Talented View : क्या कश्मीर मे कुछ बड़ा होने वाला है ?

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अमरनाथ यात्रा बीच में रोककर श्रद्धालुओं को वापस लौटने की सरकारी एडवाइसरी जारी कर दी गयी है। कश्मीर के सभी पर्यटन स्थलों पर मौजूद पर्यटकों को भी लौटने के लिए कह दिया गया है। घाटी में सेना की संख्या बढ़ा दी गयी है। अमरनाथ यात्रा के इतिहास में संभवतः ये पहला मौका है जब आतंकी हमले के अलर्ट की वजह से यात्रा को इस तरह बीच मे रोका गया है। सेना के बड़े अधिकारी द्वारा प्रेस कांफ्रेंस करना और गृहमंत्री का खुद कहना कि ये एक गंभीर एडवाइजरी है, सवाल खड़े करता है कि कश्मीर में आखिर चल क्या रहा है?

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अमरनाथ श्रद्धालुओं पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों द्वारा हमले का इनपुट, श्रद्धालुओं को वापस बुलाना, यात्रा मार्ग पर हथियार और सुरंग का मिलना और राज्यपाल द्वारा दिये जा रहे बयान, यही इशारा कर रहे है कि कश्मीर में ‘कुछ बड़ा’ होने वाला है। राज्य की अंदरूनी राजनीति के दो बड़े खिलाड़ी महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला द्वारा भी लगातार सेना की बढ़ती संख्या पर सवाल खड़े करना, महबूबा को पैदल मार्च करने से रोकना भी ये संकेत दे रहा है कि राज्य के हालातों में कुछ गड़बड़ जरूर है।

उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे परस्पर विरोधी दलों के एकजैसे बयान भी ये इशारा कर रहे है कि दोनों ही दल केंद्र की कार्यवाही से घबराए हुए हैं। दोनों ये कह रहे है कि पर्यटकों को वापस बुलाया जा रहा है,  लेकिन राज्य की जनता की सुरक्षा कौन करेगा? ये एक कड़वी सच्चाई है कि आतंकी संगठनों का उद्देश्य हमेशा ही गैर-मुस्लिमों का खून बहाने का होता है। अमरनाथ यात्रा चूंकि हिन्दू ही जाते हैं इसलिए यह यात्रा हमेशा से ही आतंकियों के निशाने पर होती है।लेकिन पाकिस्तान को घर मे घुसकर मारने वाली सरकार अपने ही घर में अगर तीर्थयात्रियों को वापस बुला ले तो सवाल खड़े होना लाज़िमी है।

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हर चर्चा में सिर्फ यही निकलकर आ रहा है कि राज्य में कुछ बड़ा होने वाला है। अब ये ‘बड़ा’ क्या होने वाला है जनता इसका सिर्फ कयास ही लगा सकती है, लेकिन इस कवायद को धारा 370 या फिर 35 (ऐ) हटाने की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। अलगाववादियों और हुर्रियत नेताओं पर कोई बड़ी कार्यवाही भी सरकार कर सकती है। पाकिस्तान द्वारा घाटी में कोई षड्यंत्र की आशंका के चलते भी ये गतिविधियां हो सकती है।

इन सब वजहों के बीच एक आशंका ये भी पैदा हो रही है कि कहीँ ये सब कवायद राज्य में चुनाव जीतने के लिए तो नही की जा रही है? इस वक्त जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगा हुआ है। जम्मू, कश्मीर और लद्दाख की सीटों का परिसीमन भी हो चुका है। राज्य में चुनाव की मांग भी काफी वक्त से उठ रही है। इसलिए ये संदेह उत्पन्न हो रहा है कि इस सब गतिविधियों के पीछे चुनाव एक बड़ी वजह तो नही है? ऐसा सोचने के पीछे सत्तारूढ़ दल का चुनाव जीतने के प्रति जुनून है। क्योंकि राज्यों में सत्ता के लिए भाजपा को आजकल किसी भी तरह के हथकंडे अपनाने से कोई परहेज़ नही रह गया है।

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उम्मीद करतें है कि ये कवायद चुनाव से इतर धारा 370 हटाने, कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और राज्य में शांति के लिए की जा रही है। घाटी से आतंक के खात्मे के लिए सरकार जो कदम उठाए उसमें सभी को साथ देना चाहिए। घाटी में चल रहे इस्लामिक जिहाद की मानसिकता वाले पत्थरबाज, अलगाववादी और आइसिस का झंडा फहराने वाले आतंकियों को जवाब गोली से दिया जाए ये इच्छा भी पूरे देश की है। उम्मीद करतें है कि 56 इंची सरकार कश्मीर मामले पर देश को कोई खुशखबर जल्द देगी।

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