Talented View : शाहीन बाग़ आंदोलन नहीं, बौद्धिक आतंकवाद

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नागरिकता कानून (CAA Protest) के खिलाफ चल रहे शाहीन बाग़ के आंदोलन पर प्रधानमंत्री मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा था कि -“शाहीन बाग़ (Shaheen Bhagh protest) संयोग नही बल्कि एक प्रयोग है” प्रधानमंत्री को शाहीन बाग़ आंदोलन के बारे में निस्संदेह सबसे ज्यादा जानकारियां होंगी की इस आंदोलन के पीछे कौन ताकतें खड़ी है? लेकिन प्रधानमंत्री पद पर बैठे शख्स की अपनी मर्यादाएं होती है। वो ज्यादा कुछ खुलकर नही बोल सकते। लेकिन उन्होंने जो इशारा दिया था वो सच होता दिखाई दे रहा है।

दिल्ली में शाहीन बाग़ (Shaheen Bhagh protest) की तर्ज़ पर कल रात से जाफराबाद में भी आंदोलनकारी बड़ी संख्या में पहुंचे और रास्ता बंद करके बैठ गए। इस हुजूम से मेट्रो स्टेशन भी अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया। दिल्ली के ही चांद बाग़ और कुछ जगहों से भी रास्ता रोकने की खबरें मिल रही हैं। इस आंदोलनकारी भीड़ का स्वरूप भी शाहीन बाग़ जैसा ही है। अल्पसंख्यक वर्ग बड़ी संख्या में सड़कों पर अपनी नाज़ायज़ मांगों को लेकर बैठ गया है और इसकी सज़ा दिल्ली की जनता को भुगतना पड़ रही है।

अगर किसी को सरकार से कोई समस्या है तो वो इसका शांतिपूर्ण विरोध करें इसमें कोई आपत्ति नही है। लेकिन जगह-जगह सड़क रोककर गुंडागर्दी करना और जनता को इसकी सज़ा देना कैसे सही ठहराया जा सकता है? विरोध करना है तो ऐसी जगह करें जिससे जनता को तकलीफ न हो और यातायात सुचारू चलता रहे। लेकिन अपनी ज़िद की खातिर जनता को बंधक बनाने का हक प्रदर्शनकारियों को किसने दिया? आम जनता को मुसीबत में डालकर अपना आंदोलन चलाना कैसे स्वीकार किया जा सकता है?

खाते हिंदुस्तान का गातें पाकिस्तान का

भाजपा नेता कपिल मिश्रा कल अपने समर्थकों के साथ जब सीएए का समर्थन करने पहुंचे तो एक पक्ष द्वारा उन पर पत्थर बरसाए गए। ये लोग उस कानून का विरोध कर रहे है जो देश की संसद से पास होकर आया है और जिससे उनका कोई लेना-देना ही नही है। संविधान बचाने के नाम पर महिलाओं को सड़कों पर बैठाकर इन लोगों ने दिल्ली की जनता का जीना मुश्किल कर दिया है। समझ नही आता सड़कें और मेट्रो स्टेशन बंद करके ये लोग किस तरह से संविधान बचा रहे है? इसे संविधान बचाना कहें या अराजकता फैलाना?

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दिल्ली को बंधक बनाने वाले ये लोग विरोध के नाम पर देश की इज़्ज़त दांव पर लगाने से भी पीछे नही हट रहे है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने 2 दिवसीय दौरे पर भारत आए हुए हैं और उसी दौरान सड़कें रोककर, मेट्रो स्टेशन बंद करके ये क्या संदेश देना चाहतें है? इनके लिए विरोध क्या देश की साख से बढ़कर हो गया है? विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के सामने ये देश की कौन सी तस्वीर रखना चाह रहे हैं?

प्रधानमंत्री मोदी ने इस आंदोलन को लेकर जो कहा था कि ये संयोग नही प्रयोग है वो प्रयोग अपना रंग दिखाने लगा है। अब सरकार से यही उम्मीद है कि ट्रंप के जाते ही इन अराजक आंदोलनकारियों के साथ सख्ती से निपटा जाए और इनके मंसूबे धराशायी किये जाएं। इन्हें देश के कानून की ताकत दिखाई जाए और यूपी की तर्ज़ पर इनसे निपटा जाए। जब इन लोगों को जनता की तकलीफों से कोई फर्क नही पड़ रहा है तो इनके साथ अब सख्ती करना ही चाहिए। ये लोग संविधान बचाने की आड़ में बौद्धिक आतंकवाद फैला रहे है जिसे रोकना अब देश की सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिये।

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Sachin Pauranik

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