आतंकवाद को हम कैसे करारा जवाब देंगे ?

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भारत-पाकिस्तान के बीच जब भी द्विपक्षीय वार्ता की कोई बात चलती है तो भारत सरकार का स्टैंड साफ होता है कि पहले आतंकवाद पर लगाम लगाओ, उसके बाद ही कोई बात होगी। आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। भारत का यह स्टैंड बीते कुछ सालों में बना हुआ है, लेकिन पाकिस्तान सरकार की अपनी मजबूरी है कि वह चाहकर भी आतंक को नहीं रोक सकती क्योंकि वहां की सत्ता की कमान परोक्ष तौर पर सेना और आतंकवादियों के हाथ में ही होती है। अपने आकाओं के खिलाफ कोई कैसे एक्शन ले सकता है? लेकिन यहां भारत सरकार का भी रवैया ऐसा है कि पाक के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए ज़रूर आतंकवाद पर लगाम लगाने की शर्त होती है, लेकिन बाकी मुद्दों पर परिस्थितियां बेहद धुंधली नज़र आती हैं।

पाकिस्तान के साथ व्यापार निर्बाध चल रहा है, कूटनीतिक रिश्ते भी चल रहे है, खेलकूद सब चल रहा है तो सवाल है कि सिर्फ बातचीत के लिये ऐसी शर्त क्यों? यह सवाल इसलिए पूछना पड़ रहा है क्योंकि आज शाम भारत-पाक के बीच एक बार फिर दुबई में क्रिकेट मैच खेला जाएगा। सीमा पर रोज़ की तरह भारत-पाक के सैनिकों में खूनी जंग जारी रहेगी और दुबई में दोनों देशों की क्रिकेट टीम मुकाबला करते नज़र आएगी। ऐसे में सवाल है कि क्यों न एक बार यह स्पष्ट कर दिया जाए कि आतंकवाद के साथ आखिर क्या चल सकता है और क्या नहीं? क्रिकेट चल सकता है, बाकी खेल सकते हैं, कूटनीतिक सम्बन्ध चल सकते हैं, सांस्कृतिक मेल-मिलाप चल सकता है तो आखिर बातचीत क्यों नहीं चल सकती? या फिर दूसरा पक्ष ये है कि यदि आतंकवाद के साथ बातचीत नहीं चल सकती तो खेल-कूद, सांस्कृतिक लेनदेन, व्यापार और क्रिकेट भी क्यों चल रहा है?

अमरीका जिस तरह ईरान को अलग-थलग कर रहा है, उसी प्रकार हम क्यों नहीं पाकिस्तान को विश्वमंच पर आतंकवादी मुल्क के नाम पर अछूत बना सकते? पूरी दुनिया जानती है कि आतंक का आका पाकिस्तान है, लेकिन उसके बाद भी पाकिस्तान को हम अलग-थलग क्यों नहीं कर पाए हैं? जवाब यही है कि हमने खुद अब तक पाकिस्तान से संबंध नहीं तोड़े हैं तो दुनिया से ऐसा करने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? अमरीका ने पहले खुद ईरान से अपने संबंध समाप्त किए, उसके बाद उस पर प्रतिबंध लगाए इसलिए दुनिया उन प्रतिबंधों को मान रही है, लेकिन हमने तो उल्टे पाकिस्तान को ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा दे रखा है।

सवाल है कि पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज़ नहीं आ रहा और लगातार वार कर रहा है तो हम क्यों सिर्फ एक सर्जिकल स्ट्राइक करके चुप बैठ गए हैं? पाक की हरकतें देखकर लगता है कि उसे हर हफ्ते दवाई की ज़रूरत है, लेकिन हम बस एक बार की वीरता दिखाकर ही खुश हो रहे हैं? अब वक्त आ गया है कि पाकिस्तान के साथ सारे रिश्ते भारत को तोड़ लेने चाहिए क्योंकि दोनों देशों के बीच इतने तनाव के बीच दोनों टीमों को साथ क्रिकेट खेलते देखना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता। भारत की सरकार की ढुलमुल नीतियों का ही यह परिणाम है कि हम आज तक इतनी छोटी चीज भी तय नहीं कर पा रहे कि साथ क्रिकेट खेलें या नहीं? तो फिर आतंकवाद को करारा जवाब हम कैसे और कब देंगे? आज शाम पूरा देश फिर भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच देखेगा और सीमा पर खड़ा देश का रक्षक सोचेगा कि साथ क्रिकेट ही खेलना है तो हमारा खून और जवानी यहां क्यों खराब की जा रही है?

-सचिन पौराणिक

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