दुष्कर्म के बदले रोटी..

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आईकॉन ऑफ द ईयर 2017  के अवॉर्ड फंक्शन के दौरान ‘टैलेंटेड इंडिया’ की ओर से सभी सेलेब्रिटीज़ का साक्षात्कार लेने मैं मुंबई पहुंचा था। वहां सरोज खान भी यह अवॉर्ड लेने आई थीं। उनसे बातचीत के दौरान उन्होंने विभिन्न विषयों पर अपनी राय बेबाकी से रखी थी। सरोज खान का व्यवहार मुझे सरल लगा और उन्होंने किसी भी प्रश्न को टालने के बजाय साफ शब्दों में उसका जवाब दिया। सेलेब्रिटी वाला अहंकार उनमें लेशमात्र भी नहीं था। उस संक्षिप्त मुलाकात में (क्योंकि उनका गला खराब था उस वक्त) उन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़ी कई बातों पर अपनी राय व्यक्त की थी।

कल से सरोजजी के उस बयान पर हंगामा मचा हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा कि कास्टिंग काउच बाबा आदम के जमाने से चला आ रहा है, लेकिन बॉलीवुड में दुष्कर्म के बाद लड़कियों को छोड़ नहीं दिया जाता बल्कि बदले में उन्हें रोज़ी-रोटी और काम भी दिया जाता है। आज के ज़माने में हर लड़की के पीछे कोई न कोई हाथ साफ करने की फिराक में रहता है और सरकारी महकमे भी इससे अछूते नहीं है।

हमारा समाज ऐसा बन चुका है, जहां हमें सच सुनने की आदत नहीं है और कोई हमें सच सुना देता है तो हम उसके दुश्मन बन बैठते हैं। हम अपने ख्वाबों की दुनिया में इतने मग्न हो चुके हैं कि सच्चाई के धरातल पर यदि कोई हमें लाना चाहता है तो ये हमें बिल्कुल अच्छा नहीं लगता है। हकीकत का आईना देखना और स्वीकार करना बड़ी हिम्मत का काम है इसलिए सरोजजी के इस बयान पर हंगामा मचा हुआ है और बड़ी तादाद में लोग इस बयान की निंदा कर रहे हैं, इसे विवादित बता रहे हैं।

यदि दिमाग खोलकर उनकी बात को समझा जाए तो पता चल जाएगा कि उनका बयान सोलह आने सच है। फ़िल्म इंडस्ट्री में ऐसा होता आया है और यह हमेशा ही एक विकल्प रहेगा। फिल्मों में काम करने की इच्छुक हर लड़की को ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जाता बल्कि यह सौदा दोनों पक्षों की सहमति से किया जाता है। लड़की अपनी इच्छा और विवेक से इस बात के लिए इनकार कर सकती है, उससे कोई जबरदस्ती नहीं की जाती है। यदि कोई लड़का या लड़की किसी भी कीमत पर अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं तो यह एक आसान उपाय जरूर है। स्वेच्छा और सहमति से ही यह सब होता है, तब इस सच्चाई को सामने लाकर सरोज खान ने कुछ गलत नहीं किया। उनकी नीयत भी सुर्खियां बटोरने की नहीं बल्कि सच्चाई बयां करने की रही होगी, ऐसा मुझे लगता है।

सरोजजी ने सिर्फ हमारे समाज को आईना दिखाया है और हम तिलमिला उठे हैं। कांग्रेस नेत्री रेणुका चौधरी ने भी कहा है कि संसद भी इन बातों से अछूती नहीं है। मेरी नजर में रेणुका चौधरी का बयान ज्यादा सुर्खियों में आना चाहिए क्योंकि फिल्मों में यह सब होता है| ये बातें गाहे-बगाहे सुनने में आती रहती हैं, लेकिन राजनीति में भी यही सब चल रहा है| ये बात थोड़ा हैरान जरूर करती है। वैसे सरकारी कार्यालय हो या निजी, कॉरपोरेट ऑफिस हो या कोई स्टोर, महिलाएं सबके निशाने पर रहती हैं, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।

आज सबसे ज्यादा जरूरत है हमारे समाज को अपनी मानसिकता को बदलने की। समाज आपसे और हमसे मिलकर बनता है इसलिए यदि हम खुद को बदलने की शुरुआत करेंगे तो हो सकता है कि समाज की मानसिकता भी एक दिन जरूर बदल जाए। जैसे क्रिकेट में भारत हारता है तो हम टीवी या फिर उस चैनल को इसका दोष नहीं देते, वैसे ही सरोज खान ने सिर्फ सच्चाई बयां की है, उन्हें दोष देना तर्कसम्मत नहीं होगा।

-सचिन पौराणिक

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