वाहवाही के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा डाली खतरे में…

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जिन लोगों ने पासपोर्ट बनवाए हैं, वे यह बात अच्छे से जानते हैं कि इसके लिए भरपूर कागज़ी कार्यवाही, कई गवाहों के अलावा पुलिस वेरिफिकेशन सहित तमाम पेचीदगियों से गुजरना पड़ता है। भारत सरकार द्वारा जारी पासपोर्ट एक विशिष्ट पहचान-पत्र होने के अलावा दुनियाभर में कहीं भी जाने का लाइसेंस भी होता है। इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस के जांच अधिकारियों के अलावा पासपोर्ट जारी करने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी बहुत अहम होती है इसलिए वे सभी कागज़ों को तफ़सील से परख लेना चाहते हैं, जो बिल्कुल सही है।

लखनऊ के पासपोर्ट कार्यालय में एक मोहतरमा पासपोर्ट बनवाने आईं, जिनके डाक्यूमेंट्स में अलग नाम था और निकाहनामे में अलग। जाहिर तौर पर ऐसी परिस्थिति में अधिकारी आपत्ति दर्ज करेगा ही क्योंकि एक शख्स के दो नाम से यदि पासपोर्ट जारी हो जाएंगे तो इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। अधिकारी ने जो किया, वह कानून सम्मत भी था और देश की सुरक्षा के लिए सही भी, लेकिन कहानी इतनी सीधी नहीं थी बल्कि उसमें एक पेंच था।

दरअसल, उस महिला ने एक मुस्लिम से शादी कर रखी थी, लेकिन सारे कागज़ात एक नाम से नहीं बनवा रखे थे इसलिए मोहतरमा ने तुरंत ‘विक्टिम कार्ड’ खेलते हुए मीडिया में हंगामा मचाया कि एक मुस्लिम से शादी करने की वजह से उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। विदेशमंत्री सुषमा स्वराज से भी उस महिला ने शिकायत कर दी। बात यहां तक भी सही थी, लेकिन विदेशमंत्री से उम्मीद थी कि वे तथ्यों को परखकर ही कुछ फैसला लेंगी।

‘हिन्दू राष्ट्रवादियों’ की सरकार कहलाने वाली भाजपा की मंत्रीजी ने तुरंत उस मोहतरमा का पासपोर्ट जारी करवा दिया और उस अधिकारी का तबादला भी करवा दिया। इसके पहले भी मंत्रीजी कई पाकिस्तानी नागरिकों को भारत में इलाज के लिए पासपोर्ट जारी करवाने में मदद कर चुकी हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि सुषमाजी का पाकिस्तान और एक वर्ग विशेष के प्रति कुछ ज्यादा ही प्रेम उमड़ता है। इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन आपके प्रेम की कीमत एक ईमानदार अधिकारी आखिर क्यों भुगते?

आज एक अधिकारी का तबादला ईमानदारी से कार्य करने पर हो गया| इससे देश के हजारों पासपोर्ट केंद्र के कर्मचारियों की मनोदशा पर क्या प्रभाव पड़ेगा? आइंदा यदि किसी वर्ग विशेष की महिला के पासपोर्ट में कोई कागज़ी कमी रही, तब अधिकारी पर उसके बाद भी पासपोर्ट जारी करने का मनोवैज्ञानिक दबाव नहीं रहेगा? ‘तिल का ताड़’ बनाकर या मीडिया बुलाने से क्या पासपोर्ट के नियम बदल दिए जाते हैं? सुषमा स्वराज जैसी बुद्धिमान मंत्री से ऐसे बचकाने फैसले पर देश के तमाम बुद्धिजीवी हैरान हैं। मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए एक विदेशमंत्री को ऐसी नाजायज़ हरकत करना क्या शोभा देता है?

वैसे मंत्रियों और सरकारी घोटालों की जांच में सालों लग जाते हैं, लेकिन मुस्लिम तुष्टिकरण की कोशिश में अंधे हो चुके लोगों ने एक घंटे में जांच करके अधिकारी का तबादला भी करवा दिया और जिसके पासपोर्ट आवेदन पर अलग नाम है, आधार कार्ड पर अलग और निकाहनामे पर अलग, उसका पासपोर्ट जारी कर दिया गया। हिन्दू राष्ट्रवादियों की सरकार ऐसी ओछी राजनीति कर रही है और भक्त इस पर सवाल उठाने के बजाय भजन करने में मगन हुए जा रहे हैं। यह मामला सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, लेकिन सुर्खियां बटोरने की अभिलाषा और तुष्टिकरण की राजनीति इन सब बातों पर हावी हो रही है।

-सचिन पौराणिक

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