लट्ठ पड़ने के बाद भी कर्फ्यू के दुश्मन आ गए धरना देने

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कोरोना (Coronavirus Havoc) की महामारी (Delhi Police Banished Protesters) में हमारा देश भी फंस चुका है। विशेषज्ञ बतला रहे है कि इस स्टेज में कोरोना (Coronavirus Outbreak) को कंट्रोल कर लिया तो ठीक है अन्यथा हालात बेकाबू हो जाएंगे। एक बार देश कोरोना की तीसरी स्टेज में पहुंच गया तो भारत को इटली और ईरान बनने में देर नही लगेगी। देश प्रधानमंत्री (PM Modi) की कोरोना (Coronavirus Is Spreading) से बचने की मुहिम में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है लेकिन कुछ लौग इस नाजुक दौर में भी अपनी हरकतों से बाज़ आने को तैयार नही हो रहे है। दो खबरों पर आप गौर फरमाइए। पहली खबर ये की पटना की एक मस्जिद से विदेशी मुसलमान पकड़ाये गए है। बताया जा रहा है कि इन्हें मस्जिद में छुपाकर रखा गया था। दूसरी खबर दिल्ली (Delhi Police) से आ रही है जहां पुलिस द्वारा आज शाहीन बाग़ खाली करवा लिया गया और तंबू उखाड़ दिए गए। लेकिन अब खबर आ रही है कि शाहीन बाग़ में फिर से लौग इकट्ठे होना शुरू हो गए है। इन्हें देश को कोरोना से बचाने की बजाय अपने धरने को बचाने की फिक्र हो रही है।

उपरोक्त दोनों मामलों को देखकर आसानी से समझा जा सकता है कि कुछ लोगों के लिए अपना मजहब देश के स्वास्थ्य से कहीं ज्यादा बढ़कर है। इटली, चीन (Coronavirus China) और ईरान की स्थिति देखकर भी ये लौग सुधरने का नाम नही ले रहे है। इन्हें सावधानी बरतने का कहा जा रहा है तो ये बेशर्मी से जवाब दे रहे है कि जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में है। ये लौग अब भी पहले की तरह ही इकट्ठे हो रहे है, आंदोलन कर रहे है और देश की कोरोना से जंग को कमजोर करने में जी-जान से जुटे हुए है। इनकी मानसिकता के बारे में यही कहा सकता है कि हर मुद्दे पर इनका स्टैंड देश के खिलाफ ही होता है। कोरोना से जंग के बीच आखिर क्या जरूरत है विदेशीयों को मस्जिद में छुपाकर रखने की? सब जानते है कि देश (Delhi Police Banished Protesters) मे कोरोना विदेश से ही आ रहा है तो ऐसी हरकतें करके देश की सुरक्षा को क्यों दांव पर लगाया जा रहा है? और शाहीन बाग़ में भीड़ लगाकर भी ये लौग क्या संदेश देना चाहतें है? देश के करोड़ो लौगो की जिंदगी जरूरी है या मुट्ठी भर तमाशबीनों कि नौटंकी?

शाहीनबाग (Shaheen Bagh Protest) को पुलिस द्वारा जबरन खाली करवाना पड़ा है। जबकि (Delhi Police Banished Protesters) होना ये चाहिए था कि कोरोना से खतरे को देखते हुए इन्हें स्वेच्छा से प्रदर्शन खत्म कर देना था। पटना में भी विदेशियो की सूचना इन्हें खुद प्रशासन को देनी चाहिए थी, लेकिन उल्टा इन्हें छुपाकर रखा गया। इन विदेशियों में कोई कोरोना संक्रमित निकला तो ये किसकी जिम्मेदारी होगी? ऐसे में वाज़िब प्रश्न यही है कि कोरोना कि गंभीरता को अज्ञान की वजह से नही समझा जा रहा है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है? कोरोना से लॉकडाउन के बीच जनता को ये समझना होगा कि इसका मुकाबला अकेले और सबसे दूर रहकर ही किया जा सकता है। अगर समाज का एक वर्ग इस बड़े खतरे को अज्ञानवश नही समझ रहा है तो उन्हें समझाना चाहिए। लेकिन इसके पीछे कोई साजिश हो रही है तो सरकार को इस पर अविलंब सख्त कार्यवाही करना चाहिये। कुछ लोगों की कट्टरता की सज़ा पूरे देश को नही दी जा सकती। पूरे देश से बड़े पैमाने पर लाशें उठाने से कई गुना बेहतर है कि लट्ठ उठाकर ही मामला सुलझा लिया जाए।

Prabhat Jain

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