ऐसा दोहरा व्यवहार कदापि उचित नहीं…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अचानक अपना विमान उतारकर पाकिस्तान पहुंच जाते है और पूरे विश्व को चौंका देते है तो भारतीय राजनीति के पंडितों ने इसे ‘गज़ब की कूटनीति’ बतलाया। लेकिन पिछले दिनों अपने दोस्त इमरान खान के प्रधानमंत्री शपथ विधि में शामिल होने नवजोत सिद्धू पाकिस्तान पहुंचे तो उनकी खूब आलोचना की गयी। दुश्मन देश के प्रधानमंत्री और सेनाध्यक्ष को गले लगाने पर उनकी पार्टी कांग्रेस में भी विरोध के कुछ स्वर मुखर हुए। वैसे भारत-पाक दुश्मनी कोई नयी नही है।

देश के बंटवारे के साथ ही दोनो मुल्कों में रंजिश की जो लकीर खींची वो आजतक नही मिट पायी है। लेकिन इनके बावजूद भी दोनों मुल्कों के बीच क्रिकेट खेला जाता रहा, कला का आदान-प्रदान होता रहा औऱ आज भी व्यापारिक क्षेत्र में पाक को भारत ने ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा दे रखा है। पाकिस्तान पर अक्सर अपने दोहरे रवैये को लेकर आरोप लगते रहे है लेकिन दुश्मन देश के साथ व्यापार और बाकी मसलों पर हमारी तरफ से भी ऐसा ही दोहरा रवैया देखा जाने लगा है। इसी दोहरे रवैये का ताज़ा उदाहरण रूस से सामने आ रहा है जहां भारत-पाक की सेना एक साझा युद्धाभ्यास करने जा रही है।

भारत के इस कदम का चीन ने भी स्वागत किया है। राजनीती कैसे सर के बल खड़े हो जाती है इसका नमूना देखने को मिल रहा है क्योंकि अब कांग्रेस सरकार के इस फैसले पर सवाल खड़े कर रही है और सरकार को जवाब देते नही बन रहा है। सिद्धू मामले में आरोपों से घिरी कंग्रेस अब सरकार पर हमलावर है और रणदीप सुरजेवाला ने अपने ट्वीट से सीधे प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लेते हुए कटाक्ष किया की- “आतन्क की अम्मा के साथ साझा युद्धाभ्यास क्यों?” वैसे सरकार का पक्ष रखने वाले इसे भी गजब की कूटनीति कह सकते है क्योंकि मोदी सरकार का हर उल्टा-पुल्टा फैसला इन्हें यही प्रतीत होता है।

मोदी महबूबा के साथ सरकार बनाये तो गज़ब की कूटनीति और गठबंधन तोड़ दें तो भी गज़ब की कूटनीति। मोदी नवाज़ शरीफ़ से मिलने पाकिस्तान चले जाएं तो भी गजब की कूटनीति और भारत की सेना दुश्मन पाक के साथ युद्धाभ्यास करे तो भी गजब की कूटनीति। डॉलर-डीज़ल को 70 और पेट्रोल को 80 पार पहुंचाना भी शायद गज़ब की कूटनीति का ही हिस्सा है। एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जाकर तुगलकी अध्यादेश लाना भी एक गज़ब की कूटनीति है।

प्रधानमंत्री अगर कह दें कि नोटबन्दी से आतंकवाद की कमर टूट जाएगी तो गज़ब की कूटनीति और नोटबन्दी के बाद भी आतंक का कुछ न बिगड़े बल्कि घरेलू धंधे बर्बाद हो जाये तो भी गजब की कूटनीति। इसी गज़ब कूटनीति की ताज़ा तस्वीरें रूस के चेबरकुल से सामने आ रही है जहां भारत-पाक के सैनिक साथ मिलकर सपना चौधरी के गानों पर ठुमके लगाते दिखाई दे रहे है। अब संबित पात्रा को प्रेस कांफ्रेंस करके ये देश को बताना चाहिए कि ये सब क्या चल रहा है?

भाजपा ये स्पष्ट करे की सिद्धू का पाक सेनाध्यक्ष को गले लगाना, मोदीजी का नवाज़ शरीफ को गले लगाने और चेबरकुल में भारत-पाक फ़ौजियों के गले मिलने में बुनियादी अंतर क्या है? ये कैसा पैमाना है जिससे ये पता चलता है की कौनसा गले लगना देशभक्ति है और कौनसा गद्दारी? यहां चेबरकुल में गलबहियां और सीमा पर गोलियां ये साथ मे नही चलना चाहिए ठीक उसी प्रकार जैसा मोदीजी कहते थे की बमधमाकों की आवाज़ में बातचीत की आवाज़ दब जाती है। अगर पाकिस्तान सच मे भारत का इतना बड़ा दुश्मन है तो उसके साथ हर प्रकार के सम्बंध खत्म कर लेने चाहिए और अगर नही तो फिर कला, खेल और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों पर भी अनावश्यक नैतिक प्रतिबंध लगाने बंद कर देने चाहिए। दुश्मन देश के साथ ऐसा दोहरा व्यवहार कदापि उचित नही ठहराया जा सकता। हां इसे भी ‘गज़ब की कूटनीति’ कहकर उचित ठहराने की बेकार कोशिश जरूर की जा सकती है।

-सचिन पौराणिक

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