हिन्दू-सिख एकता सुरक्षित रहना पंजाब के लिए ज़रूरी

0

अभी के ज्यादातर युवा नहीं जानते कि पंजाब ने 80 के दशक में आतंकवाद के दंश को बहुत बेरहमी से झेला है। पंजाब में उस समय आतंकवाद अपने चरम पर था। इसी दौर में ऑपरेशन ‘ब्लू स्टार’ हुआ, जिसने एक नई हिंसा को देश में जन्म दिया। भिंडरावाले ने स्वर्णमंदिर में जो रक्त की नदियां बहाई और युवाओं को अपने साथ जोड़ा, उसकी ही कीमत इंदिरा गांधी की हत्या के रूप में देश ने चुकाई। आज भी पंजाब में कई युवा भिंडरावाले की तस्वीरें लगाते हैं और उसे अपना आदर्श मानते है। भिंडरावाला आज हमारे बीच नहीं, लेकिन उसकी विचारधारा को मानने वालों की संख्या आज भी अच्छी-खासी है।

पंजाब के अमृतसर में निरंकारी भवन में रविवार को हुए एक ग्रेनेड हमले में 3 लोगों की मौत हो गई। निरंकारी सम्प्रदाय वाले भी सिख ही होते हैं, लेकिन ये सिखों की मुख्य धारा में शामिल नहीं माने जाते हैं। निरंकारी दरअसल जीवित गुरुओं पर ज्यादा भरोसा करते हैं। गुरु ग्रंथ साहिब के स्थान पर यह समुदाय अपने जिंदा गुरुओं को ज्यादा सम्मान देता है इसलिए ये कट्टरपंथियों के निशाने पर रहते हैं। बाबा हरदेवसिंग इस समुदाय का नेतृत्व करते आ रहे थे, लेकिन 2016  में उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी अब मुखिया है। इसी साल उनकी बेटी को इस समुदाय का आध्यात्मिक मुखिया चुना गया है।

निरंकारी भवन पर हुए हमले के बाद कई बुद्धिजीवियों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई है क्योंकि यह हिंसा के एक नए अध्याय की शुरुआत भी हो सकती है। जिस जगह यह हमला हुआ, वह अमृतसर से 7 किलोमीटर जबकि पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से मात्र 20 किलोमीटर दूर है। पाकिस्तान पोषित आतंकवादियों का नाम भी इस हमले में लिया जा रहा है। अमरीका, कनाडा और इंग्लैंड में बैठे खालिस्तान समर्थक भी पंजाब में खालिस्तान आंदोलन एक बार फिर खड़ा करने की जुगत में है।

पंजाब में सक्रिय आम आदमी पार्टी की भूमिका भी इस मामले में संदेह के दायरे में है। ‘आप’ पर खालिस्तानी ताकतों से फंड लेने के आरोप भी पहले सामने आ चुके हैं, लेकिन अब जिस तरह से उनके एक नेता ने इस हमले में भारतीय सेना का हाथ होने की बात कही है, उससे ये आरोप और प्रबल हो जाते हैं। पंजाब के आप नेता एचएस फुल्का ने कहा है कि किसे पता यह हमला किसने किया है? हो सकता है कि यह हमला आर्मी ने या सरकार ने ही करवाया हो। फुल्का के ऐसे बयान की जितनी निंदा हो कम है क्योंकि ऐसे बयानों से देशविरोधी ताकतों को हवा मिलती है।

खालिस्तान के नाम पर पंजाब को जिस आग में झोंकने की कोशिशें की जा रही है, उस साजिश को नाकाम किए जाने की ज़रूरत है। पंजाब को एक बार 80 के दशक जैसी हिंसा में घसीटने की इस साजिश में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी शामिल है। आम आदमी पार्टी को फुल्का के बयान पर देश से माफी मांगनी चाहिए और अपना स्टैंड साफ करना चाहिए कि खालिस्तान पर उनका रुख क्या है? पंजाब की शांति देश-विरोधी ताकतों को रास नहीं आ रही है इसलिए साजिशों का दौर शुरू हो चुका है।

पंजाब की जनता को अब बहुत सम्हलकर रहना होगा क्योंकि उन्हें आपस में लड़ाने की पूरी तैयारी हो गई है। हिन्दू-सिख एकता सुरक्षित रहना पंजाब और देश के लिए बहुत ज़रूरी है।

-सचिन पौराणिक

Share.