गुलाम हुए “आजाद”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिमाग पढ़ने का दावा समय समय पर अनेक व्यक्तियों ने किया। कई बार तीर में तुक्के लगे भी सही। लेकिन दूरगामी नजरिए और व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इसमें प्रायः असफलता ही हाथ लगी है। प्रधानमंत्री को समझने में उनके विरोधी तो गच्चा खाते ही है भक्त मंडली तो सपने में भी उनके दिमाग के आसपास नही पहुंच पाती।

ताज़ा वाक्या आज का ही है जब कांग्रेस के कद्दावर नेता गुलाम नबी आजाद अपनी पार्टी से इस्तीफा लिख चुके है। और सिर्फ लिख ही नही चुके बल्कि कहना चाहिए की उन्होंने पार्टी की पोल पट्टी भी खोलकर रख दी है। राहुल गांधी समेत अपनी पार्टी पर हुए इस करारे हमले से कांग्रेस पार्टी बुरी तरह सहम गई है। उन्हे समझ नही आ रहा है की इस परिस्थिति में आखिर किया क्या जाए? वे न तो अपने आलाकमान पर उंगली उठाने की हिम्मत कर पा रहे और न ही गुलाम नबी के उठाए प्रश्नों का उत्तर दे पा रहे है।

कांग्रेस की ताज़ा हालत बेहद शर्मनाक हो चली है। वैसे तो कांग्रेस पार्टी बहुत मोटी चमड़ी वाली पार्टी है लेकिन भीतर से दिए जा रहे घाव इस मोटी चमड़ी को भी उधेड़ दे रहे है। कांग्रेस की फजीहत और भाजपा की मुस्कुराहट के बीच एक अलग नजरिए से इस घटना को देखे तो कुछ चौंकाने वाली बात सामने आ सकती है। आपको याद ही होगा कैसे कुछ समय पहले गुलाम नबी का सदन में कार्यकाल समाप्त हुआ था। उस समय उनके विदाई भाषण में प्रधानमंत्री मोदी भावुक हो गए थे। उनकी आंखों में आसूं आ गए थे और गला रूंध गया था।

भक्तमंडली इस घटना पर हैरान परेशान हो गई थी। विपक्ष के नेता के लिए प्रधानमंत्री के आंसू और वो भी जिसका नाम गुलाम नबी आजाद हो, ये प्रधानमंत्री की छवि को कहीं से भी उपर्युक्त नही लग रहा था। भक्तगण इस मामले पर भीतर ही भीतर कुड़ रहे थे। मोदीजी के दिमाग को पढ़ने का दावा करने वाले इस समय कहीं बिल में छुपकर बैठ गए थे। लेकिन आज जब गुलाम नबी के त्यागपत्र की खबर आई तो कड़ियों को जोड़ने में मुझे कोई समस्या नही आई।

ये समझना कोई रॉकेट साइंस नही था की प्रधानमंत्री को गुलाम नबी के मन में चल रही हलचल की झड़ी लग चुकी थी। और उनके आंसू भी अनायास या अनपेक्षित नही थे। आज गुलाम नबी आजाद की कांग्रेस से विदाई ने प्रधानमंत्री की दूरगामी सोच और व्यापक दृष्टि को पुनः साबित किया है। बहरहाल, कांग्रेस के लिए ये समय आत्ममंथन का है और मोदीजी के दिमाग को पढ़ने वालों के लिऐ मुंह छुपाने का है।

सचिन पौराणिक

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