Talented View: संक्रमण फैलाने वाले कौन? देशभक्त या देशद्रोही…?

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कोरोना से बचाव के लिए लॉकडाउन तोड़ने के क्या नतीजे हो सकतें है ये दिल्ली के निज़ामुद्दीन ने देश को दिखा दिया है। देशव्यापी लॉकडाउन की यहां की एक मस्जिद ने धज्जियां उड़ाते हुए एक मजहबी कार्यक्रम किया था। बताया जा रहा है कि यहां विदेश से आये मौलाना भी इकट्ठे हुए थे। इनकी जानकारी भी पुलिस से छुपाई गयी और प्रशासन की जानकारी के बिना ही ये जलसा किया गया(Muslims Accused Of Spreading Corona Virus In India)

मामला ये है कि दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मरकज से कोरोना के 24 मरीज मिले है। इस खबर के सामने आने के बाद दिल्ली समेत पूरे देश में हड़कंप मच गया है। तत्काल प्रभाव से 350 लोगों को राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और निजामुद्दीन मस्जिद वाले इलाके को सील कर दिया गया है। अब प्रशासन उन सभी लोगों को ढूंढने में लगा है जो इस जलसे में शामिल हुए थे। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग और विश्व स्वास्थय संगठन की टीम ने इलाके का दौरा किया है। यहां के मुख्य मौलवी के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने महामारी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

बीते कुछ दिनों में देशव्यापी लॉकडाउन से कोरोना को रोकने में देश काफी हद तक सफल हुआ था। कोरोना के नए मरीज उस अनुपात में नही बढ़ रहे थे जिसका अंदेशा था। लेकिन एक वर्ग की तरफ से लगातार खबरें आ रही थी कि वो इस लॉकडाउन को सहयोग नही कर रहे है। मस्जिदों में चोरी-छुपे नमाज़ पढ़ी जाती रही और इन्होंने परिस्थिति की गंभीरता को समझा ही नही। पुलिस द्वारा नमाज़ पढ़कर निकल रहे लोगों पर लाठीचार्ज के कई वीडियो भी सामने आए है।

लेकिन निज़ामुद्दीन की घटना ने देश की कोरोना से जंग को बहुत बड़ा धक्का दे दिया है। अटकलें यही लगाई जा रही है कि विदेश से आये लोगों से संक्रमण बड़ी मात्रा में फैल गया। इससे एक बुज़ुर्ग की मौत भी हो चुकी हैं। इससे भी बड़ी परेशानी और चिंता की बात ये है कि ये जलसा 13 से 15 मार्च तक हुआ था और तब से हजारों लौग यहां से निकल चुकें है। ईन लोगों ने अपने गांव, शहर और घर के कितने लोगों को संक्रमण दिया होगा इसकी न संख्या गिनी जा सकती है और न ही अंदाज़ लगाया जा सकता है(Muslims Accused Of Spreading Corona Virus In India)

इस जलसे में शामिल होने इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से भी बड़ी संख्या में श्रध्दालु पहुंचे थे। भारत से इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लौग उत्तरप्रदेश समेत देश के कई राज्यों से पहुंचे थे। अब इन लोगों की पहचान करके उन्हें ढूंढना भूसे के ढेर में सुई ढूंढने जैसा होगा। और इन्हें ढूंढ भी लिया तो मामला खत्म नही होगा क्योंकि तब से अब तक न जाने कितनों में ये लौग संक्रमण फैला चुके होंगे। ये एक ऐसी न्यूक्लियर चैन बन जाएगी जिसका विस्फ़ोट हमारा देश शायद ही बर्दाश्त कर पाए।

जो लौग अब भी लॉकडाउन की अमहियत को नही समझ रहे है वो कृपया निज़ामुद्दीन की घटना से संज्ञान लें। आपकी थोड़ी सी लापरवाही न सिर्फ आपको बल्कि पूरे देश को भारी पड़ सकती है। आपकी जान की हो सकता है कोई कीमत न हो,लेकिन ऐसा करके आप उसकी जान भी खतरे में डाल रहे है जिसका जीवन अनमोल है। इसलिए खुद की न सोच सकने वाले कम से कम देश के लिए ही कुछ दिन शांति रख लें तो बड़ी कृपा होगी।

-Sachin Pauranik

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