राहुल की हरकत से उन पर अविश्वास

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स्कूली जीवन में कई बार कक्षा में मेरा एक मित्र जब विलंब से आता था या फिर होमवर्क नहीं करके लाता था, तब शिक्षक की मार से बचने के लिए वह मासूम सा चेहरा बनाकर कोई भावनात्मक बहाना बना लेता था। कभी कहता खुद की तबीयत खराब थी तो कभी कहता मां बीमार थी। कभी-कभी वह इतनी शानदार एक्टिंग करता था कि हमें भी शक होता कि वह वाकई में सच कह रहा है, लेकिन शिक्षक के पलटते ही वह हमें देखकर एक शातिर मुस्कान के साथ आंख मारता था, जिससे हम समझ जाते थे कि इसकी आज की कहानी भी झूठ पर ही खड़ी है।

कल अविश्वास प्रस्ताव के मौके पर संसद में बहस चल रही थी। मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए पहले अविश्वास प्रस्ताव पर संख्या बेशक सरकार के पक्ष में थी, लेकिन मानसून सत्र की शुरुआत में लाए गए इस प्रस्ताव पर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रचनात्मक चर्चा की उम्मीद थी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस अवसर पर पूरी तैयारी के साथ भाषण तैयार करके लाए थे। भाषण के दौरान वे आत्मविश्वास से भरे दिखाई दिए और उन्होंने मोदी सरकार पर लगातार कई प्रहार किए, लेकिन भाषण समाप्त करते ही वे सीधे प्रधानमंत्री मोदी की कुर्सी के पास पहुंच गए, जहां उन्होंने मोदीजी को गले से लगा लिया।

राहुल ने पहले प्रधानमंत्री के पास पहुंचकर उन्हें इशारे में खड़े होने को कहा, लेकिन जब वे नहीं उठे तो वे उनके गले लग गए। गले लगने के बाद जब राहुल गांधी मुड़े, तब उनके चेहरे पर जो हावभाव थे, वे बेहद अजीब थे। ऐसा लगा मानो एक पहले से लिखी हुई पटकथा पर वो मात्र अभिनय कर रहे थे। उनके गले मिलने की भाव-भंगिमा कहीं से भी सदाशयता से भरी नहीं लग रही थी। यह गले मिलना अकस्मात और गर्मजोशी से भरा नहीं  बल्कि फीका इशारा मात्र था, जो पूर्वनियोजित था।

तब भी राहुल गांधी ने अपने भाषण में सरकार को अनेक बिंदुओं पर घेरा और उनके भाषण में एक नयापन नज़र आया। अपना भाषण खत्म करने और प्रधानमंत्री से गले मिलने के बाद अपनी सीट पर बैठते ही जिस तरह उन्होंने मज़ाक में आंख मारी, उससे जनता का ध्यान उनके सारे भाषण से हटकर उनके गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर आकर टिक गया। उनके आंख मारते ही यह स्पष्ट हो गया कि मेरा दोस्त जिस तरह आंख मारता था उसी तरह उनका यह कार्यक्रम एक ढोंग के अलावा कुछ नहीं था। राहुल ने अभिनय शानदार किया, लेकिन उनकी गलती यह रही कि पर्दा गिरने से पहले ही वे किरदार से बाहर निकल आए। स्कूल कक्षा में कैमरे नहीं रहते थे इसलिए सच-झूठ सब चल जाता था, लेकिन संसद में आंख मारने का राहुलजी का कारनामा कैमरे की निगाह में कैद हो गया, जिससे उन पर संसद की कार्यवाही को हल्के में लेने के इल्ज़ाम लगने शुरू हो गए और सारी चर्चा उनके भाषण से हटकर आंख मारने पर आकर अटक गई।

लोग कहने लगे कि आंख मारता राहुल हमें नहीं भाया| राहुल गांधी की किस्मत यहां थोड़ी खराब इसलिए कही जा सकती है क्योंकि उनका जो शिक्षक है, वह इतनी आसानी से उनकी बातों में आने वाला नहीं था। प्रधानमंत्री मोदी गले मिलते वक्त अपनी सीट से नहीं उठे और शालीनता से परिस्थिति को सम्हाला। हालांकि राहुल का यह कदम इतना चौंकाने वाला था की स्पीकर सुमित्रा महाजन और प्रधानमंत्री सहित पूरी संसद कुछ समय तक यह समझ ही नहीं पाई कि यह क्या था?

राहुल के भाषण के बाद संसद में चर्चा जारी रही और इस बीच राहुल की यह अदा तमाम न्यूज़ चैनलों पर चर्चा का केंद्र रही। इसके बाद पूरे देश की नज़रें संसद पर टिक गई थीं और पूरा देश प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का बेसब्री से इंतज़ार करने लगा। अंततः रात्रि 9:15 बजे प्रधानमंत्री का उद्बोधन शुरू हुआ और उम्मीद के मुताबिक, उन्होंने राहुल सहित विपक्ष के हर आरोप का चुन-चुनकर जवाब दिया। अपनी भाषण शैली का भरपूर फायदा उठाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी की हरकतों को बचकानी बताया और कांग्रेस के चरित्र को लेकर ताबड़तोड़ कई हमले किए। इस बीच टीडीपी के सांसद नारे लगाकर सदन में शोर मचाते रहे, लेकिन प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विपक्ष के सभी हमलों का करारा जवाब दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस अंदाज़ में विपक्ष को, मुख्यतः राहुल गांधी और कांग्रेस को सीधे निशाने पर लिया, उससे कांग्रेस तिलमिला गई।

कुल मिलाकर कल का दिन संसदीय इतिहास में यादगार रहा क्योंकि सदन में सरकार के खिलाफ एक ऐसा अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जिसमें कहीं अविश्वास था ही नहीं। सरकार भी निश्चिंत थी और विपक्ष ने भी न जाने किस फ़ितूर में इस प्रस्ताव का समर्थन कर दिया। इस अविश्वास प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा, उन्हें भी नहीं समझ आया कि यह प्रस्ताव आखिर लाया क्यों गया? प्रधानमंत्री के ही शब्दों में-

“न मांझी, न रहबर, न हक़ में हवाएं, है कश्ती भी जर्जर, ये कैसा सफ़र है”

-सचिन पौराणिक

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