Talented View : राजनीति एक खेल

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(Cartoon On CAA) राजनीति समझना इतना भी मुश्किल नही है। नागरिकता संसोधन बिल (CAB 2019) जब संसद में था तब विपक्ष ने इसे पास होने से रोकने में कोई रुचि नही दिखाई। राज्यसभा (Rajya Sabha)में बहुमत न होने की सूरत में भी ये बिल आसानी से पास हो गया और कानून भी बन गया। अभी सड़कों पर हंगामा कर रही पार्टियों के नेता तब सदन से वाकआउट कर गए या वोटिंग में शामिल ही नही हुए। लेकिन अब जब कानून बन गया है तो बेवजह दोनो तरफ से बवाल काटा जा रहा है।

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सीएए (Cartoon On CAA) के समर्थन में विशाल रैलियां निकाली जा रही हैं तो इसके विरोध में भी आवाज़ बुलंद की जा रही है। मध्यप्रदेश में उज्जैन, रतलाम, इंदौर, नीमच जैसे बीसियों शहरों में हजारों को संख्या में लौग तिरंगा लेकर सड़को पर उतरे और कानून के पक्ष में अपनी आवाज़ बुलंद की। विपक्ष के राज्यों विशेषकर कांग्रेस (Congress) शासित राज्यों में नागरिकता कानून (CAA) के विरोध में हिंसक प्रदर्शन नही हुए। लेकिन इसका दूसरा पक्ष ये है कि इन्ही राज्यों में इस कानून में पक्ष में सबसे ज्यादा आवाज़ बुलंद की जा रही है।

राजनीति ऐसी ही होती है। सिर्फ एक पक्ष ही राजनीति नही करता बल्कि मौका मिलते ही दूसरा पक्ष हावी हो जाता है। कल इंदौर में नागरिकता कानून (Cartoon On CAA) के पक्ष में विशाल रैली निकाली गयी। रविवार का दिन होने से इन्दौरवासी बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए। इधर बिना किसी अनुमति के निकल रही इन रैलियों को देखकर नागरिकता कानून के विरोध वाले भी जोश से भर गए हैं। अब वो रैली निकालने की तैयारी में लग गए हैं। इन सबके बीच प्रशासन की सबसे ज्यादा किरकिरी हो रही है।

बिना किसी अनुमति (Cartoon On CAA) के हजारों लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और प्रशासन समझ नही पा रहा है क्या किया जाए? शांतिपूर्ण जुलूस को बल द्वारा भी नही रोका जा सकता और न ही सभी पर कार्यवाही की जा सकती है। सरकार इन रैलियों को रोकने के लिए धारा 144 (Section 144 imposed) लगा रखी है जो पूरी तरह बेअसर साबित हो रही है। लेकिन इन सबके बीच कोई ये नही समझने को तैयार है कि अब जबकि कानून बन चुका, सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी तब विरोध या समर्थन से होने क्या वाला है?

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आप कानून (Cartoon On CAA) के पक्ष में रैली निकालें या विरोध करें या किसी नंबर पर फोन करके मिसकाल देकर, उससे भला होगा क्या? अब इस कानून के न समर्थन का कोई तुक है न विरोध का। लेकिन केंद्र सरकार की फेंकी गुगली में विपक्षी बुरी तरह उलझ चुका है। विकास दर 5 फीसदी से भी कम रहने का अनुमान है, बेरोजगारी के हालात बद से बदतर हो चलें हैं, लेकिन विपक्ष नागरिकता कानून (CAA), कश्मीर, जामिया और जेएनयू (JNU) से आगे बढ़ ही नही पा रहा है।

विपक्ष दरअसल सत्ता के हाथों की कठपुतली बन चुका है (Cartoon On CAA)। केंद्र सरकार चाहे जैसे इन्हें नाच नचवाने में निपुण हो चुकी है। कांग्रेस का कोई न कोई बड़ा नेता रोज़ जेएनयू (JNU) जाता है और सोचता है देश वहीं से चलता है। लेकिन देश के युवाओं को उनके भविष्य की फिक्र है न कि सिर्फ जेएनयू के छात्रों की। उन्हें 10 रुपये महीने में कोई कमरा नही दे रहा है, बल्कि उनके माँ-बाप की खून पसीने की कमाई से वो जिंदा है। इसलिए विपक्ष को इस मुगालते से जल्दी ही बाहर निकल आना चाहिए कि जेएनयू के छात्रों के साथ खड़े होने का मतलब देश की युवाशक्ति के साथ खड़े होना है। अधेड़ उम्र के इन मुफ्तखोर छात्रों से पूरे देश के युवाओं को जोड़ा भी नही जा सकता।

फिलहाल, आने वाले दिनों में भी नागरिकता कानून (Cartoon On CAA) पर मचा घमासान बढेगा ही। उन बातों पर राजनीति फिर गर्म होगी जिनसे किसी को कोई फर्क नही पड़ने वाला। सांप कब का निकल चुका है लेकिन लकीर पीटने वाले लकीर पीटे जा रहे हैं। देखतें है ये तमाशा कब तक चलता है?

Talented View : कांग्रेस ने उम्मीदों से उलट फिर अजय राय को मैदान में उतारा

– सचिन पौराणिक

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