एग्जिट पोल के बहाने सरकार बनाने का सपना

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एक कहानी सुनी थी मैंने की एक आदमी दुनिया का इतिहास लिख रहा था। काफी सालों से श्रम करके वो दुनिया मे घटी घटनाओं को संकलित करने में लगा हुआ था। बहुत कुछ उसने अपनी किताब में दर्ज कर लिया था। फिर एक दिन जहां वो रहता था वहाँ एक वाहन दुर्घटना हो गयी। बहुत शोरगुल होने पर वो बाहर पहुंचा और लोगों से जानना चाहा कि आखिर हुआ क्या है? तब वो ये जानकर हैरान हुआ जब वहां मौजूद हर शख्स ने अलग बात बताई। किसी ने कहा दुर्घटना ड्राइवर के नशे में होने से हुई तो किसी ने गाड़ी की रफ्तार ज्यादा बताई। किसी ने ड्राइवर को बहुत समझदार बताते हुए गाड़ी में ही गलती बताई तो किसी ने खराब सड़क को दोष दिया। सब जवाब सुनकर वो घर के भीतर गया और बहुत सोच-विचारकर उसने अब तक लिखी अपनी पुस्तक को आग लगा दी। उसे ये अहसास हो गया था की जब कुछ मिनिट पहले घटित घटना को भी ठीक वैसा दर्ज नही किया जा सकता जैसी वो हुई थी तो इतिहास की प्राचीन घटनाओं को सही परिप्रेक्ष्य में रखना असम्भव बात है।

कल शाम राजस्थान में मतदान थमते ही टीवी चैनलों पर एक्सिट पोल आने शुरू हो गए। कोई चेनल कहीं भाजपा कहीं कांग्रेस की जीत बता रहा है तो कोई चेनल भाजपा का सूपड़ा साफ बता रहा है। आम धारणा एग्जिट पोल की ये बनती आ रही है की छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में कांटे की टक्कर है जबकि राजस्थान भाजपा के हाथ से फिसलता नज़र आ रहा है। इन एग्जिट पोल से कांग्रेस के नेता लंबे समय बाद टीवी स्क्रीन पर मुस्कुराते नज़र आ रहे है तो भाजपा वाले इनकी विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर रहे है। पूर्व में हुए एग्जिट पोल पर चिंतन करें तो ऐसी कोई ग्यारंटी नही है की ये पोल सही ही होंगे। कई बार इन पोल ने जो बताया उसका ठीक उल्टा हुआ है। लेकिन ऐसी कोई घटना मुझे याद नही आ रही जब किसी चेनल ने अपने पोल गलत साबित होने पर क्षमा मांगी हो। कल के पोल पर भी गौर करें तो कुछ चेनल मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बना रहे है तो कुछ कांग्रेस की। सीटों के आंकड़े भी चेनल बदलते ही, बदल जा रहे है।

सभी एग्जिट पोल में इतना विरोधाभास है जिससे लगता है की जनता के मूड को कोई भी नही भांप सका है। करोडों जनता जहाँ अपने मताधिकार का प्रयोग कर रही है वहां कुछ लोगों से बात करके किसी निष्कर्ष पर पहुंचना नादानी ही कहा जायेगा। मुट्ठीभर लोगों की राय लेकर उसे जनमत समझना एक बड़ी भूल है। एक ही चुनाव में एग्जिट पोल के बदले हुए आंकड़ो को देखकर यही लगता है की इन पर भरोसा बिल्कुल नही करना चाहिए। समझदार इंसान को इन विरोधाभासी एग्जिट पोल को आग के हवाले कर देना चाहिए क्योंकि ये जनता का समय नष्ट करने के अलावा कुछ नही कर रहें है। एक दुर्घटना भी जब अनेक परिप्रेक्ष्य में देखी जा सकती है तो करोडों जनता का मिजाज क्या कुछ हजार लोगों की राय जानकर लगाया जा सकता है ? इन एग्जिट पोल पर चर्चा करना भी समय की बर्बादी के अलावा कुछ नही है।

– सचिन पौराणिक

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