दिल्ली हिंसा कोई फसाद नही बल्कि सोची-समझी रणनीति!

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दिल्ली दंगे (Delhi Riots 2020) की चिंगारियां अब बुझने लगी है और हालात तेज़ी (Delhi Violence Is A Planned Strategy) से सामान्य होते जा रहे है। दिल्ली देश की राजधानी है और यहां की कानून व्यवस्था सीधे-सीधे गृह मंत्रालय के अधीन होती है इसलिए इस हिंसा की जिम्मेदारी से गृह मंत्रालय बच नही सकता। दिल्ली की तंग गलियों से आ रहे वीडियो ये चीख-चीखकर बतला रहे हैं कि ये दंगा अचानक उभरा फसाद नही बल्कि सोची-समझी रणनीति के तहत की गई हिंसा है।

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दिल्ली में ही देश की सभी जासूसी (Delhi Violence Is A Planned Strategy) एजेंसियों के मुख्यालय भी है। शाहीन बाग़ जैसा दिशाहीन आंदोलन भी वहीं चल रहा था। आंदोलनकारियों (Delhi Protest) के मंसूबे भी किसी से छुपे नही थे। लेकिन उसके बाद भी दिल्ली जलती है, दंगे भड़कते है और 40 कि जान चली जाती है तो इसकी जिम्मेदारी किसी को तो लेना ही चाहिए। दिल्ली के रहवासियों और दंगा पीड़ितों का इस हिंसा का सीधा आरोप आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन (AAP Tahir Hussain) पर है।

ताहिर के मकान का इस्तेमाल दंगे भड़काने में किया गया ये तमाम वीडियो में पुष्टि हो चुकी है।(Delhi Violence Is A Planned Strategy)  लेकिन आश्चर्य इस बात पर की ताहिर हुसैन (Tahir Hussain) खुलकर हर चेनल पर अपना बचाव करता रहा लेकिन पुलिस उसे नही पकड़ पायी। जब तक पुलिस उसे पकड़ने पहुंचती ताहिर फरार हो चुका था। दंगे न रोक पाने के बाद दिल्ली पुलिस की दूसरी सबसे बड़ी नाकामी है की उसकी आंख के सामने से एक आरोपी गायब हो गया और वो देखते रह गए।

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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal)  की यहां तारीफ करना होगी कि अपने पार्षद को बचाने के लिए उन्होंने कोई ‘कुतर्क’ न देते हुए साफ कहा कि जो भी आरोपी है उसे गिरफ्तार किया जाए। इसके साथ ही जांच होने तक ताहिर (Delhi Violence Is A Planned Strategy) को पार्टी से भी निलंबित कर दिया गया। केजरीवाल (AAP Chief Arvind Kejriwal) का ये बयान उनके राजनीति में परिपक्व होने को दर्शाता है। हर पार्टी को केजरीवाल से ये सीखना चाहिए। आंदोलन से राजनीति में आये केजरीवाल इतनी जल्दी स्वास्थ्य राजनीति की बारीकियां सीख चुके है लेकिन अरसे से राजनीति कर रही पार्टियां इन मामलों में बेशर्मी की सारी हदें पार कर बैठी है।

दंगे (Delhi Burns) किसी ने भी भड़काए हो लेकिन उन पर कार्यवाही तो पुलिस और दूसरी एजेंसियों को ही करना है। और सरकार को ऐसा करने या सख्ती करने से किसी ने नही रोका है। (Delhi Violence Is A Planned Strategy) लेकिन उसके बाद भी दोषारोपण दुसरो पर किया जाए ये सही नही है। दंगाइयों की पहचान करके उत्तर प्रदेश की तर्ज़ पर उनकी संपत्ति जब्त करके दंगो से हुए नुकसान की भरपाई करने से सरकार को किसने रोका है? लेकिन सरकार का रवैया ऐसा दिखाई देता है मानो वो दिल्ली की जनता को ये अहसास कराना चाहतें है कि केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को जिताकर उन्होंने बड़ी गलती कर दी है।

इस तरह का रवैया सही नही कहा जा सकता। क्योंकि जनता की सुरक्षा सरकारों का कर्तव्य है। इसमें राजनीति (Delhi Violence Is A Planned Strategy) की कोई गुंजाइश नही होना चाहिये। बहरहाल, दिल्ली की गलियों में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का यूं घूमना ये संकेत देता है कि दिल्ली हिंसा के पीछे कोई गहरी साजिश छुपी है। इस साजिश का जल्दी ही खुलासा होना चाहिये और सरकार को इतना तो सुनिश्चित करना ही चाहिए कि जनता को सुरक्षित महसूस कराया जा सके। साथ ही मामले को राजनीति से दूर रखकर निष्पक्ष कार्यवाही की जानी चाहिये। दिल्ली के दंगे (Delhi Is Burning) देश की इज़्ज़त पर एक बदनुमा दाग है जिसे जल्दी ही साफ करने की जरूरत है।

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Sachin Pauranik

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