Talented View: कट्टरपंथी कोरोना से दुनिया को बचाने की ज़रूरत

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(Cartoon On Kabul Terror Attack) दिल्ली में जब शाहीन बाग़(Delhi Shaheen Bagh) का धरना चल रहा था तब एक तस्वीर बहुत लोकप्रिय हुई थी। एक सरदार जी अपना घर बेचकर शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों को लंगर खिला रहे थे। सिख कौम वैसे भी बहुत सेवाभावी होती है। हर आपदा में पीड़ितों को सबसे पहली मदद सरदार लौग पहुँचाते है और अपने गुरुद्वारों में सभी धर्मों के लोगों को ये प्रेम से भोजन करातें है। सिख न सिर्फ बहादुर होतें है बल्कि सेवा कर लिए हमेशा तत्पर भी। ये गुण सिखों के डीएनए में है(Terror Attack In Afghanistan)

लट्ठ पड़ने के बाद भी कर्फ्यू के दुश्मन आ गए धरना देने

लेकिन कुछ लोगों का डीएनए ऐसा होता है जहां बाप को मारकर तख्त पर कब्जा किया जाता है तो सरदारजी की वफ़ा की कौन फिक्र करेगा? खबर आ रही है अफगानिस्तान से जहां राजधानी काबुल में आतंकियों ने बुधवार को एक गुरुद्वारे को निशाना बनाया। ये फिदायीन हमला सुबह 7.30 बजे हुआ, तब यहां सिख समुदाय के सैकड़ों लोग प्रार्थना के लिए जुटे थे। धमाके में 27 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। बताया जा रहा है दुनिया को कोरोना के कहर(Corona Virus In India) से बचाने के लिए ही ये प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी(Cartoon On Kabul Terror Attack)

कोरोना से जंग में देश को कमजोर करते ये प्रदर्शनकारी

लेकिन इस वैश्विक संकट के दौर में भी कुछ कट्टरपंथियों का एक ही उद्देश्य है काफिरों को मारना। गैर-मुस्लिमो का खून बहाने वाली सोच वाले इस संकटकाल में भी अपने उद्देश्य से डिगे नही है। तालिबान ने इस हमले के पीछे हाथ होने से इनकार किया लेकिन इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की खुलकर जिम्मेदारी ली। लेकिन सिखों की जान गई है ये सच है। और अब इसकी जिम्मेदारी तालिबान(Taliban)  ले या फिर आइसिस(ISIS) इससे कुछ फर्क भी नही पड़ता।

फर्क सिर्फ ये है कि भारत मे जहां अल्पसंख्यकों को हर हक दिया जाता है वहीं दूसरे देशों में अल्पसंख्यक हिन्दू, सिख और क्रिश्चियन का खून बहाया जाता है। कल से देश मे लॉकडाउन(PAN India 21 Days Lockdown) लगा हुआ है। बहुसंख्यक वर्ग बहुल्य इलाको में जहां कर्फ्यू(Curfew) का पूर्णतः पालन किया जा रहा है वहीं अल्पसंख्यक मोहल्लों में लौग सुधरने को तैयार नही है। यहाँ के लौग सार्वजनिक रूप से मजहबी गतिविधियों को अंजाम दे रहे है और पुलिस भी इनके आगे लाचार ही नज़र आती है।

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बहुत पुराना एक दोहा है “चंदन विष व्यापे नही, लिपटे रहे भुजंग” मतलब चंदन के पेड़ पर जहरीले सांप लिपटे रहतें है तब भी चंदन में जहर नही आता। लेकिन इसका उल्टा भी सच है। सांपो को दूध पिलाने के बाद भी उनका जहर कम नही होता। ऐसा ही अभी दुनिया मे हो रहा है। एक मजहब अपनी कट्टरता की वजह से हर जगह निर्दोषों का खून बहा रहा है। जो सिख कौम सबको अपना मानकर उनकी सेवा में लगी रहती है उनका खून बहाकर आखिर ये आतंकी(Terror Attack In Afghanistan) क्या दिखाना चाहतें है? और एक वर्ग की इस घटना पर चुप्पी भी बहुत खतरनाक है।

सीएए के विरोध(CAA Protest India) में सड़क जाम करने वाले अब सिखों की मौत पर चुप है। इस हैवानियत को उन्होंने पूरी तरह नज़रंदाज़ कर दिया है। लेकिन इस घटना का पुरजोर विरोध भी होना चाहिए और इस मजहबी विचारधारा का पर्दाफाश भी होना चाहिए जो बेगुनाहों को मारने को ही जीवन का उद्देश्य बना बैठे है। कोरोना की वैश्विक महामारी(Corona Virus Pandemic) के बीच सिख भाइयों का खून बहने वाली इस जिहादी मानसिकता से भी दुनिया को कोरोना से कम खतरा नही है।

– Sachin Pauranik

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