गलत संदेश देने वालों की मजम्मत करें

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बहुत साल पहले सनी पाजी की फ़िल्म आई थी‘ग़दर- एक प्रेमकथा’ | इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े थे साथ ही देशप्रेम और पाकिस्तान विरोधी भावना को हवा भी दी थी। इसी फिल्म के एक दृश्य में जब अपनी पाकिस्तानी मुस्लिम बीवी सकीना को लेने सनी देओल पाकिस्तान पहुंचते हैं तो सकीना के वालिद इसके लिए कुछ शर्तें रखते हैं। पहले वे कहते हैं इस्लाम अपनाओ, फिर कहो इस्लाम ज़िंदाबाद और इसके बाद सनी पाजी को पाकिस्तान ज़िंदाबाद कहने पर जोर दिया जाता है। सनी देओल इसके लिए राज़ी हो जाते हैं, लेकिन उसके बाद उन्हें ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ बोलने के लिए कहा जाता है और उसके बाद सनी देओल का हैंडपंप उखाड़ने वाला सीन आज भी जनता के दिलों में ताज़ा है।

एक विदेशी संस्था थॉमसन राइटर्स फाउंडेशन के सर्वे में यह बात कही गई है कि भारत विश्व में महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश है। इसी रिपोर्ट के हवाले से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोला कि भारत में महिलाओं की स्थिति बद्तर होती जा रही है, लेकिन प्रधानमंत्री योग के वीडियो बनाने में व्यस्त हैं। इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत में महिलाओं के प्रति अपमान और उपेक्षा का भाव रहता है। बलात्कार, यौन उत्पीड़न और भ्रूण हत्या भी बदस्तूर जारी है। ‘ग़दर’ फ़िल्म के सरदार तारासिंह की तरह ही हमने भी इन सब बातों को मान लिया कि हां, भारत में इस प्रकार के मामले सामने आते रहते हैं और इस दिशा में हमें और अधिक काम करने की जरूरत है, लेकिन फिर इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की महिलाओं से बेहतर स्थिति में क्रमशः अफगानिस्तान, सीरिया, सोमालिया और सऊदी अरब की महिलाएं हैं। फ़िल्म ‘ग़दर’ में जब तारासिंह से ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ कहने के लिए बोला गया तो सनी पाजी ने कहा, तुम्हारा पाकिस्तान ज़िंदाबाद है हमें इससे कोई मतलब नहीं, लेकिन हिंदुस्तान हमेशा ज़िंदाबाद था, ज़िंदाबाद है और ज़िंदाबाद रहेगा। यही बात इस रिपोर्ट के साथ भी है। हम मानने को तैयार हैं कि भारत में महिलाओं की स्थिति वैसी नहीं है जैसी होनी चाहिए, लेकिन यदि रिपोर्ट कहती है कि अफगानिस्तान और सीरिया जैसे देशों में महिलाओं की स्थिति हमसे बेहतर है, तब उसी क्षण यह रिपोर्ट रद्दी के टोकरे में फेंकने लायक हो जाती है। तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं से जूझ रही बुर्के में लिपटी महिलाओं की स्थिति भारत की महिलाओं से बेहतर बताने वाले फाउंडेशन के लोगों को अपने मानसिक स्वास्थ्य की जांच करवा लेनी चाहिए।

हमारे शास्त्रों में लिखा है ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमन्ते तत्र देवता’ और इन तथाकथित नारीवादी देशों में जिस मजहब का पालन होता है, उनकी महिलाओं को बुनियादी मानव अधिकार भी नहीं दिए जाते हैं। यह रिपोर्ट गलत साक्ष्यों पर आधारित, पूर्वाग्रह से ग्रस्त और पक्षपातपूर्ण है। यह रिपोर्ट भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की किसी साजिश का हिस्सा नज़र आती है इसलिए सावधान रहें और अपने देश के प्रति गलत संदेश देने वालों की कायदे से मजम्मत करें।

-सचिन पौराणिक

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