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राफेल से बचने के लिए अगस्ता का सहारा…

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राजनीति में कभी सवालों के जवाब नहीं दिए जाते हैं। यहां सवालों के बदले सवाल उठाने वालों पर ही सवाल उठा दिए जाते हैं। अमूमन प्रश्न के बदले उत्तर मिलता है, लेकिन यहां प्रश्न के बदले भी प्रश्न ही मिलते हैं। जो सवालों के जवाब दे, वो नेता ही क्या? सवाल के जवाब देने पर नए सवाल खड़े होते हैं, जिनके फिर जवाब देने होते हैं। ऐसे सवालों और जवाबों की एक लंबी श्रृंखला बन जाती है, लेकिन इसके उलट सवाल के बदले सवाल ही पूछ लिया जाता है तो बात वहीं खत्म हो जाती है।

राफेल पर विपक्ष के सवालों से परेशान सरकार ने भी ऐसा ही एक दांव खेला है। राफेल की कीमत और खरीद में हुए कथित घोटाले के आरोपों के बीच सरकार ने वीआईपी हेलीकॉप्टर खरीद के आरोपी का प्रत्यर्पण करवा लिया है। अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले के बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल को दुबई (यूएई) से दिल्ली लाने में सरकारी एजेंसियों ने सफलता प्राप्त कर ली है। भारत लाते ही सीबीआई अधिकारियों ने मिशेल के साथ सख्ती से पूछताछ शुरू कर दी है। एजेंसियां जानना चाहती हैं कि इस डील के एवज में उसने किस-किसको पैसा बांटा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मिशेल को भारत लाते ही गांधी परिवार पर निशाना साध दिया।

राजस्थान की चुनावी रैली में मोदी ने कहा कि हेलीकॉप्टर घोटाले के एक आरोपी को हम हिंदुस्तान लेकर आ गए हैं। इससे नामदार परिवार डरा हुआ है कि ये कोई राज़ न उगल दें। मिशेल को भारत लाने का एक प्रभाव यह भी पड़ा कि इंग्लैंड में शरण लिए विजय माल्या ने भी पहली बार तेवर ढीले करते हुए बैंकों की मूल रकम 100% लौटाने की बात कही, लेकिन यदि आप ये सोचने लगे हैं कि मिशेल का प्रत्यर्पण होते ही गांधी परिवार पर शिकंजा कस जाएगा तो यह आपकी बहुत बड़ी भूल है। चुनावी मौसम में ऐसा माहौल बनाया जाता है कि चुनाव जीतते ही दूसरे नेताओं को जेल में डाल दिया जाएगा, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है।

याद कीजिये, दिल्ली विधानसभा चुनाव के पहले केज़रीवाल भी शीला दीक्षित के ख़िलाफ़ सबूतों के पुलिंदे लिए घूमा करते थे, लेकिन कुछ हुआ क्या? हरियाणा और राजस्थान के पिछले चुनाव को याद कीजिए। रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ऐसा माहौल बनाया गया था कि राजस्थान और हरियाणा में भाजपा के जीतने के साथ ही जीजाजी को जेल में डाल दिया जाएगा, लेकिन कोई पूछे कि 5 साल सत्ता में रहने के बाद रॉबर्ट वाड्रा मज़े में क्यों है? उपरोक्त उदाहरण ये स्पष्ट करतें है की चुनावी मौसम में ऐसी हरकतें सिर्फ जनता को उकसाने के लिए की जाती है। हक़ीक़त में ऐसा कुछ भी नही होगा जिससे कोई भी नेता जेल जाये।

कोई भी नेता भारत के कानून से न डरता था न डरता है। कानून से कबड्डी खेलने में यहां सभी महारथी है। मिशेल भारत आ जाये चाहे हाफ़िज़ सईद, भारत के किसी नेता का बाल भी बांका नही होने वाला। मिशेल को भारत लाना सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक दाव है जिससे विपक्ष राफेल पर सरकार को न घेर पाये। बाकी जनता चाहे लाख उम्मीदें रखे, किसी नेता को जेल भेजने की हिम्मत यहां सरकार और न्याय व्यवस्था में नही है। सिर्फ राफेल पर सवालों से बचने के लिए जनता का ध्यान अब ऑगस्टा वेस्टलैंड पर मोड़ दिया गया है। सवाल के बदले सवाल का ये एक उदाहरण है इसके अलावा और कुछ नही।

-सचिन पौराणिक

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