धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं..!

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व्यापार-व्यवसाय से जुड़े लोग आमतौर पर खुलकर किसी राजनीतिक दल का न समर्थन करते हैं न विरोध (Talented View On Baba Ramdev)। छोटे दुकानदार भले ही खुलकर किसी दल के प्रति अपनी निष्ठा दिखा भी दें, लेकिन बड़े उद्योगपति ऐसा कभी नहीं करते हैं। इसे संबंध बनाने की खूबी कहें या फिर उद्योग चलाने की मजबूरी, उद्योगपतियों के संबंध हर राजनीतिक दल से हमेशा मधुर बने ही रहते हैं। अम्बानी, टाटा, बिरला और गोदरेज जैसे उद्योगपतियों का व्यापार तब भी अच्छा चलता था, जब देश में कांग्रेस की सरकार थी और अब भी बेहतरीन चल रहा है, जब देश में मोदीराज है।

निश्चित ही यह कला सीखने में उन्हें कई साल लगे होंगे, लेकिन कल एक बाबा (Talented View On Baba Ramdev) का बयान सुनकर महसूस हुआ कि एक और नया खिलाड़ी इन उद्योगपतियों की सूची में शामिल होने के लिए तैयार हो चुका है। जी हां, आपने सही सोचा है, बात यहां योगगुरु, व्यापारी, संत बाबा रामदेव की ही हो रही है। 2012 में सफेद सलवार सूट में दिल्ली के रामलीला मैदान से भागने के बाद 2014 में खुलकर नरेंद्र मोदी और भाजपा का प्रचार करने के बाद अब 2018 में जिस तरह दल-निरपेक्षता की बातें वे करते दिखाई दे रहे हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि रामदेव ने यह कला सीख ली है।

मदुरई में कल देश के अगले प्रधानमंत्री को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में बाबा ने कहा, “देश के वर्तमान राजनीतिक हालात काफी दुविधापूर्ण हो चुके हैं। देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। मेरा ध्यान अभी राजनीति पर नहीं है। साथ ही हम किसी का भी समर्थन और विरोध नहीं करते हैं। हम इस देश को हिन्दू राष्ट्र भी नहीं बनाना चाहते बल्कि सिर्फ आध्यात्मिक भारत बनाना चाहते हैं।”

बाबा (Talented View On Baba Ramdev) के इतना कहते ही यह स्पष्ट हो गया कि 2019 के चुनाव में वे भाजपा के पक्ष में प्रचार नहीं करने वाले है। बाबाजी का वैसे भी आजकल ध्यान पतंजलि के व्यापार को फैलाने पर लगा हुआ है। पहले जिन चीजों का वे विरोध करते थे, अब उन्हीं चीजों को बेचने में उन्हें कोई गुरेज़ नहीं है। मैगी के बाद अब जीन्स बेचने को लेकर भी वे निशाने पर आ चुके हैं। पहले उनका कहना था कि जीन्स पहनना बेकार बात है और फटी हुई जीन्स पहनना बेवकूफों का काम है, लेकिन अब बाबाजी खुद ही जीन्स भी बेच रहे हैं| वे पत्रकारों को बेशर्मी से फटी हुई जीन्स भी दिखा रहे हैं। हालांकि बाबाजी का तर्क है कि उनकी जीन्स की क्वालिटी बहुत अच्छी है और वे अन्य कंपनियों के मुकाबले सस्ती भी हैं, लेकिन सवाल वही है कि अच्छी क्वालिटी की जीन्स भी कहलाती जीन्स ही है पजामा नहीं।

खैर, बाबाजी की अपनी मजबूरी भी है क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा पहले ही बाबा की बोलती बंद करवा दी गई है। बाबा को अब न काले धन पर कुछ कहने की छूट है न व्यवस्था परिवर्तन पर इसलिए उन्होंने भी अपना पूरा ध्यान व्यापार और टर्नओवर बढ़ाने पर लगा दिया है। तीन राज्यों में भाजपा की हार से उन्हें ये भी तत्वज्ञान प्राप्त हो गया है कि उद्योगपति को कभी दलगत राजनीति में नहीं उलझना चाहिए।

यह भी हो सकता है कि बाबाजी (Talented View On Baba Ramdev) ने इस बीच शाहरुख खान की फ़िल्म ‘रईस’ देख ली हो और उन्हें समझ आ गया कि कोई धंधा छोटा नहीं होता और धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है। अब बाबाजी चाहे मैगी बेचें, जीन्स बेचें, डिओडरेंट बेचें चाहे हेयर जेल बेचें, उन पर निशाना नहीं साधना चाहिये। ठीक है उनसे कुछ गलतियां हुईं, लेकिन गलतियां तो इंसान से ही होती हैं। बाबाजी ने सोचा था कि वे संत भी बने रहेंगे, सत्ता के गुरु भी बने रहेंगे और व्यापार भी चलता रहेगा, लेकिन अब उन्हें समझ आ गया कि दो नावों की सवारी एक साथ नहीं की जा सकती है। अब बाबाजी सिर्फ व्यापारी और पूंजीपति के अवतार में नज़र आना चाहते हैं। बाबाजी को अपनी नई यात्रा के लिए शुभकामनाएं..!

-सचिन पौराणिक

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