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Talented View : मोदी को हराने के लिए ज़मीन से जुड़ा नेता चाहिए

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कल बात हुई थी कि जो पार्टी ‘फ्लोटिंग वोट’ और ‘नवमतदाताओं’ को अपनी तरफ खींच लेती है, उस पार्टी की जीत लगभग पक्की हो जाती है। ये मतदाता वर्ग अपने आप में इतना शक्ति सम्पन्न है कि पूरे चुनाव को सिर के बल पलटने की क्षमता रखता है। आज सुबह से हर चैनल पर प्रधानमंत्री मोदी का अक्षय कुमार द्वारा लिया गया इंटरव्यू दिखाया जा रहा है। इस पूरे इंटरव्यू में राजनीति से जुड़ा एक भी प्रश्न नहीं था। नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत जीवन के अनछुए पहलुओं को दिखाने की कोशिश अक्षय कुमार ने की थी।

Today Cartoon : नेताओं और मतदाताओं की कमजोरी

प्रधानमंत्री का बचपन, परिवार, परिव्राजक जीवन, निजी आदतें, उनकी सोच, उनका परिवार और मां के बारे में विचार जैसे निजी पहलू इस इंटरव्यू में दिखाए गए। बीच-बीच में आ रही मोर और अन्य पक्षियों की आवाज़ों ने इसे मनोरम बना दिया। पत्रकारों से इतर घर के सदस्य की तरह की गई इस वार्तालाप को जिसने भी देखा, वह मंत्रमुग्ध हो गया। जिसने भी यह देखा उसने यही कहा कि यह प्रधानमंत्री का अब तक का सबसे शानदार इंटरव्यू था। चुनावों की गर्मी के बीच प्रसारित हुए इस वार्तालाप को जनता काफी पसंद कर रही है। इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने मतदाताओं के इसी वर्ग को रिझाने की कोशिश की, जो सफल भी हो रही है।

कांग्रेस के लिए जनता का यह रुख तकलीफ पहुंचाने वाला है। यह एक बार फिर सिद्ध हो गया है कि प्रधानमंत्री की मार्केटिंग गज़ब की है। नए-नए तरीकों से अपनी मार्केटिंग की उनकी समझ लाजवाब है। प्रबंधन और मार्केटिंग पढ़ाने वाले बड़े-बड़े विश्वविद्यालय भी हैरान हैं कि कैसे कोई शख्स हर बार ऐसा कुछ नया लेकर आ जाता है, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं होती है। एक फ़िल्मी सितारे का प्रधानमंत्री का इंटरव्यू करना वाकई में एक अलग ही तरह की अभिनव परंपरा है। चुनावों की नोकझोंक और खींचतान की तपन के बीच ऐसा इंटरव्यू दिलों को ठंडक पहुंचाने वाला है। अब असली सवाल यह है कि प्रधानमंत्री की इस आक्रामक मार्केटिंग नीति का कांग्रेस के पास क्या जवाब है? भाई-बहन सहित पूरी पार्टी मिलकर ऐसा क्या करने का सोच रही है, जिससे प्रधानमंत्री को जवाब दिया जा सके? कांग्रेस के पास कोई नीति है भी या नहीं?  राहुल गांधी इस चुनाव में ऐसा क्या नया करने वाले हैं, जो जनता उन्हें वोट करे ? ले-देकर वही घिसे-पिटे बयान और रफाल से आगे जनता को देने के लिए उनके पास कुछ है ?  यदि सिर्फ ‘न्याय’ के भरोसे ही राहुल गांधी बैठे हुए हैं, यह अपने आप में जनता के साथ ‘अन्याय’ है। पहले की जनता और थी, जो मुफ्त देने वालों का एहसान मानती थी। आजकल की जनता मुफ्त के माल के वादे को उल्टा आपकी ही कमजोरी समझ लेती है।

Today Cartoon : राम की जगह एयर स्ट्राइक ने ली

प्रधानमंत्री के इस आक्रामक प्रचार का असल में कांग्रेस के पास कोई जवाब नहीं है। तकनीक के साथ संवेदना और जज्बातों का जो कॉकटेल मोदी बनाते हैं, वैसा करने की विपक्ष सोच भी नहीं सकता। मोदी अपनी बातों से देशवासियों को एक बड़ी तस्वीर दिखाने में सफल होते हैं जबकि बाकी नेताओं के पास मोदी को हटाने के अलावा कोई सोच नज़र नहीं आती। मोदी चाहे आसमानी-सुलेमानी बातें ही करें, लेकिन उन पर भरोसा करने का दिल करता है जबकि विपक्ष धरातल की बात भी इस तरह करता है कि उस पर भी किसी को यकीन नहीं होता है । विपक्ष को समझना होगा कि हर बार ‘गोदी मीडिया’ को कोसने से बात नहीं बनने वाली।

मोदी के पास विज़न है, नए आइडिया हैं तो कांग्रेस का “थिंक टैंक” क्या पकौड़े तल रहा है? क्यों नहीं राहुल गांधी जनता को बड़ी तस्वीरें दिखलाते हैं? राहुल गांधी के निजी जीवन से जुड़े सवालों का इंटरव्यू करवाने से रोका है क्या किसी ने कांग्रेस को?  राहुल-प्रियंका भी अपने बचपन के किस्से सुनाकर वोट मांगे, किसने रोका है?  यदि आपकी दादी आपको “जॉन ऑफ आर्क” की कहानी सुनाती थी तो भैया इस देश की जनता न ‘जॉन’ को जानती है न ‘आर्क’ को। देश के बच्चे आज भी तेनालीराम, बीरबल और पंचतन्त्र को ही पढ़ते हैं। चम्पक, नंदन और चाचा चौधरी फिर भी बच्चों को याद है, लेकिन “जॉन ऑफ आर्क” के नाम से आपको 4 वोट भी नहीं मिलने वाले। यह सच्चाई है कि राहुल-प्रियंका कभी इस देश की मिट्टी से जुड़ ही नहीं पाए हैं। विदेशों की मौज-मस्ती के बीच उन्हें गांव, किसान, बेरोज़गार सिर्फ चुनाव के वक्त ही याद आते हैं। ऊपर से ‘जॉन ऑफ आर्क’ की कहानियां सुनकर बीता आपका बचपन कैसे एक चाय बेचने वाले बच्चे की कहानी से मुकाबला कर पाएगा?

काव्य की दृष्टि से देखा जाए तब भी जनता की सहानुभूति एक संघर्षशील गरीब से ही ज्यादा होगी बनिस्बत चांदी का चम्मच मुंह में लेकर पैदा हुए राजकुमार से। मोदी के पास देश को बताने के लिए बहुत कुछ है, सुनाने के लिए पचासों कहानियां हैं, जो जनता से सीधे जुड़ जाती हैं, लेकिन राहुल-प्रियंका के पास देश को बताने के लिये क्या है? यही हालात जारी रहते हैं तो कांग्रेस को यही सलाह रहेगी कि 2019 भूल जाइए और 2024 के चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दीजिए। मोदी के बराबरी का आपके पास न नेता है, न नीति है और न ही नीयत है तो कोई चाहकर भी कांग्रेस का भला कैसे कर सकता है?  मोदी का हराना मुश्किल नहीं है, लेकिन राहुल गांधी का मोदी को हराना बहुत मुश्किल है। मोदी को हराने के लिए ज़मीन से जुड़ा नेता चाहिए। ऐसा नेता चाहिए, जिसमें करिश्मा हो जनता से जुड़ जाने का। गरीबी की सच्ची कहानी का मुकाबला ‘जॉन ऑफ आर्क’ की कहानी इस देश में  तो कम से कम नहीं कर सकती।

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