Talented View: मीडिया से दुश्मनी निकालने वाले समाज के दुश्मन

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“चोरी ऊपर से सीनाजोरी” ये एक पुरानी कहावत है। ये कहावत अक्सर सुनी और कहीं जाती है लेकिन कल ये चरितार्थ भी होते देख ली। मरकज़ के जमातियों ने देशभर में कोरोना फैलाया ये एक सच है। लेकिन इन जमातियों की कड़ी निंदा करने की बजाय कुछ शैतान मौलाना-मौलवी बेशर्मी पर उतर आए है। कल सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुई जिनमे ये मौलाना मीडिया को जहरीली धमकियां देते दिख रहे थे(Tablighi Jamaat Attendees Continue To Bad Mouth Media Personnel)

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मीडिया से इनकी नाराज़गी इस बात पर है कि मरकज़ के काले कारनामो को वो दुनिया के सामने रख रहे थे। इन मुल्लों को तकलीफ ये नही है कि देश को कोरोना की भट्टी में इन जमातियों ने झौंक दिया बल्कि उनको दुख इस बात का है कि मीडिया जमातियों का सच क्यों दिखा रहा है? ये लौग खुलेआम मीडिया को धमकी दे सकतें है तो आम जनता के साथ ये क्या नही करते होंगे? एक तरफ कहा जाता है भारत मे अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव किया जाता है दूसरी तरफ ये धमकी देने, गुंडागर्दी पर उतर आतें है।

जितना गुस्सा ये मीडिया पर दिखा रहे है उसका दसवा हिस्सा भी अगर ये मरकज़ और मौलाना साद के खिलाफ दिखाते तो देश मे इनकी इज़्ज़त और बढ़ जाती। कोरोना के नाम पर जिहाद फैलाने के नाम पर जो जहरीले वीडियो कुछ लौग बना रहे है उसकी निंदा में इन मौलानाओं के मुह से एक शब्द नही निकलता। थूक जिहाद करने और कोरोना फैलाने को ही जो अपना मजहब मान चुके है उनके खिलाफ भी मौलाना की ज़ुबान पर ताला लग जाता है।

Tablighi Jamaat Bad Mouth Mediaलेकिन मीडिया सच दिखा दे तो ये टुच्चई पर उतर आतें है। मीडिया ने रामरहीम, आसाराम जैसे हिन्दू संतो पर आरोप लगाए तब एक हिन्दू भी इनके समर्थन में नही आया। लेकिन मौलाना साद और मरकज़ के काले कारनामे दिखाए तो ये मीडिया पर ही हमला करने लग गए। ये उग्रता और धूर्तता ही इन लोगों का असली चरित्र है। इनकी हरकतें देखकर यही लगता है की गंगा-जमनी संस्कृति और भाईचारे की बातें इनके लिए सिर्फ एक नौटंकी है।

लेकिन सबसे ज्यादा आश्चर्य होता है पढ़े-लिखे अल्पसंख्यकों का इन जाहिल मौलानाओं की करतूतों पर चुप्पी देखकर। जहरीले मौलानाओं का सबसे पहला विरोध समाज के भीतर से शुरू होना था। लेकिन पढ़े-लिखे लौग इनकी हरकतों पर मौन स्वीकृति देतें है। समाज के अंदर इनका कोई विरोध नही होता जिससे ये उद्दंड बन जातें है। समझदार, पढ़े-लिखे लौगो की ऐसी चुप्पी भी मौलानाओं से कम जहरीली नही है(Tablighi Jamaat Bad Mouth Media)

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अगर जमातियों के इरादे नेक है और इनसे गलतीं हो गयी है तो इन्हें पश्चाताप करना चाहिए। सामने आकर इन्हें अस्पताल में भर्ती होना चाहिए और खुद को दूसरों से अलग कर लेना चाहिये। लेकिन हो उल्टा रहा है। ये छुप-छुपकर बैठे हुए है और कोरोना फैला रहे है। इनकी जांच करने डॉक्टर जातें है तो ये हिंसक हो जातें है। ये हरकतें सिद्ध करती है कि इनके इरादे नेक नही थे। इनके मन मे देश के खिलाफ कोई बड़ी साजिश चल रही है। इनके साथ सख्ती से निपटना ही कोरोना को रोकने का एकमात्र उपाय बचा है। देश को बचाने के लिए कठोर निर्णय लेने में सरकार को बिल्कुल नही हिचकना चाहिये। ये परिस्थितियां युद्ध से भी खतरनाक है इसलिए युद्ध मानकर ही इन परिस्थितियों से निपटना होगा।

-Sachin Pauranik

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