संविधान बचाना बहाना है, असली मकसद देश जलाना है

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कई दिनों से लगातार जल रही देश की राजधानी से अब खबरें आ रही है कि (Delhi Violence Increased) माहौल सुधरने लगा है। ट्रम्प के जाने के बाद दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश से हालात कुछ बेहतर बने है। लेकिन अब तक करीब 18 लौग मारे जा चुके और सेकड़ो की तादाद में अस्पताल में भर्ती है। घायलों में शामिल पुलिसकर्मियों की बड़ी संख्या देखकर अंदाज़ लगाया जा सकता है कि हिंसा कितनी भीषण (Delhi Riots) और खौफनाक थी।खबर आ रही है कि पुलिस ने सड़कें भी खाली करवा दी है और उम्मीद की जा सकती है कि इतनी जाने लीलकर अब कम से कम नागरिकता कानून के खिलाफ चल रहे आंदोलन (CAA Protest) थमने चाहिये। लेकिन देश के मेहमानों के सामने देश के हालात बिगाड़ने की साजिश रचने वाले कामयाब कैसे हो पाए इसकी विवेचना जरूर की जानी चाहिये। गलतीं पुलिस की थी, प्रशासन की थी या आंदोलनकारियों की ये स्पष्ट जरूर होना चाहिये।

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दिल्ली हिंसा (Delhi Burns)  के लिए सबसे पहले माननीय सुप्रीम कोर्ट (Delhi Riots 2020) की गलतीं है क्योंकि इनका रवैया प्रदर्शन को सख्ती से रोकने के पक्ष में कभी था ही नही। (Delhi Violence Increased) कोई सड़क रोककर बैठ गया है और नही मान रहा है तो क्या उसे 2 महीने तक बर्दाश्त किया जाना चाहिए? प्रदर्शनकारियों को सख्ती से हटाने की बजाय कोर्ट ने हमेशा यही कहा कि बातचीत के जरिये मुद्दा सुलझाया जाए। लाखों लौग आंदोलन की वजह से रोज़ परेशान हुए लेकिन कोर्ट को उनके संवैधानिक हक की कोई परवाह नही थी।सड़क रोककर बैठे लोगों को हटाने की बजाय उनसे मान-मनोव्वल की जाए, उनसे समझाने के लिए वार्ताकार भेजें जाएं तो उनके हौसले बढ़ने ही थे। दुसरी गलतीं इस मामले में दिल्ली सरकार (Delhi Government) की थी। माना पुलिस उनके हाथ मे नही है लेकिन राज्य की जनता तो उनकी है, सार्वजनिक संपत्ति तो उनकी है और जनता की जान बचाने की जिम्मेदारी तो उनकी है। मुख्यमंत्री (CM Arvind Kejriwal) द्वारा एक बार भी प्रदर्शनकारियों से रास्ता खोलने की अपील न करना और खुद को मामले से अलग कर लेना दिल्ली को भारी पड़ा।

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तीसरी गलतीं ग्रह (Delhi Violence Increased)  मंत्रालय की है क्योंकि अगर सख्ती के साथ समय रहते इस आंदोलन को कुचल दिया जाता तो दिल्ली जलाने की हिम्मत किसी मे नही होती। दिल्ली का हाल देखकर समझ आता है कि उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने जो सख्ती की वो कितनी जरूरी थी। अगर योगी थोड़े नरम पड़ जाते तो दिल्ली के साथ यूपी जलना भी तय था। योगी आदित्यनाथ ने अपने कुशल राजनीतिक नेतृत्व से दंगाइयों को संदेश दे दिया था कि दंगा करना उन्हें बहुत भारी पड़ सकता है।सबसे आखिर लेकिन सबसे बड़ी गलती प्रदर्शनकारियों की है क्योंकि आप महिलाएं हो या बच्चे, विरोध के नाम पर सड़क जाम करने का हक आपको किसी ने नही दिया है। देश की संसद का अपमान करके संविधान बचाने का इनका ढोंग देश अच्छे से समझ चुका है। संविधान बचाना बहाना है, असली मकसद देश जलाना है। अब सरकार से यही उम्मीद है कि हिंसा में शामिल एक-एक दंगाई का इस प्रकार का इलाज़ किया जाए जिससे कोई भी भविष्य में कभी दुबारा दंगा करने की हिम्मत न जुटा सके। दिल्ली में शांति बहाल हो इसके लिए आप भी अफवाहों पर ध्यान न दें और पुलिस का सहयोग करें।

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Sachin Pauranik

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