Talented View: मोदी आभामंडल को तोड़ने का विपक्ष कैसे बनाएगा टीका

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कल रात 9 बजे प्रधानमंत्री मोदी के कहने पर देश ने दीवाली मना ली। जनता कर्फ्यू के ताली और थाली की ही तरह दियों और मोमबत्तियों को भी जनता का अभूतपूर्व प्रतिसाद मिला। जैसा पिछली बार प्रधानमंत्री ने सिर्फ ताली बजाने का कहा था और जनता ने जुलूस निकाल दिए थे। इस बार भी प्रधानमंत्री ने दीपक और मोमबत्तियां जलाने का कहा था लेकिन जनता ने साथ ही जमकर आतिशबाजी भी की(Narendra Modi Unite Modi)

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इस पर चर्चा हो सकती है कि दीपक,मोमबत्ती जलाने से कोरोना कैसे भागेगा या फिर एकजुटता कैसे आएगी? लेकिन चर्चा का रुख इस तरफ भी जरूर होना चाहिये कि अब से पहले भारत के किस प्रधानमंत्री की बात जनता सुनती थी? कल्पना कीजिये यही दिए जलाने की बात अगर भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंग करते तो क्या होता? देश की छोड़िए कांग्रेस के नेता तक अपने घरों में दीप न जलाते। इससे पहले के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी या नरसिंग राव की बात भी कोई नही सुनता।

प्रधानमंत्री के अलावा भी देश के किसी नेता में इतनी कूवत नही जो जनता से अपनी बात मनवा सके। नरेंद्र मोदी से पहले किसी प्रधानमंत्री की बात जनता सुना करती थी तो वो थे लाल बहादुर शास्त्री जी। बड़े-बुज़ुर्ग बतातें है कि शास्त्रीजी के कहने पर देश ने एक वक्त का खाना छोड़ दिया था। उनके जाने के दशकों बाद अब जाकर देश को पुनः एक ऐसा नेता मिला है जिसकी जनता सुनती है।

Narendra Modi Unite Modi

कोरोना से जंग देश कैसे जीतेगा या सरकार की इस पर तैयारियां विश्व स्तरीय है या नही ये एक अलग चर्चा है। लेकिन देश को एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य फिलहाल मोदी के अलावा और कोई नेता करता दिखाई नही दे रहा। मोदी की खासियत ये है कि वो जनता से सीधा संवाद करतें है। विपक्ष उनकी गुगली मे हर बार ऐसा फंसता है कि उसकी स्थिति सांप-छछूंदर वाली बन जाती है।

ताली-थाली और दिए जलाने की प्रधानमंत्री की मुहिम में जनता बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है। इसमें वो लौग भी शामिल होतें है जो भाजपा के वोटर नही है। लोकलाज या कहें भीड़ से अलग दिखने के डर में विपक्षियों ने भी अपने घरों में दीप जलाए। विपक्ष की यही हालत प्रधानमंत्री हर बार बना देतें है। वो खुलकर न ऐसी किसी मुहिम का समर्थन कर पातें है और न ही विरोध। बल्कि ऐसी मुहिम में हर बार विपक्ष के आपसी मतभेद खुलकर सामने आ जातें है(Narendra Modi Unite Modi)

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विपक्ष किंकर्तव्यविमूढ़ होता है तो उनका वोटर भी कुछ समझ नही पाता। इस तरह की मुहिम से विपक्ष के कुछ पक्के वोटर मोदी की तरफ चले जातें है। कोरोना की तरह ही विपक्ष के पास इसका भी कोई इलाज़ नही है। विपक्ष को सोचना होगा कि उन्हें इस परिस्थिति से निकलने का उपाय खुद ही खोजना होगा। कोरोना का वैक्सीन आज नही तो कल बन ही जायेगा। लेकिन मोदी से निपटने का वैक्सीन विपक्ष को खुद ही खोजना होगा।

-Sachin Pauranik

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