मुसलमानों का कहना पहले हमारा मजहब और फिर देश

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वीर सावरकर (Munawwar Rana Daughter Statement) ने एक बार कहा था-“तुम मुसलमान हो इसलिए मैं हिन्दू हूं, अन्यथा मैं विश्वमानव हूँ” सावरकर की बात में दम था। क्योंकि अगर एक पक्ष अपनी मजहबी पहचान को हमेशा सबसे ऊपर रखना चाहेगा तो दूसरा भला क्या कर सकता है? कुछ दिन पहले प्रख्यात शायर मुनव्वर राणा की बेटी का एक बयान सुना। मुनव्वर  (Munawwar Rana)  के बेटी सुमैया ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जाकर ये बयान दिया था कि हमें ध्यान रखना है कि हमें इतना न्यूट्रल नहीं होना है कि हमारी पहचान ही खत्म हो जाए।”पहले हम मुसलमान हैं और उसके बाद कुछ और हैं। हमारे अंदर का जो दिन है, जो इमान है, वह जिंदा रहना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि हम अल्लाह को भी मुंह दिखाने लायक न रह जाएं।” सुमैया ने जो बात खुलकर कही उस बात को मानने वालों की संख्या करोड़ो में है। कमोबेश ऐसे ही हालात आजकल टीवी चेनलो की बहस में भी बन जातें है जब कोई मौलाना सीना ठोककर यही बात कहता है कि हम सबसे पहले मुस्लिम है और उसके बाद कुछ और। मतलब देश, कानून, अन्य धर्म की भावना सब बाद में आती है, सबसे पहले आता है उनका मजहब।

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कल मध्यप्रदेश (Munawwar Ranas Daughter Statement)  के खेल और शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी (Jitu Patwari) का एक बयान सामने आया। जीतू ने कहा कि “मैं हिंदू हूं और राम को मानता हूं लेकिन किसी दिन अगर भगवान राम और संविधान में से किसी को चुनना पड़े तो मैं संविधान को चुनूंगा।” जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने जो कहा उसमें हिंदुत्व का उदारवादी चेहरा दिखाई देता है। ज्यादातर हिन्दू अपने धर्म से पहले देश और संविधान को ही रखतें है। हिंदुत्व की सहिंष्णुता का सबसे बड़ा प्रमाण ही यही है कि हिन्दू अपने भगवान और आस्था से ऊपर मातृभूमि और संविधान को रखता है।आज भारतीयों की विदेश में इतनी इज़्ज़त क्यों है? क्यों विदेशों में पाकिस्तानी भी खुद को हिंदुस्तानी बतातें है? क्यों भारत में भी कुछ अल्पसंख्यक अपना मजहब छुपाकर जानबूझकर दुकान का नाम ऐसा रखतें है जिससे उनके मजहब का पता न चले? ये सब आखिर क्यों किया जाता है? इसका जवाब हिंदुत्व की सर्वसमावेशी विचारधारा में मिलता है। विदेश में भारतीय जिस देश मे रहता है उस देश का होकर रहता है, उसके कानून का सम्मान करता है। उसका धर्म कभी उस देश की परम्पराओ को सम्मान देने से खतरे में नही आता। इसलिए भारतीय पूरे संसार मे सम्मान पातें है।

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जबकि (Munawwar Ranas Daughter Statement) एक बड़ा वर्ग है जो हमेशा, हर जगह अपने मजहब का हवाला देकर कभी स्थानीय समुदाय के साथ घुलमिलकर नही रह सकता। इस वजह से ये लौग कभी वो इज़्ज़त नही पाते जो दूसरों को मिलती है। इस विचारधारा को इसीलिए हर देश मे टकराव झेलना पड़ता है। इनके कट्टरपन के जवाब में सामने वाले को भी कट्टरपन दिखाना पड़ता है। म्यांमार में भी यही हुआ। परम आहिंसावादी बौद्ध अगर हिंसक हुए तो इसके पीछे के कारणों को समझना बहुत जरूरी है।मध्यप्रदेश के मंत्री जीतू पटवारी तो वक्त पड़ने पर राम की जगह संविधान को चुन लेंगे लेकिन एक बड़ा वर्ग इसी संविधान को ठेंगा दिखाने में एक पल भी नही सोचेगा।

एक देश (Munawwar Ranas Daughter Statement) के तौर पर हम जिन परिस्थितियों से गुज़र रहे है वो बेहद नाजुक है। कट्टरपंथी विचारधारा हमारे देश पर हावी न हो इसके लिये हम सबको जागरूक होना पड़ेगा। मजहबी कट्टरता का परिणाम क्या होता है ये हमे इराक, सीरिया (Syria), ईरान (Iran), पाकिस्तान (Pakistan)  और यमन (Yemen) जैसे देशों को देखकर समझ जाना चाहिए। देश को इस समय सावरकर के कहे शब्दों को याद रखने की जरूरत है।

जीतू पटवारी मोदी के भाषण पर भड़के

Sachin pauranik

 

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