भारत ने निभाया धर्म, साबित किया अपना महत्व

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कल से ट्रंप की भारत को दी गयी धमकी सुर्ख़ियो में बनी रही। राहुल गांधी की अगुवाई में पुरे विपक्ष ने इसे देश की जनता का अपमान बताने में कोई कसर नही छोड़ी। विपक्ष को देश के सम्मान की इतनी फिक्र करते देख अच्छा लगा। लेकिन कुछ दिन पहले ईरान के नेता अयातुल्ला खुमैनी ने भारत पर मुस्लिमो से दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। लेकिन उनके इस निराधार आरोप पर विपक्ष ने ईरान के खिलाफ ऐसा मोर्चा नही खोला जैसे अभी अमेरिका के खिलाफ खोल रखा है।(Modi Released Hydroxychloroquine To US)

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खेर, बात ये है कि अमेरिका इस समय बेहद बुरे दौर से गुज़र रहा है। कोरोना को हल्के में लेने की भारी कीमत उसे चुकानी पड़ रही है। ऐसा नही है कि अमेरिका ने युद्ध नही लड़े या वो किसी से डरता है। लेकिन अमेरिका अपनी धरती पर कभी युद्ध नही लड़ता। कभी वो इराक की धरती में लड़ता है तो कभी अफगानिस्तान की धरती पर, लेकिन अपनी ही भूमि पर उसे इस तरह का युद्ब पहली बार लड़ना पड़ रहा है। इस बार शत्रु दिखाई नही दे रहा है लेकिन चोट बहुत गहरी पहुंचा रहा है। अमेरिकी जनता पर इस तरह का प्रत्यक्ष खतरा पहली बार मंडरा रहा है।

अमेरिका के वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि 1 से 2 लाख अमेरिकी कोरोना में मारे जा सकते है। सिर्फ कल ही दो हजार मौतें अमेरिका में हुई है। लेकिन अमेरिका की समस्या ये है कि वो कोरोना से निपटने के लिए संसाधनों की कमी से भी जूझ रहा है। उसके पास न प्रचुर मात्रा में एन95 मास्क है और न ही पीपीई अर्थात पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट। ऐसे में अगर भारत उसे मलेरिया की दवाई हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन भी देना बंद कर दे तो उसकी हालत खराब हो जायेगी।

पहली बार ऐसे बेचारगी भरी परिस्थितियों में फंसकर डोनाल्ड ट्रम्प समझ नही पा रहे है कि क्या किया जाए। उनके बयानों में निराशा साफ झलक रही है। भारत के बारे में की गई उनकी टिप्पणी भी हताशा का ही परिणाम हैं। लेकिन भारत उनके दबाव में आ गया है ऐसा हरगिज़ नही है। भारत मे कहा जाता है कि “साईं इतना दीजिये जा में कुटुंब समाये, मैं भी भूखा न रहूं न साधु भूखा जाए” मतलब भगवान हमें इतना जरूर देना की हम खुद अभाव में न रहे और किसी की मदद भी कर सके।(Modi Released Hydroxychloroquine To US)

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इसलिए ट्रम्प के जवाब के बाद भारत ने स्पष्ट कर दिया कि हम हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन उन सभी देशों को निर्यात करते रहेंगे जिन्हें इसकी जरूरत है। भारत मुसीबत में फंसे सभी देशों की सहायता करने को इच्छुक है। लेकिन निर्यात की मात्रा हम तय करेंगे जिससे देश मे इस दवाई की कोई कमी न आ जाये। भारत सरकार के बीते 6 साल का ट्रैक रिकॉर्ड देखते हुए इतना विश्वास किया ही जा सकता है कि ये सरकार किसी के दबाव में कभी नही आ सकती। हां, ट्रम्प के लिए ये जरूर कहा जा सकता है कि मुश्किल हालातों में भी उन्हें शब्दो का चयन सोच-समझकर करना चाहिये। भारत अमेरिका का दोस्त है और दोस्ती के बीच धमकी की कोई गुंजाइश नही होना चाहिये।

-Sachin Pauranik

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