नास्तिक बने मोदी तो केजरीवाल को बना दिया आस्तिक

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एक गांव में दो विचित्र इंसान रहा करते थे। विचित्र मतलब वो थे तो आम इंसानों (Kejriwal Recited Hanuman Chalisa) की ही तरह लेकिन उनकी सोच थोड़ी अजीब थी। उनमें से एक पक्का नास्तिक था और एक पक्का आस्तिक। एक हर बात में भगवान (God) का विरोध करता था तो दूसरे को भगवान के अलावा कुछ दिखाई ही नही देता था। नास्तिक ने नास्तिकता के समर्थन में और आस्तिक ने आस्तिकता के समर्थन में एक से बढ़कर एक दलीलें इकट्ठी कर रखी थी।नास्तिक की बात सुने तो लगता कि वाकई ईश्वर कुछ है ही नही और आस्तिक की बातें ईश्वर का साक्षात दर्शन करवा देती थी। इस प्रकार एक ही गांव में दो परस्पर विरोधी ध्रुव रहा करते थे। दोनों अपने तर्कों, दलीलों से गांववालों को अपने पक्ष में करने की कोशिश करते रहते थे। गांववाले इसीलिए दोनों से दुखी थे। गांव वालों ने सोचा एक दिन दोनो की बहस करवा लेते है। जो भी हारेगा वो दूसरे की बात मान लेगा और इससे हमारी रोज़-रोज़ की समस्या खत्म हो जायेगी।तय समय पर दोनो को वहां लाया गया और बहस शुरू हुई। आस्तिक ने भगवान के अस्तित्व के समर्थन में और नास्तिक ने भगवान (God)  के विरोध में शानदार दलीलें पेश की। दोनो के तर्क इतने वजनदार थे कि गांववाले भी हैरान रह गए। सुबह से दोपहर हो गयी लेकिन बहस खत्म होने का नाम नही ले रही थी। लेकिन शाम होते-होते कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी ने उम्मीद नही की थी। नास्तिक, आस्तिक (Kejriwal Recited Hanuman Chalisa)  के तर्कों से प्रभावित होकर आस्तिक बन गया और आस्तिक, नास्तिक की बातें सुनकर नास्तिक बन गया।मतलब जो अब तक आस्तिक था वो नास्तिक बन गया और नास्तिक, आस्तिक बन गया। इस अदला-बदली से गांववाले बहुत दुखी हुए क्योंकि उनकी समस्या वहीं की वहीं रही। ये कहानी आज इसलिए याद आ गयी क्योंकि ऐसे ही कुछ हालात दिल्ली चुनाव (Delhi Assembly Elections 2020) में बनते जा रहे है। दिल्ली चुनाव (Delhi Assembly Elections 2020) प्रचार की शुरुवात में केजरीवाल (Arvind Kejriwal) विकास के मुद्दों को पकड़े हुए थे तो भाजपा (BJP) भावनात्मक मुद्दों को। लेकिन बीते दिनों में ये तस्वीर पूरी तरह पलट गई।

Pakistan को Arvind Kejriwal का तमाचा

Kejriwal Recited Hanuman Chalisa | Delhi Assembly Elections 2020

2 दिन से केजरीवाल (Kejriwal Recited Hanuman Chalisa) हर चेनल पर हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) गाकर सुना रहे है तो प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) कह रहे है कि वो दिल्ली के विकास को रफ्तार देखरे रहेंगे। लेकिन जब चुनाव प्रचार शुरू हुआ था तब राम, हनुमान भाजपा (BJP) की जुबान पर थे और केजरीवाल (Arvind Kejriwal) विकास का दामन थामे हुए थे। लेकिन भाजपा की गुगली में उलझकर अब केजरीवाल खुद को हनुमान का भक्त साबित करने पर तुले हुए है। गांववालों की तरह इस अदलाबदली से दिल्ली वाले परेशान है।दिल्लीवासी समझ नही पा रहे की कुछ सप्ताह में ऐसा क्या हो गया कि केजरीवाल (Kejriwal Recited Hanuman Chalisa)  को हनुमान चालीसा गाकर सुनाना पड़ रही है? केजरीवाल और भाजपा के बीच मुद्दों की अदलाबदली किसी की समझ नही आ रही है। लेकिन इस बदलाव से भाजपा (BJP) को मुस्कुराने का मौका जरूर मिल गया है। उनके नेता कह रहे है की एक दिन ओवेसी भी ऐसे ही हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) पढ़ते नज़र आएंगे। कहते है हनुमान जी कलियुग के देवता है। लेकिन दिल्ली चुनाव (Delhi Assembly Elections 2020) में चल रही हनुमान चालीसा सुनकर अब लगता है कि वाकई हनुमान जी की महिमा बड़ी निराली है..!

नास्तिक बने Modi तो Kejriwal को बना दिया आस्तिक | Battle For Delhi

नास्तिक बने Modi तो Kejriwal को बना दिया आस्तिक | Battle For Delhi | Delhi Election 2020सुबह से दोपहर हो गयी लेकिन बहस खत्म होने का नाम नही ले रही थी। लेकिन शाम होते-होते कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी ने उम्मीद नही की थी। नास्तिक, आस्तिक के तर्कों से प्रभावित होकर आस्तिक बन गया और आस्तिक, नास्तिक की बातें सुनकर नास्तिक बन गया। मतलब जो अब तक आस्तिक था वो नास्तिक बन गया और नास्तिक, आस्तिक बन गया। इस अदला-बदली से गांववाले बहुत दुखी हुए क्योंकि उनकी समस्या वहीं की वहीं रही। ये कहानी आज इसलिए याद आ गयी क्योंकि ऐसे ही कुछ हालात दिल्ली चुनाव में बनते जा रहे है। दिल्ली चुनाव प्रचार की शुरुवात में केजरीवाल विकास के मुद्दों को पकड़े हुए थे तो भाजपा भावनात्मक मुद्दों को। लेकिन बीते दिनों में ये तस्वीर पूरी तरह पलट गई।#DelhiElections2020

Talented India News द्वारा इस दिन पोस्ट की गई बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

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Vagisha pandey

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