website counter widget

Talented View : आज़ादी के 7 दशक बीत जाने के बाद भी जनता हवाई बातों पर खुश

0

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कल देश का बजट पेश किया। यह बजट इस मामले में खास रहा कि इस बार इसे नया नाम “बहीखाता” दिया गया। इसके अलावा ‘ब्रीफकेस’ की जगह इस बार वित्तमंत्री लाल कपड़े में लपेटकर फाइलों को संसद लेकर पहुंचीं। लाल कपड़े पर अशोक स्तम्भ का चिन्ह बना हुआ था। इस बार बजट पर स्वदेशी का प्रभाव दिखाई दे रहा था इसलिए कुछ लोगों को यह उम्मीद बंध गई थी कि शायद वित्तमंत्री अपना भाषण भी ‘हिन्दी’ में देंगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

Talented View : इन अधिकारियों पर लगाम लगानी ही पड़ेगी

4 महीने पहले ही मोदी सरकार द्वारा अपने पहले कार्यकाल का आखिरी अंतरिम बजट पेश किया गया था, लेकिन चुनाव के कारण अंतरिम बजट भी पूर्ण बजट जैसा ही बनाया गया था। जो कल पेश हुआ, वह असल में पूर्ण बजट था, लेकिन लगा ऐसा कि मानो यह अंतरिम बजट है इसलिए इसमें कोई नई घोषणाएं ज्यादा देखने को नहीं मिली। जनता को जो “लॉलीपॉप” देने थे, वे पहले ही दे दिए गए थे इसलिए इस बार बजट में ज्यादा ‘स्कोप’ ही नहीं था।

Talented View : कांग्रेस को भाजपा से सीखने की ज़रूरत है

अमीरों के ऊपर कुछ नए कर लगाए गए हैं और ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई है कि अमीरों पर बोझ लादकर सरकार गरीबों की झोली भरने जा रही है। अपनी छवि “रॉबिन हुड” की तरह बनाने का एक प्रयास इस ‘बहीखाते’ में किया गया है, लेकिन यह सरकार सिर्फ आधी रॉबिन हुड है क्योंकि ये अमीरों से पैसे लूट तो रहे हैं, लेकिन गरीबों को दे नहीं रहे हैं। सरकारी खजाना भरने की हर जुगत इस बहीखाते में देखने को मिली है, लेकिन यह बात दीगर है कि ये पैसा जनता की जेब से ही निकाला जाएगा।  5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के उद्देश्य से यह बहीखाता बनाया गया है, लेकिन जनता को जो समझ आया वह यह है कि पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ने वाले हैं, मध्य वर्ग को कोई राहत नहीं मिलने वाली है और बेरोजगारी दूर करने का कोई रोडमैप दिखाई नहीं दे रहा है।

जनता का पैसा कहां और कितना खर्च किया जाना हैम इन आंकड़ों का ज़िक्र भी पूरे भाषण में कहीं देखने को नहीं मिला। पेट्रोल, डीज़ल से पहले ही सरकार अरबों कमा चुकी है, लेकिन 2 रुपए फिर बढ़ाये जा रहे हैं। ये बढ़ी हुई कमाई भी अरबों में जाएगी, लेकिन फिर भी समझ नहीं आ रहा है कि हमें दूसरे देशों से लोन क्यों लेना पड़ रहा है? पेट्रोल, डीज़ल, जीएसटी, नोटबन्दी ने जब देश की तिजोरी पहले ही लबालब कर दी है तो फिर दोबारा सरकार पेट्रोल के पीछे क्यों पड़ गई है? सोने पर आयात शुल्क बढ़ाया गया है, ऑटो पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई गई है, पेटोल-डीज़ल पर भी वक्रदृष्टि कर दी गई है।

बेशक सड़कों पर हनुमान चालीसा पढ़ना सही नहीं है

इन सबके बाद सरकार आरबीआई और एलआईसी जैसी संस्थाओं के पैसों पर भी नज़रें गड़ाए बैठी है। सभी को 2022 तक मकान दे दिए जाएंगे, यह वादा हो चुका है इसलिए इस बार हर घर तक स्वच्छ जल का नया शिगूफा छोड़ दिया गया है। राष्ट्रवादियों को खुश होने का मौका भी सरकार ने दिया है क्योंकि इस बार ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में दस्तावेज़ लाए गए हैं। बजट भी अब स्वदेशी ‘बहीखाता’ बन चुका है।

दरअसल, यह सरकार समझ चुकी है कि देश का एक बड़ा वर्ग आज भी नाम बदलने और स्वदेशी की बातों से बहुत जल्दी उत्साहित हो जाता है। इनके उत्साह के पीछे सरकार वही सब करती है, जो उन्हें करना है, लेकिन ये लोग यह सोचकर खुश हो जाते हैं कि वे गुलामी की बेड़ियों को तोड़ रहे हैं। अब देश की जनता यदि आज़ादी के 7 दशक बीत जाने के बाद भी हवाई बातों पर ही खुश हो रही है तो यह “बहीखाता” आपके लिए ही है।

Summary
Review Date
Author Rating
51star1star1star1star1star
ट्रेंडिंग न्यूज़
Share.