बलात्कारियों के बहाने हिन्दुओं पर निशाना?

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कुछ लोग हैं देश में, जिनमें बुद्धिजीवी भी शामिल हैं| फिल्मकार भी, कलाकार भी, राजनेता भी और मीडिया का एक वर्ग भी, जो हमेशा से ही देश की बहुसंख्यक हिन्दू आबादी और उनकी आस्थाओं पर लगातार चोट करते रहते हैं। इस गैंग या गिरोह (क्योंकि ये गैंग की तरह ही साथ मिलकर काम करतें है) के लोगों को कश्मीरी पत्थरबाजों के मानवाधिकारों की चिंता सताती है तो कभी नक्सलियों के जीवन की कठिनाइयां याद आ जाती है। जेएनयू में “भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह” के नारे लगाने हो या फिर हिन्दू देवी-देवताओं पर भद्दे पोस्टर या कार्टून बनाने हो, इस गिरोह की ऐसे सभी मामलों में संलिप्तता पायी जाती है।

ये गिरोह बेहद शातिराना अंदाज़ में काम करता है। जो घटना इनके एजेंडे को सूट करती है उस पर ये पूरी शक्ति लगाकर तेज़ी से अपनी आवाज़ बुलंद करतें है जबकि बाकी घटनाओं पर ये ऐसे चुपचाप अपने बिल में घुस जातें है मानो कुछ हुआ ही ना हो। ताज़ा मामला जब ये गिरोह सक्रिय हुआ वो ‘आसिफा’ का है जिसमें इस गिरोह ने हिन्दू धर्मावलंबियों को बलात्कारी साबित करने की निर्लज्ज कोशिश की है। अपनी अय्याशी के सागर में गोते लगाती बॉलीवुड की अभिनेत्रियां जब अचानक हाथों में तख्ती लेकर तथाकथित “देवी स्थान” में हुए रेप के विरोध में हिन्दू धर्म पर आघात करने लगती है तब देश की जनता को ये समझ जाना चाहिए कि इस मुद्दे को लपकने के लिए ये ‘देश विरोधी गेंग’ सक्रिय हो चुकी हैं।

कल दिल्ली के गाजीपुर में एक नाबालिग बच्ची के बलात्कार का आरोप मस्जिद के एक मौलवी पर लगा लेकिन इस गिरोह ने इस मुद्दे पर अपने मुह पर ताले लगा दिए है। अब कोई फ़िल्म इंडस्ट्री वाला इस बच्ची के समर्थन में उस मौलवी के खिलाफ तख्ती लेकर फोटो खिंचवाने नही आएगा क्योंकि ये मुद्दा उनके “हिन्दू विरोधी एजेंडे” को सूट नही करता। हमारा ये स्पष्ट और जगजाहिर मत है की किसी भी अपराध और अपराधी को धर्म/मजहब से जोड़ना उचित नही है। लेकिन ये सवाल उठाना आवश्यक है की आसिफा के बलात्कारियों पर तुरन्त ‘हिन्दू धर्म’ का टैग लगाने वाले अब एक मस्जिद के मौलवी द्वारा मदरसे में किये दुष्कर्म पर चुप क्यों बैठे है? बताइये अब देश को की मदरसा किस मजहब का होता है? मौलवी किस मजहब में होते है? अगर आप ये नही कर सकते तो आसिफा के रेप में “देवीस्थान” जैसी पवित्र जगह को बदनाम करने का हक आपको किसने दिया?

सवाल वाजिब है कि आखिर क्यों एक बलात्कार की घटना को दुनियाभर में प्रचारित करके देश का मान गिराया जा रहा है? ये षड्यंत्र नही है तो फिर कैसे ये आसिफा का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र तक गूंज उठा? कैसे अचानक भारत के महिला विरोधी होने के टीशर्ट छप गए और दुनियाभर के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डो पर ये टीशर्ट पहने लौग घूमने लगें? सवाल है कि क्या आसिफा के पहले किसी केस का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचो तक पहुंचा था? क्या इससे पहले किसी केस में पीड़िता का नाम उजागर किया गया था? इन सारी बातों को गौर से देखा, समझा जाये तो सब करतुत इसी गेंग की ही नजर आती है। साम्प्रदायिकता अपने आप में एक अपराध की तरह है लेकिन अगर अपराधों में भी साम्प्रदायिकता ढूंढी जाएगी तब क्या होगा? देश धर्म निरपेक्ष है तो अपराधियों का धर्म/मजहब क्यों खंगाला जा रहा है?

एक बार फिर ये स्पष्ट करना चाहता हूं कि देश मे महिलाओं/बच्चियों की सुरक्षा को प्राथमिकता मिलना चाहिए और धर्म/मजहब को बीच मे नही घुसाना चाहिए। अपराधी कोई मौलवी हो पादरी हो चाहे पंडित हो, कानून अपना काम करे और सभी को सख्त सजा मिले इस बात की वकालत हम हमेशा से करतें आये है। लेकिन अपराधियों को भी अगर हम मजहबी चश्मे से देखना शुरू कर देंगे तो इससे देश के हालात खराब होंगे इसमें दो मत नही है। हिन्दू विरोधी इस गेंग को भी ये समझ लेना चाहिए कि आपकी कलई अब खुलती जा रही है और देश की जनता आपके दोहरे चरित्र को अच्छे से समझने लगी है। बेहतर होगा देशहित में ये गंदी चालें खेलना बंद करें और अपराधियों से मजहबी दीवारों से ऊपर एक अपराधी की तरह ही सलूक किया जाए, उन्हें कड़ी सजा दिलायी जाए। बेटियों को बचाने के किये इस प्रयास में सभी धर्मों की भागीदारी जरूरी है।

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