Talented View : साईं विवाद

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जहां थोड़ा पानी इकट्ठा होने लगता है वहां हरियाली उग आती है, पौधे लग जातें है, पक्षी आने लगतें है। मतलब पानी जहां भी ठहरता है वहां एक इकोसिस्टम तैयार हो जाता है। पानी के अलावा भी ऐसे अनेक उदाहरण है जिनकी मौजूदगी मात्र से आसपास के माहौल में एक सिस्टम तैयार होने लगता है। जैसे कहीं भागवत कथा होती है भीड़ लग जाती है। इस भीड़ में सभी प्रभुप्रेमी ही नही होते बल्कि मुफ्त खाने और रहने वाले भी इसमें शामिल होकर 7 दिन तक आनंद उठातें है।

इसके अलावा जहां तीर्थ होता है वहां भी रोज़गार की तलाश में हजारों लोग पहुंच जातें है। कोई होटल खोलता है, कोई धर्मशाला, कोई चाय का ठेला लगाता है कोई टेक्सी चलाता है, कोई प्रसाद बेचता है। इस तरह एक प्रसिद्ध तीर्थ के नाम पर हजारों का रोज़गार चलता है। लेकिन कुछ तीर्थ इतने बड़े हो जातें है कि कई बार पूरा शहर ही उस पर आश्रित हो जाता है। लाखों लौग इससे सीधे रोज़गार पातें है और इसके भरोसे ही जीवन बिताने लगतें है। लेकिन किसी कारणवश उस तीर्थ की महिमा कम हो जाये तो लौग भयाक्रांत हो उठतें है।

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ऐसा ही हाल शिरडी(Sai Baba Temple) में देखने को मिल रहा है। साईं बाबा के सबसे बड़े तीर्थ में रोज ही लाखो श्रद्धालु पहुंचतें है। श्रद्धालु यहां कल्पना से परे दान देतें है। बीते दशक में शिरडी आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। लेकिन कल से शिरडी के लौग आशंकित हो उठे है और विरोधस्वरूप शिरडी बन्द कर दिया था। इसके पीछे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के वो बयान है जिसमें उन्होंने पाथरी को शिरडी के साईं का जन्मस्थान बतलाते हुए उसके विकास के लिए 100 करोड़ का फंड जारी कर दिया।

अब साईं का जन्म शिरडी में हो चाहे पाथरी(Sai Baba Birthplace) मे, इस पर चर्चा तो हो ही सकती है। जब इस देश में लोकआस्था के केंद्र श्री राम के जन्मस्थान को लेकर विवाद हो सकता है तो साईं भला कौन सी बड़ी बात है? लेकिन शिरडी वाले इस घोषणामात्र से सिहर उठे है। इसके पीछे वजह साईं की भक्ति नही है बल्कि उनके जीवनयापन की मजबूरी छुपी हुई है। क्योंकि शिरडी आने वाले श्रद्धालुओं से ही ये पूरा इलाका गुलजार होता है। हज़ारो करोड़ का सालाना चढ़ावा लेने वाला मंदिर इसीलिये इस घोषणा से खुश नही है।

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बात बड़ी सीधी है। पाथरी अगर साईं की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध होता है तो शिरडी(Sai Baba Temple) पहुंचने वाले भक्तों की संख्या में भारी कमी आएगी और श्रद्धालु पाथरी पहुंचना शूरु कर देंगे। नकद चढ़ावा और रोज़गार का नया केंद्र पाथरी बन जायेगा तो इसका सीधा नुकसान शिरडी वालों के व्यापार पर पड़ेगा। उनका धंधा मंदा होगा या फिर खत्म भी हो सकता है। इसीलिए शिरडी वाले बाबा के जन्मस्थान को पाथरी मानने को तैयार नही हो पा रहे है।

शिरडी वर्तमान में साईं भक्तों का एकमात्र ठिकाना है। लेकिन अगर पाथरी का विकास हुआ और वहां साईं का भव्य मंदिर बना तो शिरडी वालो की जमी जमाई दुकान उठ जायेगी। क्योंकि साईं मंदिर ऐसा सिस्टम बन चुका है जिसके सहारे शहर के शहर पल रहे है। इसी बात पर शिरडी वाले खफा है। जबकि देश के बाकी साईं भक्तों को इससे कुछ फर्क नही पड़ रहा है। ये मामला आस्था का नही सिर्फ रोज़गार और दुकानदारी का है। अपनी जमी जमाई दुकान खतरे में देख कोई भी विरोध करेगा ही।

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-सचिन पौराणिक

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