कठपुतली से ज्यादा नहीं रहेंगे इमरान !

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1992 में इंग्लैंड को क्रिकेट के विश्वकप में हराकर इतिहास रचने वाली पाकिस्तानी टीम जब पाकिस्तान लौटी तो देशभर में इस जीत का जश्न मनाया गया। पाक क्रिकेट टीम के सम्मान में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने कप्तान इमरान खान सहित पूरी टीम को जश्न के लिए बुलाया था। तब एक विदेशी पत्रकार ने नवाज़ से पूछा कि क्या इमरान को भी राजनीति में आना चाहिए? तब शरीफ ने कहा था, “मैने कई बार इमरान को राजनीति में आने के लिए कहा है, लेकिन यह मानता नहीं है। वैसे इमरान के लिए हमारी पार्टी में शामिल होने के लिइ दरवाजे हमेशा खुले हैं।”

पाकिस्तान में चुनावी नतीजे लगभग स्पष्ट हो चुके हैं और यह तय ही है कि पीटीआई के नेता और पूर्व क्रिकेट कप्तान इमरान खान अब पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री बनने वाले हैं। इमरान की पार्टी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी दल पीएमएल (एन) को बड़े अंतर से हराकर पाक आम चुनाव में एक ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली है। सेना और आईएसआई के अंदरखाने मिले समर्थन के बल पर इमरान यह जीत दर्ज करने में कामयाब हुए हैं।

इस चुनाव में आतंकवादी हाफ़िज़ सईद की पार्टी भी चुनाव में खड़ी हुई थी, लेकिन उनका एक उम्मीद्वार भी चुनाव नहीं जीत सका। भारत के कुछ बुद्धिजीवी इस पर यह व्यंग्य करते सुनाई दे रहे हैं कि यदि हाफिज सईद भारत से चुनाव लड़ता तो कुछ सीटें ज़रूर जीत जाता। कुछ लोग यह भी कहते दिखाई दे रहे हैं कि पाक की जनता ने आतंकवादियों को नकार दिया है। असली सवाल यह है कि पाकिस्तान की जनता ने अभी किसको चुना है? हाफिज को हराकर इमरान को जिताने वाली पाक जनता पर राज़ तो आखिर सेना, आतंकी और आईएसआई ही करने वाले हैं। हाफ़िज़ की पार्टी का चुनाव हारना सिर्फ दुनिया को एक झूठी तस्वीर दिखाने जैसा है कि पाक जनता आतंकवादियों के साथ नहीं है।

हकीकत यह है कि इमरान खान वजीरे-आजम बनकर भी एक कठपुतली से ज्यादा कुछ नहीं रह पाएंगे। सेना और आईएसआई जो कहेगी, उन्हें वह करना ही पड़ेगा। अपना अलग नज़रिया रखने और उससे मसलों पर अमल करने की इजाज़त उन्हें हरगिज़ नहीं मिलने वाली है। नवाज़ शरीफ सेना और आईएसआई की नहीं सुनते थे इसलिए उनको अदालतों द्वारा जेल करवा दी गई। पाक एक ऐसा अस्थिर और अराजक देश बन चुका है, जिसकी न्यायपालिका और लोकतंत्र भी भरोसा करने लायक नहीं रह गए हैं। नवाज़ के भाई शाहबाज़ शरीफ ने भी चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाते हुए परिणाम को मानने से इनकार कर दिया है।

पाकिस्तान की ये भी जाने कैसी मजबूरी है कि उनके हीरो आतंकी भले लंबी दाढ़ी, गोल टोपी और विचित्र पहनावे में दिखाई देते हैं, लेकिन उनके प्रधानमंत्री हमेशा आधुनिक दिखने वाले बिना दाढ़ी वाले और आधुनिक वेशभूषा वाले शख्स ही बन पाते हैं। नवाज़ शरीफ, परवेज़ मुशर्रफ और अब इमरान खान के उदाहरण सामने हैं। इसमें कोई दो मत नहीं कि पाक को नए वज़ीरेआज़म मिलने के बाद भी वहां के हालात बदलने वाले नहीं है। भारत से रिश्तों की बात करें, तब भी उनमें कोई अंतर नहीं पड़ने वाला है। कश्मीर सहित बाकी मामलों पर पाक का स्टैंड वही पुराना ही रहने वाला है।

पाक के क्रिकेट विश्वकप जीतने के 26 वर्ष के अंतराल के बाद आज तस्वीर पूरी तरह पलट चुकी है। इसे वक्त के पहिये का घूमना ही कहा जाएगा कि तब के क्रिकेट कप्तान इमरान अब पाक के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं तो तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ अपनी बेटी के साथ इस वक्त जेल में बंद हैं। इसमें गलती नवाज़ या इमरान की नहीं है| दरअसल, गलती इस मुल्क की किस्मत में है कि यहां प्रधानमंत्रियों का कभी कत्ल करवा दिया जाता है तो कभी तख्तापलट करवा दिया जाता है तो कभी देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया जाता है। अभी के लिए इमरान को बधाई, लेकिन संभलकर रहें यह सलाह भी है क्योंकि-

“वक्त की अदालत में हर कोई गुनहगार है
आज मुझे सज़ा मुकर्रर हुई, कल को तेरा इंतज़ार है..”

-सचिन पौराणिक

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