“घर में नहीं है दाने, अम्मा चली भुनाने”

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पाकिस्तान की सियासत के भी क्या कहने? कहने को लोकतंत्र है, लेकिन असली राज सेना करती है, आईएसआई करती है, आतंकवादी करते हैं। यदि कोई प्रधानमंत्री सेना की बात नहीं सुनता तो उसका तख्तापलट हो जाता है (जुल्फिकार अली भुट्टो), क़त्ल करवा दिया जाता है (बेनज़ीर भुट्टो), देश से भागने पर मजबूर कर दिया जाता है (परवेज़ मुशर्रफ) या फिर सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है (नवाज़ शरीफ़)। पाकिस्तान की सत्ता की सीधे चाबी तौर पर सेना की जेब मे रहती है इसलिए उनके प्रधानमंत्री भी सेना की जेब मे ही होते हैं।

पाकिस्तान की फौज की ताजा कठपुतली बने प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत को बातचीत का न्योता दिया। भारत ने भी पाक की नापाक हरकतों को जानते-बूझते अमरीका में विदेश मंत्री स्तर की बातचीत का न्योता स्वीकार कर लिया। इस बीच पाक ने आतंकी बुरहान वानी के समर्थन में डाक टिकट जारी कर दिए, भारत के जवान के साथ बर्बरता कर दी और राफेल विवाद में भी भारत के ख़िलाफ़ बयान दे दिए। इन वजहों से भारत ने पाकिस्तान के साथ प्रस्तावित बातचीत को रद्द कर दिया, लेकिन इससे पाक प्रधानमंत्री इमरान खान भड़क गए। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लेकर ट्वीट कर दिया,”मैं अपनी जिंदगी में अक्सर छोटे लोगों को बड़े पदों पर बैठे देखता आया हूं, जिनके पास बड़ी सोच नहीं है।” यह बोलते समय इमरान खान यह ज़रूर भूल गए कि यदि सेना का टेका उनकी कुर्सी के पीछे से हटा लिया जाए तो उनकी दुनिया में एक पूर्व क्रिकेटर से ज्यादा कोई औकात नहीं है।

सेना के कंधे पर चढ़कर सत्ता की कुर्सी पर चढ़ने वाले इमरान उस भारत से बदतमीज़ी कर रहे हैं, जिनसे वे आज तक कि तमाम जंग बेशर्मी से हारे हैं, जिनके सामने सीधे युद्ध होने की स्थिति में वे 12 घंटे भी नहीं टिक पाएंगे। विदेशी चंदे पर पल रहे भिखमंगे मुल्क के प्रधानमंत्री को ऐसी अहंकारी भाषा बिल्कुल शोभा नहीं देती। कहते हैं कि भिखारी यदि बदतमीज़ भी हो जाता है तो उसके भूखे मरने की नौबत आ जाती है। ऐसा ही हाल इमरान खान और पाकिस्तान का हो रहा है। अपने खाली खजाने को भरने के लिए भैंसों तक की नीलामी करने वाले मुल्क को ऐसी बदतमीज़ी से बातें करते देख गुस्सा कम हंसी ज्यादा आती है।

आखिर क्या वजह है कि इमरान खान ऐसी बेतुकी बातें कह रहे हैं? ये अपनी बेबसी पर है गुस्सा-खीज? क्या पाक सेना इन बयानों से खुश होगी? क्या दुनिया में पाकिस्तान की आतंकी मुल्क की छवि इससे बदलेगी या फिर अपनी बातचीत का दांव फेल होते देख इमरान बौखला गए हैं? सवाल भारत से भी है कि पाकिस्तान से बातचीत के न्योते को स्वीकारा ही क्यों था? पाक की नापाक फितरत कभी नहीं बदलेगी, यह बात हम कब समझेंगे?

खैर, मामला जो भी हो, लेकिन इमरान के बड़बोले बोल सुनकर हिंदुस्तान के साथ पाकिस्तान की जनता भी सोशल मीडिया पर उनका जमकर मज़ाक उड़ा रही है। वहां की जनता भी समझ रही है कि इमरान कठपुतली प्रधानमंत्री से ज्यादा कुछ नहीं है, लेकिन वे भी आखिर क्या करें? सब समझ रहे हैं कि इमरान अपने आप को कितना ही काबिल समझ ले, लेकिन पाकिस्तान के हालात संभालना उनके बस से बाहर है। उनसे तो खुद का भविष्य ही बच जाए, यह बड़ी बात होगी।

इमरान जब तक फौज़ के चहेते हैं, तब तक वे बेशक अपना बड़बोलापन जारी रख सकते हैं, लेकिन जिस दिन फौज़ ने उन पर नज़रें टेढ़ी की, उस दिन इमरान न घर के रहेंगे, न घाट के। उनका भी बाकी के प्रधानमंत्रियों की तरह ही हश्र होगा। वे जेल जाएंगे, विदेश भागेंगे या फिर मारे जाएंगे, यह वक्त ज़रूर बताएगा, लेकिन उन्हें भी इस बात का इल्म होना बहुत ज़रूरी है। इमरान खान एक पूर्व क्रिकेटर होने के नाते भी शायद भारत से क्रिकेट में मिल रही लगातार करारी शिकस्त पर दुखी हो रहे होंगे इसलिए हार के ग़म में कुछ ज्यादा ही उलजुलूल बोलने लगे हैं। इमरान की हालत देखते हुए यही याद आ रहा है कि- “घर में नहीं है दाने, अम्मा चली भुनाने”

-सचिन पौराणिक

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