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Talented View : मोटर व्हीकल कानून – सज़ा या सीख

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पढ़ाई के सिलसिले में 2 साल मैं देहरादून रहा। वहां कॉलेज के रास्ते मे आईएमए (इंडियन मिलिटरी अकेडमी) पड़ता था। आईएमए परिसर सेकड़ो एकड़ में फैला विशाल क्षेत्र है। इसी परिसर के बीच से एक सड़क गुजरती है जो बल्लूपुर चौक और प्रेमनगर को जोड़ती है। ये सड़क चूंकि आईएमए की सुरक्षा की दृष्टि से बहुत अहम है इसलिए यहां सेना के जवान तैनात होतें है। इस सड़क पर चूंकि सेना का कब्ज़ा होता है इसलिए यहां के कायदे भी अलग होतें है। अनुशासन का आलम ये होता है कि सेना के एक जवान के हाथ दिखाने पर सामने से मुख्यमंत्री की गाड़ी भी आ रही हो तो उसे भी रुकना पड़ता है।

Talented View : मंदी चालू, गाड़ी बंद

सेना के जवान जब सायकलों पर सड़क पार करतें है तो दोनों तरफ का ट्रैफिक रोक दिया जाता है। आईएमए के सामने बाइक पर दो या तीन लोग बैठकर नही गुज़र सकते। बहुत बार छात्र ऐसा करतें है तो आर्मी वाले उन्ही की स्टाइल में सज़ा भी देतें है। कितने की छात्र आईएमए के बाहर सड़क पर उठक-बैठक लगाते नज़र आ जातें है। कहने का तात्पर्य इतना है कि पूरे देहरादून में कोई नियम-कानून भले न मानता हो, लेकिन आईएमए के सामने आते ही सबको नियम अचानक याद आ जातें है। कहने की जरूरत नही आईएमए के सामने की कई किलोमीटर की सड़क पर कभी कोई हादसा नही होता।

Talented View : बड़बोला पाक

नए मोटर व्हीकल एक्ट पर देशभर में चर्चा चल रही है। नियम तोड़ने पर कई गुना ज्यादा ज़ुर्माने को लेकर सबकी अलग राय निकलकर आ रही है। कोई बड़े हुए ज़ुर्माने को सही और आवश्यक बता रहा है तो कोई इसे अव्यवहारिक कदम। राज्यों में भी इस एक्ट को लेकर मतभेद है। मध्यप्रदेश, राजस्थान ने इस एक्ट को लागू करने से ही इनकार कर दिया है तो महाराष्ट्र, गुजरात जैसे भाजपा शासित राज्य भी इस मामले में डांवाडोल है। कई राज्यों ने जुर्माना राशि में कटौती की है तो कई राज्य इसे लागू करना ही नही चाहते।

लेकिन एक आदर्श स्थिति के बारे में सोचा जाए तो ये नियम बहुत जरूरी प्रतीत होतें है। अमेरिका में ट्रैफिक नियम इतने कड़े होतें है कि आधी रात में खाली सड़क पर भी अगर आप तय स्पीड से ज्यादा में गाड़ी चलाएंगे तो भारी-भरकम चालान अगले दिन घर आ जाता है। चालान भरने वाले शख्स का उस महीने का पूरा हिसाब ही गड़बड़ हो जाता है। लेकिन एक जीवनभर का सबक भी उसे मिल जाता है। एक चालान भरने के बाद वो अपने बच्चों को भी यही समझाता है कि ट्रैफिक नियमो का पालन करना है। ऐसी ही सख्ती सड़कों पर थूकने, गंदगी और कचरा फेंकने पर भी है।

अमेरिका से लौटने के बाद हम इन नियमों की तारीफ करते नही थकते लेकिन साथ ही ये भी जोड़ देतें है की हमारे देश का कुछ नही हो सकता। लेकिन जब देश सच में ही कुछ करना चाह रहा है तो उसका विरोध करने वाले भी हम ही है। अगर आप नियमों का पालन कर रहे है तो आपको ज़ुर्माने से डरने की जरूरत ही क्या है? साथ ही नियम तोड़ने वालों को एक सबक मिलना बहुत जरूरी है, नही तो हम नियमो का गंभीरता से लेंगे ही नही। हमारे लिए जान से ज्यादा जरूरी पैसा हो गया है। इसलिए पैसे बचाने के लिए ही सही जनता ट्रैफिक के नियम अपनाना सीखेगी तो।

Talented View : हम किसी से कम नहीं

और ऐसा नही है कि हमें नियम समझ नही आते। अगर आईएमए के सामने से गुजरने पर सभी को कानून याद रह सकतें है तो फिर देहरादून, उत्तराखंड और पूरे देश मे गाड़ी चलाने के दौरान भी नियम याद रह ही सकतें है। शुरू में ये नियम कड़वे जरूर लगेंगे लेकिन ये नियम जनता के हित मे ही बनाये गए है। हमें अपनी ऊर्जा इन नियमों का विरोध करने की बजाय गाड़ी के दस्तावेज तैयार कराने में लगाना चाहिये। फिर भी मन मे कोई संशय है तो एक बार गूगल पर सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या पता कीजिये। आंकड़ो का अध्ययन करने के बाद आपको नया मोटर व्हीकल एक्ट अच्छा लगने लगेगा।

-सचिन पौराणिक

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