नेताओं को गंभीरता बनाए रखना बहुत ज़रूरी

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जिन घरों में मछलीघर या फिर एक्वेरियम होता है, वे यह जानते हैं कि जैसे-जैसे मछलियों का आकार बढ़ता है, उनको ऑक्सीजन की मात्रा की ज्यादा ज़रूरत पड़ती है। मछलियों के प्राकृतिक आवासों जैसे तालाब, नदी और समुद्र में ऑक्सीजन की मात्रा बराबर बनी रहती है क्योंकि वहां के पानी में लगातार हलचल बनी रहती है। समुद्र में लहरों की वजह से, नदी में बहाव की वजह से और तालाबों में जलीय जंतुओं की लगातार उपस्थिति से पानी में हलचल होती रहती है, जिससे ऑक्सीजन का लेवल बना रहता है।

ठहरे हुए पानी जैसे झील, तालाब में जलीय जंतु और पंछियों का होना मछलियों के लिए बहुत ज़रूरी है नहीं तो पर्याप्त ऑक्सीजन की कमी से मछलियां मर सकती हैं। घरों में रखे एक्वेरियम में ऑक्सीजन की कमी ऑक्सीजन पंप और वाटर फिल्टर द्वारा पूरी की जाती है। ऑक्सीजन और फ़िल्टर द्वारा पानी में लगातार हलचल बनी रहती है, जिससे ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहती है। यदि ये ऑक्सीजन पम्प और फ़िल्टर ज्यादा समय के लिए बंद हो जाए तो मछलियां मर जाती हैं। मछलियों से इतर बात करते हैं।

मानव स्वभाव के बारे में अंग्रेज़ी में अक्सर कहा जाता है कि ‘फर्स्ट इम्प्रेशन इज़ लास्ट इम्प्रेशन’ मतलब किसी इंसान का एक बार जो प्रभाव बन जाता है, उससे छूटने में बहुत समय लगता है। मसलन, किसी इंसान की छवि आपकी नज़र में बेवकूफ की है तो यदि कभी वह समझदारी वाली बात भी कह देता है तो उसे भी बेवकूफी की बात ही समझा जाता है। इसके उलट यदि कोई समझदार छवि वाला शख्स कभी भूल से बेवकूफी भरी बात भी कह दे तो उसे भी समझदारीपूर्ण ही माना जाता है। ऐसे ही विप्लब देब जब से त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बने हैं, तब से उनके अजीबोगरीब बयान सुर्खियां बने हुए हैं। कभी वे कहते हैं कि महाभारत काल में इंटरनेट और सेटेलाइट थे तो कभी कहते हैं कि डायना हेडन भारतीय सुंदरता नहीं है। कभी बेरोजगारों को पान की दुकान खोलने को कहते हैं तो कभी महिलाओं को मैथी के पानी और मुल्तानी मिट्टी से बाल धोने की सलाह देते हैं।

विप्लब के ऐसे बयानों से परेशान होकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भी उन्हें दिल्ली बुलाकर अपनी वाणी पर काबू रखने की सलाह दी थी, तब जाकर उनके बयानों पर लगाम लग सकी, लेकिन विप्लब देव ने एक बार फिर एक बयान देकर सुर्खियां बटोरी कि वे गांववासियों को 50 हज़ार बतख वितरित करना चाहते हैं, जिससे पानी की ऑक्सीजन रिसायकल होती रहेगी और इन्हें देखना भी एक खूबसूरत नज़ारा होगा।

विप्लब देव के पुराने बयानों और उनकी जनता के बीच बन चुकी छवि के कारण इस बयान पर भी उन्हें सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया गया। हालांकि विप्लब का यह बयान संजीदा भी था और वैज्ञानिक तौर पर सच भी, लेकिन उनके पूर्व में दिए गए अनेक बेसिरपैर के बयानों की ही तरह इस बयान को भी लोगों ने हंसी-मजाक में ही उड़ा दिया। अब ये बातें सामने आ रही हैं कि विप्लब का यह बयान वैज्ञानिक दृष्टिकोण लिए हुए है और वैज्ञानिक भी यह मानते हैं कि बतखों के तैरने से पानी में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है।

इसके अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान और शिक्षा परिषद के वैज्ञानिक ने यह भी कहा है कि बतख और मछली साथ में पालने से दोनों को ही लाभ होता है। बतख और मछली का साथ रहना प्राकृतिक सहअस्तित्व का उदाहरण है, जिसे वैज्ञानिक भी प्रमाणित कर रहे हैं इसलिए अंग्रेज़ी की कहावत ‘फर्स्ट इम्प्रेशन इज़ लास्ट इम्प्रेशन’ एक बार फिर सच साबित हो गई क्योंकि यही बयान किसी और नेता ने दिया होता तो इस पर कोई बवाल नहीं मचता। विप्लब देव के बयानों ने उनकी संजीदगी पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

उनकी छवि ही ऐसी बन चुकी है कि यदि वे कोई तथ्यपरक बात भी कह दें तो उन्हें संदेह की नज़रों से देखा जाता है इसलिए राजनीति में नेताओं को अपनी गंभीरता बनाए रखना बहुत ज़रूरी है नहीं तो तथ्यात्मक बात पर भी जगहंसाई होने में देर नहीं लगती।

-सचिन पौराणिक

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