महिलाओं के लिए सरकार उठाए कड़े कदम

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जब से सीसीटीवी कैमरों के ज्यादा इस्तेमाल शुरू हुआ है, शहरों में अपराधों पर कुछ हद तक लगाम लगी है| ये बात सच है, जहां भी कैमरे लगे होते हैं वहां  अपराधी हाथ साफ करने में हिचकतें हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि उनका अपराध पकड़ा भी जाएगा और पहचान भी उजागर हो जाएगी। समाज मे अपना असली बदसूरत चेहरा उजागर ना हो जाए इस डर से भी अपराधी ऐसी जगहों पर वारदात करने से बचते हैं, क्योंकि कई घटनाएं ऐसी सामने आ चुकी हैं जहां सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की मदद से पुलिस ने असल अपराधियों को धर-दबोचा, लेकिन जहां सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा की कोई अन्य व्यवस्था ना हो उन जगहों पर अपराधियों का क्रूरतम चेहरा देखने को मिलता है।

कल से सोशल मीडिया में चल रहे एक वीडियो को देखकर मन व्यथित है। कुछ लड़के एक महिला को जबरदस्ती संबंध बनाने के लिए मजबूर करते हुए जंगल में ले जा रहे हैं और महिला उनसे रहम की भीख मांग रही है। लड़के महिला से बदसलूकी करते हुए उसके जिस्म से खेलते रहते हैं और वो बेचारी उनसे भैया कहकर छोड़ देने की गुहार लगाती रहती है। आरोपियों में एक लड़का बेशर्मी से इस पूरी घटना का वीडियो बनाता है और महिला को वीडियो वायरल करने की धमकी देता है।

ये वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया में गुस्से की लहर दौड़ पड़ी और तब पता चला कि ये वीडियो उत्तरप्रदेश के उन्नाव का है। जानकारी सामने आते ही आनन-फानन में पुलिस सक्रिय हुई और घटना में शामिल कुछ लड़कों को गिरफ्तार कर लिया गया। उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है लेकिन यहां राजनीति की बात करना मुनासिब नही है, क्योंकि जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे तब भी हालत कोई बहुत अच्छे नही थे। आज का सवाल पुलिसिया प्रणाली और राजनीति से इतर यह है की अगर वह लड़का इस घटना का वीडियो नही बनाता तब क्या होता? ये वीडियो करीब ढाई महीने पहले का बताया जा रहा है लेकिन अपराधियों की धरपकड़ तब हुई जब मामला सोशल मीडिया में पहुंचा। अगर वो लड़का ये वीडियो नही बनाता तब क्या अपराधी कभी पकड़े जाते? महिला को अपनी इज्जत की सबसे ज्यादा फिक्र है इसलिए उसने इस जबरदस्ती की शिकायत दर्ज ही नही की। उसे डर था कि लड़के उसका वीडियो वायरल कर देंगे। ऐसे एक नहीं हजारों अपराध रोज़ होते हैं, जिसमें महिला से जबर्दस्ती करके उसका वीडियो बना लिया जाता है, जिससे वह ये बात किसी को बता ना सके। इसके बाद शुरू होता है महिला के शोषण का अंतहीन सिलसिला जिसमें महिला अपने आप को इतना असहाय महसूस करती है कि कई मामलों में वो आत्महत्या तक कर लेती है।

महिलाओं के अश्लील वीडियो बनाकर उनका शोषण करना आजकल अपराधियों का पसंदीदा शगल बन चुका है क्योंकि ऐसे 99% मामलों में महिला चुप्पी साध लेती है और उसका शोषण बदस्तूर जारी रहता है। कानून अपना काम तब करेगा जब बात संज्ञान में आए लेकिन ऐसा हर केस में होता नही। कानून इन मामलों में अपराधियों की शातिर चालों के आगे नतमस्तक नज़र आता है।

उन्नाव केस में जिस तरह महिला ने अपने साथ हुई जबरदस्ती पर चुप्पी साध ली वैसे ही ज्यादातर मामलों में पीड़िता का यही स्टैंड होता है। ऐसे अपराधों पर लगाम लगाना है तो महिलाओं के अश्लील वीडियो रिकॉर्ड करने वाले अपराधियो पर गैर-जमानती धाराओं में मुकदमे दर्ज करके उनको फांसी की सज़ा सुनिश्चित करना होगी। सज़ा ऐसी हो जिससे अगली बार कोई महिला का वीडियो बनाने से पहले सौ बार सोचे। सीसीटीवी कैमरे हर जगह नहीं लगाए जा सकते लेकिन ऐसा माहौल जरूर हम बना सकते हैं, जिसमें कोई भी पीड़िता निसंकोच होकर अपने साथ हो रहे उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करा सके और दरिंदों को सज़ा दिलवा सके।

– सचिन पौराणिक

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