Talented View : एक बार फिर गलती कर रहा विपक्ष

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क्रिकेट में यदि कोई गेंदबाज़ लगातार फुलटॉस और नो बॉल डालता रहे और बल्लेबाज़ भी आसानी से हर गेंद को सीमा पार पहुंचाता रहे तो इसमें गलती किसकी है? हर गेंद को सीमा रेखा के पार पहुंचाने के लिए क्या सिर्फ बल्लेबाज़ ही जिम्मेदार है ? गेंदबाज़ की खराब गेंदबाज़ी का इसमें कोई कसूर नहीं है? बल्लेबाज़ को लगातार फुलटॉस मिलेगी तो वह इसका फायदा क्यों नहीं उठाएगा?  अपनी खराब गेंदबाज़ी को नज़रअंदाज़ करके सिर्फ बल्लेबाज़ को दोष देने से कुछ फर्क पड़ेगा?  

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इस गेंदबाज़ जैसी ही गलती आजकल कांग्रेस और विपक्ष के लोग कर रहे हैं। 14 फरवरी को पुलवामा हमले के बाद सभी ने एक सुर में पाकिस्तान को सबक सिखाने की मांग की। एक के बदले दस सिर लाने के वादे की याद भी सरकार को कई बार दिला दी गई। आतंक और पाकिस्तान को करारा जवाब देने की मांग हर मंच से विपक्ष ने की। यह जानते हुए कि लोकसभा चुनाव करीब है, जनता की भावनाएं उफान पर हैं, उसके बाद भी सरकार को कठोर कार्रवाई के लिए विपक्ष ने लगातार उकसाया। ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई कि यह सरकार आतंक पर एक्शन नहीं ले रही है।

दूसरी तरफ़ प्रधानमंत्री यह सोचकर खुश होते होंगे कि विपक्ष कितना नादान है। हमारे जवानों की शहादत का बदला तो सरकार लेगी ही, लेकिन इसका राजनीतिक फायदा उठाने की भूमिका तो खुद विपक्ष ने उन्हें तैयार करके दी है। सेना ने एयर स्ट्राइक करके जैश के आतंकी ठिकानों पर बम बरसाए और विपक्ष फिर बैकफुट पर आ गया। फिर कहा जाने लगा कि बदला सेना ने लिया है, सरकार का इसमें कोई हाथ नहीं। यह फिर एक गलती थी।

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विचारणीय है कि यदि बदले में सरकार का हाथ नहीं है तो हमले में सरकार का हाथ कहां से आ गया? बाज़ी अपने हाथ से फिसलती देख विपक्ष बौखलाया है और इसी बौखलाहट में एक बार फिर गलती कर रहा है। पिछली बार की गलतियों से कोई सबक न लेते हुए विपक्ष इस बार भी आतंकियों को हुए नुकसान के सबूत मांग रहा है। यहां विपक्ष यह समझने में पूरी तरह नाकाम हो रहा है कि वह अपने ही बुने जाल में फंसने की तैयारी कर रहा है।

सोचने वाली बात है कि इतनी बड़ी एयर स्ट्राइक का क्या सेना द्वारा वीडियो नहीं बनाया गया होगा? सेना के पास इस हमले से जुड़े वीडियो के अलावा पुख्ता दस्तावेज़ नहीं होंगे? क्या हमारी सेना सिर्फ जंगल में बम फेंककर आ सकती है ? विपक्ष लगातार सरकार से सबूत मांग रहा है। सरकार तत्काल सबूत दिखाकर विरोधियों के मुंह बंद भी कर सकती है, लेकिन प्रधानमंत्री विपक्ष की तरह राजनीतिक रूप से नादान नहीं है। पहले वे इस हमले के सबूत मांगने के लिए विपक्ष को पर्याप्त समय देंगे, जनता के बीच वे इस बात को मजबूती से रखेंगे कि विपक्ष को सेना पर भरोसा नहीं है। उसके बाद जब विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना लेगा और मतदान की तारीख नज़दीक आएगी, तब अचानक से एक दिन इस हमले का वीडियो जारी कर दिया जाएगा। वीडियो सामने आते ही सरकार के पक्ष में लहर बनेगी और विपक्ष की स्थिति हास्यास्पद हो जाएगी। प्रधानमंत्री की इस नीति के आगे विपक्ष एक बार फिर समर्पित हो जाएगा।

साफ दिखाई दे रहा है कि विपक्ष अपने ही जाल में उलझ रहा है और सरकार इंतज़ार में है कि कब उन्हें झटका दिया जाए। लगता है प्रधानमंत्री की राजनीतिक समझ का मुकाबला करना विपक्ष के लिए असंभव हो गया है। लगातार नो बॉल और फुलटॉस फेंक रहे गेंदबाज के रोल में विपक्ष औऱ हर गेंद पर छक्का लगा रहे बल्लेबाज के रोल में आज प्रधानमंत्री मोदी फिट बैठते हैं। ऐसा ही चलता रहा तो बल्लेबाज़ का शतक लगना तय है जबकि गेंदबाज़ यह अब भी नहीं समझ पाएगा कि गलती आखिर कहां हुई?

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-सचिन पौराणिक

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