुस्लिम हिंदुस्तान? इसका जवाब है भारत के लिए ये तीनो ही ठीक नही है। हिंदुओ की संख्या घटने पर देश न धर्म निरपेक्ष रह पाएगा और न ही उदारवादी इसलिए भारत का भविष्य सिर्फ हिन्दू बहुल्य हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा सुरक्षित है।

Talented View :  संसद में बिल संग्राम

            – सचिन पौराणिक

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