Talented View : 2024 के मोदी

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संसद में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने उद्बोधन में जिक्र किया था कि 2024 का चुनाव मैं नए मुद्दों पर लड़ूंगा। ये बात उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए तब कही थी जब 2019 के चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ वो संसद पहुंचे थे। उनकी इस बात पर उस वक्त ज्यादा ध्यान नही दिया गया था (Cartoon On Ayodhya Case Hearing)। लेकिन जब इस उद्बोधन के कुछ ही दिन बाद कश्मीर से धारा 370 हटा दी गयी तब ये महसूस हुआ कि अपने दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री ‘फ्रंटफुट’ पर आकर बल्लेबाजी करने के मूड में है।

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आज एक खबर और अखबारों की सुर्खियां बनी है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 18 अक्टूबर तक हर हाल में मंदिर मामले की सुनवाई पूर्ण कर ली जाए। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई नवम्बर में सेवानिवृत्त होने जा रहे है। इसलिए ये कयास लगाए जा रहे है कि 18 अक्टूबर तक मंदिर मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाने के लिए उन्हें करीब महीनेभर का समय मिल जाएगा। और इसी के साथ उम्मीद यही है कि दशकों पुराने इस मामले में आखिर ‘न्याय’ सुना ही दिया जायेगा।

गौरतलब है कि धारा 370 (Article 370), राम मंदिर और समान नागरिक संहिता भाजपा (BJP) के तीन बुनियादी मुद्दे है। 370 खत्म की जा चुकी है, मंदिर मामला भी सुलझने की कगार तक आ पहुंचा है। इसके बाद एक मुद्दा बचेगा समान नागरिक संहिता का। सरकार के आक्रामक रुख और विपक्ष की पतली हालत देखकर लगता है कि समान नागरिक संहिता भी देश मे लागू कर ही दी जाएगी। इसके अलावा पीओके के भारत में विलय जैसे असंभव लगने वाले कार्य भी इस कार्यकाल में देश देखने की उम्मीद करने लगा है।

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कर्ज़ में डूबता हुआ पाकिस्तान, अंतरराष्ट्रीय मंचो पर भारत का बढ़ता प्रभुत्व, भारत-अमेरिका की गहराती दोस्ती, मुस्लिम देशों का भारत को समर्थन करना, भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति और भारत के प्रति दुनिया के देशों का बदला हुआ दृष्टिकोण ये सभी कारक ये इशारा कर रहे है कि भारत दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में तैयार हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय हालात भी यही संकेत दे रहे है कि भारत, पाकिस्तान और चीन से अपनी जबरन कब्जाई हुई भूमि वापस लेने की दिशा में ठोस कदम उठा सकता है।

परिस्थितियों को देखकर यही अनुमान लगाया जा सकता है कि वाकई 2024 का चुनाव प्रधानमंत्री को नए मुद्दों पर ही लड़ना पड़ेगा। धारा 370, राममंदिर और समान नागरिक संहिता लागू करने के बाद भाजपा को नए मुद्दे ही ढूंढना पड़ेंगे। प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छ भारत मुहिम, सिंगल यूज़ प्लास्टिक से मुक्ति के खिलाफ मुहिम, 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी ये सब बातें दरअसल 2024 के ही चुनावी मुद्दें है। विपक्ष इस मामले भी सरकार से काफी पीछे है। इसी सुस्ती की वजह से 2024 के चुनाव का परिणाम आज ही कोई भी सहज़ अनुमान लगा सकता है।

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  – सचिन पौराणिक

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