लेडी शराब दुकान जहां मिल रहीं कमलनाथ की दारु

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लोकतंत्र में जनता मालिक होती है ये बात सिर्फ (Woman Only Liquor Shops) कहने सुनने में अच्छी लगती है, असल मे जनता मालिक नही मूर्ख होती है। गलत मत समझिए, मूर्ख असल में जनता नही होती उसे नेताओ द्वारा बनाया जाता है। क्योंकि एक तरफ सरकारें शराब, सिगरेट और तम्बाखू की पेकिंग पर बड़े-बड़े शब्दो मे इसे “सेहत के लिए हानिकारक” लिखवाकर जनता को ये दिखाती है कि वो उनके लिए फिक्रमंद है लेकिन दूसरी तरफ यही सरकारें जोड़तोड़ करके इन्हें बिकवाने में भी मदद करती है जिससे उन्हें वित्तीय लाभ पहुंचे।शराबबंदी की मांग अक्सर जनता द्वारा उठाई जाती है लेकिन सरकारें वित्तीय घाटे के नाम पर इसे मंजूरी नही देती। लेकिन बिहार जैसे पिछड़े राज्य ने देश को ये दिखलाया है कि ये बातें कोरी गप है। क्योंकि बिहार और गुजरात शराबबंदी (Woman Only Liquor Shops) करके भी राज्य का विकास कर सकतें है तो बाकी राज्य ऐसा क्यों नही कर सकते? दरअसल सरकारों की नीयत में खोट है इसीलिए वो जनता को गलत रास्ते पर धकेलते है।

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Cartoon On Woman Liquor Shops In MP | MP News

शराब (Woman Only Liquor Shops) का जिक्र आज इसलिए निकल आया क्यूकी कमलनाथ के नेतृत्व वाली मध्यप्रदेश की सरकार ने राज्य में महिलाओं के लिए अलग से शराब की दुकानें खोलने का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि महिलाएं भी बिना किसी समस्या के शराब खरीद सकें। बताया जा रहा है कि इन दुकानों पर वो ब्रांड रखे जाएंगे जिनकी शराब महिलाओ को पसंद आती है। कमलनाथ सरकार के इस फैसले के बाद यह माना जा रहा है कि शुरुआत में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में एक-एक ऐसी दुकानें खोली जाएंगी। इसके अलावा एक खबर और मध्यप्रदेश से ही है जहां विदेशी शराब की ऑनलाइन बिक्री को मंजूरी दे दी गयी है। विपक्ष में बैठी भाजपा ने इस फैसले की आलोचना करते हुए प्रदेश की कमलनाथ सरकार को ‘दारू बेचने वाली सरकार’ करार दिया है। कमलनाथ को आये ज्यादा दिन नही हुए इसलिए पहले सवाल भाजपा से कर लेतें है कि शराब अगर इतनी ही बुरी है तो खुद के शासन में रहते राज्य में शराबबंदी लागू (Woman Only Liquor Shops) क्यों नही की गई? 15 साल लगातार भाजपा के शासन के दौरान क्यों उन्हें समाज़ की ‘सेहत’ की फिक्र नही हुई? ये कैसी फिक्र है जो विपक्ष में रहते तो महसूस होती है लेकिन सत्ता में आते ही गायब हो जाती है? ये फिक्र कहीं ‘ढोंग’ तो नही है?

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अब कमलनाथ सरकार (Kamal Nath Government) से ये पूछना है कि महिलाओं के लिए शराब की अलग दुकानें खोलने का वाहियात आइडिया उन्हें कहाँ से आया? (Woman Only Liquor Shops) महिलाओ ने कब राज्य सरकार से ऐसी मांग उठाई की उनके लिये शराब की अलग से दुकानें खोली जाए? महिलाएं तो शराब की खिलाफत के लिए जानी जाती है और कमलनाथ सरकार उन्हें ही बदनाम करने में लग गयी है? मुख्यमंत्री के सलाहकारों और कमलनाथजी की खुद की बुद्धि क्या इतनी भृष्ट हो गयी कि वो महिलाओं को शराबी बनाना चाह रहे है? महिलाओं के लिए पूरे राज्य में भी शराब की दुकानें खुद जाएंगी तब भी महिलाएं शराब का विरोध ही करेंगी।दूसरा फैसला सरकार ने शराबियों के हित मे ये किया कि शराब की डिलीवरी अब घर-घर दूध की तर्ज़ पर की जायेगी। क्योंकि सरकार ने विदेशी शराब के ऑनलाइन बिकने पर लगी रोक हटा दी है। किसानों की कर्जमाफी से राज्य को हुए वित्तीय घाटे से उबारने के लिए शायद ये कवायद की जा रही है? लेकिन कमलनाथ को बिहार और गुजरात से सीखना चाहिये की बिना शराब बेचे भी सरकारें चलाई जा सकती है और विकास किया जा सकता है। खुद के वोटबैंक के लालच में पूरे प्रदेश को ‘शराबी’ बनाने की इस कोशिश का जनता वक्त आने पर जरूर जवाब देगी।

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