शिया पक्ष से सीख लेने की ज़रूरत

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भारत देश के लगभग 100 करोड़ और दुनियाभर में बसने वाले हिंदुओं की आस्था का केंद्र भगवान श्रीराम का एक भव्य और दिव्य मंदिर अयोध्या में बने ये इच्छा हर सच्चे भारतीय की है। राम का मंदिर अयोध्या में वहीं बने जहां रामलला विराजे है ये कार्य यथाशीघ्र निर्विघ्न संपन्न हो ये कामना भी सभी के अन्तर्मन में समाहित है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में आजकल सुनवाई चल रही है और वहीं मंदिर के पक्ष में कुछ ऐसी दलीलें सुनने में आयी है जिन्हें सुनकर किसी को भी भारत की बहुसांस्कृतिक विरासत पर फख्र महसूस हो सकता है।

गंगा-जमुनी संस्कृति क्या होती है और इसे कैसे निभाया जाता है ये बात शिया मुसलमानों ने एक बार फिर देश को दिखा दीया है। शिया मुस्लिम पक्ष का स्पष्ट मत है की मुसलमानों के हिस्से आयी एकतिहाई ज़मीन पर उनका हक है क्योंकि मीर बांकी शिया था। शिया समुदाय का निर्णय है की इस जमीन को वो राममंदिर निर्माण के लिये हिंदुओं को दान किया जाए। लेकिन सुन्नी पक्ष औऱ उनके वकील इस राय से बिल्कुल इत्तेफाक नही रखते। सुन्नी पक्ष राममंदिर की ज़मीन से अपना हक छोड़ने को बिल्कुल तैयार नही है।

सुन्नी पक्ष के वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने अपने पक्षकार के लिए पैरवी करते हुए मर्यादा की सारी हदें लांघते हुए कहा की बाबरी मस्जिद को हिन्दू तालिबान ने नष्ट किया। धवन जैसे वकील अपने पक्षकार की पैरवी करने में विराट और उदार सनातन धर्म पर छींटाकशी करने में भी बाज़ नही आते है। अपना केस मजबूत करने के लिए सनातन धर्म और आक्षेप करना किसी बीबी लिहाज़ से उचित नही ठहराया जा सकता। धवन जैसे लोगों को सोचना चाहिए अगर हिन्दू तालिबान सच मे होता तो राममंदिर का केस इस तरह कोर्ट में लंबित नही होता। हिन्दू सौ करोड़ होते हुए भी अपनी ही धरा पर अपने आराध्य का मंदिर बनवाने के किये कोर्ट की ओर तांक रहे है यही सबूत है की हिन्दू सदा ही उदारता और सहिष्णुता के पक्षधर है।

गौरतलब है कि शिया मुसलमान देशभक्त होने के साथ ही उदार विचारधारा के समझे जाते है। शिया मुस्लिम कभी कट्टर सोच नही रखतें है और आतंकवादी हरकतों में कभी लिप्त नही होते बल्कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों में शिया मुस्लिम हमेशा ही कट्टरपंथी और आतंकी हमलों के निशाने पर रहतें है। शियाओं की मस्जिदों पर अनेकों बार आतंकवादियों ने बम धमाकों से विस्फोट करके बेगुनाह शियाओं की जान ली है। इसलिए ये समुदाय आतंकी हमलों का दर्द अच्छे से समझता है।

जिस तरह शिया समुदाय ने अपनी ज़मीन राममंदिर निर्माण के लिए दान करने की बात कही है उससे अगर समस्त मुस्लिम समाज प्रेरणा ले तो भारत सच्चे अर्थों में धर्म-निरपेक्ष कहलायेगा। क्योंकि विचारणीय बात ये है की राममंदिर उस देश में जहां सौ करोड़ हिन्दू रहतें है वहां नही बनेगा तो फिर कहाँ बनेगा? मस्जिदें कहीं भी बनाई जा सकती है, नमाज़ कहीं भी अदा की जा सकती है लेकिन भगवान राम की जन्मभूमि सदा वहीं रहेगी। देश मे भाईचारा बढ़ाने के उद्देश्य के लिए शिया समुदाय द्वारा लिया गया ये फ़ैसला प्रशंसनीय है। शिया समुदाय ने अपने इस स्टैंड से देश के बहुसंख्यक समाज की जितनी सद्भावना अर्जित की है वो अतुलनीय है। सुन्नी पक्ष और उनके वकीलों को शिया पक्ष से सीख लेने की जरूरत है।

-सचिन पौराणिक

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