जामिया, जेएनयू, एएमयू.. सबका बदला लेगा तेरा गोपाल..

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दिल्ली के जामिया (Jamia) से कल चौंकाने वाली तस्वीर सामने आयी। एक लड़का हाथ मे पिस्तौल लहराकर जामिया के छात्रों के सामने खड़ा हो गया। (Cartoon on Hindu Vs Muslim) उसने कुछ नारे लगाए और फिर एक फायर कर दिया। गोली लगने से एक शख्स घायल हो गया। लेकिन हैरानी इस पर जताई जा रही है कि जो लड़का पिस्तौल लहरा रहा था उसके पीछे पुलिसवाले आराम से खड़े थे और उन्हें सूझ नही रहा था कि क्या किया जाए?यही वाक्या अगर अमेरिका में हुआ होता तो पुलिस 1 मिनट में उसे गोली मार देती। लेकिन चूंकि भारत की पुलिस को ऐसी ट्रेनिंग दी ही नही जाती इसलिए वो हाथ बांधे खड़े थे। इस मामले में पुलिस से ज्यादा दोषी हमारा सिस्टम है। क्योंकि अगर कल पुलिस उस शख्स को गोली मार देती तो भी इतना ही हंगामा होता। पुलिस बेचारी गोली मारे तो भी गालियां खाये और न मारे तो भी, ये सही नही है।कल की घटना को डिकोड करने की जरूरत है। पहली बात तो ये की ये तमाशा ‘स्क्रिप्टेड’ था। (Cartoon on Hindu Vs Muslim) मतलब इसकी पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी। जामिया के सामने इतनी भीड़ में नारे लगाना और गोली चलाना स्क्रिप्ट का हिस्सा थी। इस नाटक के लिए नाबालिग लड़के को भी इसीलिए चुना गया क्योंकि हमारा कानून नाबालिगों का कुछ नही कर सकता। बहुचर्चित निर्भया मामले में भी सबसे कुख्यात अपराधी इसीलिए बच निकला क्योंकि वो नाबालिग था।पुलिस की मौजूदगी में उसने गोली चलाई क्योंकि उसे पता था कि अगर वो भीड़ के हत्थे चढ़ गया तो जान भी जा सकती थी। बहुत सोच समझकर इसीलिये उसने पुलिस और भीड़ से इतनी दुरी बनाकर रखी कि उसे पुलिस तो पकड़ ले लेकिन वो भीड़ से बच जाए। सुनने में आ रहा है कि वो लड़का थोड़ा विक्षिप्त है और उसका मेडिकल सर्टिफिकेट भी उस वक्त उसकी जेब मे था। अगर ये बातें सच है तो इस मुद्दे को तूल देना बंद हो जाना चाहिए क्योंकि ये साफ नजर आ रहा है कि चर्चा में बने रहने और मुद्दों को भटकाने के लिए ही ये नौटंकी रची गयी है।अगर ये सच मे ही कोई शातिर अपराधी या आतंकी होता तो यूँ सरेआम ड्रामा नही करता। और जिस शख्स को गोली लगी है वो भी मामूली घायल हुआ है और खतरे से बाहर है। ये तथ्य इशारा दे रहे है कि इस पटकथा में वो लड़का सिर्फ एक किरदार भर है। इस कहानी के निर्माता, निर्देशक और पैसे लगाने वाले कोई और ही है। बाकी रही बात जय श्री राम का नारा लगाने की तो भगवान राम का नाम इतना पवित्र है कि कोई लफंगा इतनी आसानी से इसे बदनाम नही कर सकता। (Cartoon on Hindu Vs Muslim) एक सिरफिरे के जय श्री राम का नारा लगाने से किसी को हिंदुत्व पर उंगली उठाने का लाइसेंस नही मिल जाता। और जय श्री राम का नारा लगाने वाला जरूरी नही की ‘गोपाल’ ही हो वो कोई ‘जावेद’ या ‘जमाल’ भी निकल सकता है। ताज़ हमले में आतंकवादियों को हाथों में कलावा बांधे देश देख ही चुका है। इसलिये जब तक मामले की जांच न हो जाये, सारी बातें सामने न आ जाएं तब तक भाषा पर संयम हर वर्ग के लोगों को रखना चाहिए। साथ ही ये घटना निंदनीय है, चाहे इसे किसी ने भी अंजाम दिया हो।

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Sachin pauranik

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