हिंदुस्तान को पाकिस्तान कहना स्वीकार्य नहीं

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भारत-पाकिस्तान के बीच जब बंटवारा हुआ तो उसकी नींव में था मज़हब। मुस्लिमों ने एक अलग देश पाकिस्तान ले लिया और हमारे पास बच गया हिंदुस्तान, लेकिन मज़हबी बंटवारे के बाद भी पाकिस्तान में कई हिन्दू, सिख और सिंधी छूट गए तो इधर भी लाखों मुस्लिम हिंदुस्तान में ही छूट गए। पाकिस्तान ने अलग मुल्क बनने के बाद से ही अल्पसंख्यक समुदाय पर इतना अत्याचार किया कि आज पाकिस्तान में हिन्दुओं की आबादी घटते हुए मात्र 2% रह गई है। इसके उलट हिंदुस्तान में मुस्लिम आबादी में बेतहाशा वृद्धि हुई और आज स्थिति यह है कि पाकिस्तान से ज्यादा मुस्लिम भारत में हैं।

पाकिस्तान अपने आप में इतना असफल देश है कि वह अपने नागरिकों की स्वच्छ पानी, आवास और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतें भी पूरी कर पाने में असमर्थ है। पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क बन चुका है, जो आतंकवाद और आतंकवादियों का इतना बड़ा हिमायती बन चुका है कि आज विश्व में कहीं भी आतंकवादी हमला होता है तो पहला शक पाकिस्तान और उसके नागरिकों पर जाता है। किसी मुल्क को पाकिस्तान कहना आज एक गाली की तरह बन चुका है।

पिछले कुछ समय से कांग्रेस के नेता भारत को लगातार ऐसी ही गालियां दिए जा रहे हैं। दिग्विजयसिंह का हाफ़िज़ सईद जैसे कुख्यात आतंकवादी को ‘साहब’ कहना और उसके बाद मुंबई हमले के पीछे संघ का हाथ बताना, मणिशंकर अय्यर जैसे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता का बार-बार पाकिस्तान जाना और वहां से देश को कोसना, सुशील कुमार शिंदे का ‘हिन्दू-आतंकवाद’ जैसा काल्पनिक शब्द गढ़ना, संदीप दीक्षित का भारत के सेना प्रमुख को ‘गली का गुंडा’ कहना, संजय निरुपम का सर्जिकल स्ट्राइक को फर्जी बताना और अब शशि थरूर का ‘हिन्दू पाकिस्तान’ शब्द का उपयोग करना कुछ ऐसा है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है।

मुख्य विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस का हक़ है कि वह सरकार की आलोचना करे, सरकारी नीतियों की आलोचना करे, भाजपा की आलोचना करे, प्रधानमंत्री की भी आलोचना करे, लेकिन देश को बद्दुआ और गाली देने का कांग्रेस के किसी नेता और हिंदुस्तान के किसी भी शख्स को कोई हक़ नहीं बनता हैं। एक राजनीतिक दल होने के नाते कांग्रेस का हक़ है कि वह सत्ता प्राप्त करने का यत्न करे, लेकिन इसके लिए देश को नीचा दिखाने का हक़ आपको दुनिया में कोई नहीं दे सकता।

महिला सुरक्षा पर आधारित एक फर्जी रिपोर्ट को आधार बनाकर देश के प्रधानमंत्री पर हमला बोलने वाले राहुल गांधी को अब ऐसे फ़र्जी और घृणित बयानों पर जवाब देने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए। उनको बताना चाहिए कि क्या वे इन बयानों से इत्तेफाक रखते हैं? हर बार ऐसे उल-जुलूल बयानों को निजी राय बताकर आखिर कब तक पल्ला झाड़ लिया जाएगा? राहुल गांधी बताएं कि एक मणिशंकर अय्यर को छोड़कर किस कांग्रेसी नेता पर ऐसे बयानों पर कार्रवाई की गई?

कांग्रेस को चुनाव में अपनी स्थिति बेहतर करना है तो सबसे पहले ऐसे बयान देने वालों पर लगाम लगानी पड़ेगी। महीनों के बाद जितनी सरकार विरोधी भावना और गुस्सा जनता के मन में एकत्र होता है, वह सिर्फ एक बयान से फिर से कांग्रेस की तरफ घूम जाता है। कांग्रेस के रणनीतिकारों को क्या इतनी सी बात भी समझ नहीं आती कि ऐसे बयानों से न सिर्फ कांग्रेस का नुकसान होता है बल्कि भाजपा का वोट शेयर और मजबूत होता है। हिन्दुत्व से जुड़ी शक्तियां चाहती ही हैं कि भारत ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित हो और भाजपा से जो उनका थोड़ा मोहभंग हो चला था, वह भी ऐसे बयान सुनकर फिर से भाजपा के पक्ष में हो जाता है।

हिंदुस्तान को पाकिस्तान कहना किसी भी लिहाज़ से स्वीकार्य नहीं है। शशि थरूर शायद अपनी पत्नी सुनन्दा की मौत के मामले में खुद को अभियुक्त बनाने की वजह से कुछ ज्यादा परेशान हो चुके हैं और इसी खीझ में वे सरकार पर ऐसे बचकाने आरोप लगा रहे हैं। हिंदुस्तान और पाकिस्तान की तुलना किसी सूरत में नहीं की जा सकती क्योंकि दोनों देशों में इतना फर्क है जो मूंछ के बाल और पूंछ के बाल में होता है।

-सचिन पौराणिक

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