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Talented View : जिसको सभी ने नकारा, उसने ‘आप’ को नकारा…

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कॉलेज के ज़माने का एक सच्चा किस्सा सुनाता हूं। मेरे लगभग सभी दोस्तों की गर्लफ्रैंड हुआ करती थीं। सिर्फ एक ही दोस्त ऐसा था, जिसे कोई लड़की कभी हां नहीं कहती। कॉलेज का एक साल पूरा होने से पहले उसने लगभग सभी खूबसूरत लड़कियों को प्रपोज़ कर दिया था। कहने की जरूरत नहीं कि सभी ने उसे रिजेक्ट ही किया। दोस्त ने भी कसम खा रखी थी कि कॉलेज में दाखिला लिया है तो गर्लफ्रैंड भी बनाऊंगा ही। बहुत सोच-विचारकर उसने एक ऐसी लड़की छांटी, जिसे क्लास का कोई लड़का भाव नहीं देता था। उस लड़की का ट्रैक रिकॉर्ड भी ऐसा ही था कि कोई लड़का उससे बात नहीं करता था। दिखने में सामान्य कद-काठी की वह लड़की बिल्कुल भी आकर्षक नहीं थी। ख़ूबसूरती के किसी मापदंड पर वह खरी नहीं उतरती थी। दोस्त को लगा की कम से कम वह लड़की ज़रूर उसे ‘हां’ कह देगी और उसे गर्लफ्रैंड मिल जाएगी।

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कुछ दिनों की बातचीत के बाद उसने लड़की से अपने दिल की बात कह दी, लेकिन हाय री किस्मत! उस लड़की ने भी उसे सिर्फ ‘अच्छा दोस्त’ बताकर पल्ला झाड़ लिया। रोने-धोने और तमाम किस्म की नौटंकी के बाद भी उस लड़की का दिल नहीं पिघला। आखिरकार दोस्त ने अपने आप को संभाला और लड़की से वायदा लिया कि यह बात सिर्फ उन दोनों के बीच ही रहेगी। इस बात के लिए लड़की ने ज़रूर हामी भर दी। कुछ समय तक यह बात राज़ रही, लेकिन ऐसी बातें कॉलेज में कहां ज्यादा दिन छिपाई जा सकती हैं ? एक दिन ये बातें सार्वजनिक हो गई और उस दोस्त की जिंदगी नरक हो गई। हमारी क्लास तक तो बात ठीक थी, लेकिन यह चर्चा पूरे कॉलेज में होने लगी। सभी ने उस दोस्त का बहुत मज़ाक उड़ाया। क्लास, केंटीन, लाइब्रेरी, ग्राउंड हर जगह उसकी ही बात होने लगी। उड़ते-उड़ते यह खबर फैकल्टीज़ और एचओडी तक भी पहुंच गई। यह किस्सा कॉलेज के बाकी बचे समय के दौरान एक यादगार घटना बन गई। जिस लड़की को सभी ने नकारा, उसके द्वारा भी खुद को नकार दिए जाने से आहत दोस्त ने कॉलेज के बाकी समय किसी लड़की से कभी बात तक नहीं की।

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कॉलेज के समय की यह घटना आज इसलिए याद आ गई क्योंकि आम आदमी पार्टी को आखिरकार कांग्रेस ने गठबंधन के लिए साफ इनकार कर दिया। बीते कई दिनों से इस गठबंधन को लेकर चर्चा चल रही थी। केज़रीवाल बार-बार कांग्रेस से गुहार लगा रहे थे, लेकिन आखिरकार कांग्रेस ने इनकार कर ही दिया। कांग्रेस के खिलाफ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले केजरीवाल के लिए यह बड़ा झटका है। पूर्ण स्वराज और भारतीय राजनीति को बदलने का दम भरने वाले केजरीवाल की हालत इतनी दयनीय हो जाएगी, इसकी उम्मीद नहीं थी। जिस कांग्रेस को महागठबंधन में भी शामिल नहीं किया जा रहा है, कोई साथी दल राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार भी नहीं मान रहा है, जिस कांग्रेस के साथ कोई दल हाथ मिलाना नहीं चाह रहा है, उसी कांग्रेस के द्वारा खुद को ठुकराए जाने का दर्द केजरीवाल के अलावा सिर्फ मेरा कॉलेज वाला दोस्त ही समझ सकता है।

केज़रीवाल ने सोचा था कि कांग्रेस तो कम से कम उनसे हाथ मिला ही लेगी, लेकिन अब केज़रीवाल के लिए दुनिया का सामना करना बहुत मुश्किल होने वाला है।  पिछले काफी समय से कांग्रेस से गठबंधन के लिए ‘भीख’ मांगने वाले केज़रीवाल और आम आदमी पार्टी की हालत वाकई में दयनीय हो चुकी है। दिल्ली विधानसभा में 70 में से 67 सीट जीतकर कीर्तिमान बनाने वाले की हालत महज़ 5 साल में ऐसी हो सकती है, यह बात राजनीति के विद्यार्थियों के लिए शोध का विषय होना चाहिए। अपनी ऐसी स्थिति के लिए जिम्मेदार भी कोई और नहीं बल्कि खुद केज़रीवाल ही हैं। जो आदमी अपने ही शुभचिंतकों को अपने साथ जोड़कर नहीं रख सका, वह राजनीति जैसी कांटेदार डगर पर भला कैसे लंबा दौड़ सकता है ?  कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव, शाज़िया इल्मी, प्रशांत भूषण, कपिल मिश्रा जैसों की लंबी लिस्ट है, जो आज़ केज़रीवाल के धुर विरोधी है, लेकिन पहले ये उनके साथ हुआ करते थे।

ऐसे दौर में जब हर नेता, पार्टी गठबंधन की राजनीति कर रहे हैं, तब केज़रीवाल ने भी मेरे उस दोस्त की तरह यही कोशिश की कि वह भी किसी के साथ गठबंधन कर ले और अलग न दिखे, लेकिन किस्मत का कोई क्या कर सकता है? कांग्रेस ने केज़रीवाल को रिजेक्ट कर दिया है और ये बात सभी जान भी चुके हैं। अब केज़रीवाल किस मुंह से सबके सामने आते हैं, यह देखना रोचक रहेगा। हो सकता है केज़रीवाल अब जिंदगी में कभी गठबंधन का नाम भी न लें, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान केज़रीवाल कांग्रेस के खिलाफ कुछ कहते दिखे तो समझ लेना होगा कि “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे”

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