“दंगाइयों के ऊपर कोर्ट का हाथ”

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मानवाधिकारों (Cartoon On Court Supporting Riots) के बारे में आप जानतें ही है। आतंकवादियों, बलात्कारियों (Nirbhaya case) और देशद्रोहियों के प्रति संवेदनाएं और सहायता का भाव लिए एक गेंग हमेशा मानवाधिकारों के नाम पर इन गुनहगारों को बचाने का काम करती आई है। इस गैंग की सच्चाई धीरे-धीरे जनता के सामने आने भी लगी है। इसलिये आजकल ये गेंग नये नाम से अपने पुराने काम को अंजाम देने में लगी हुई है। कुछ अति बुद्धिजीवी लौग जानबूझकर या नासमझी में इस गैंग का साथ देतें है, इनकी (Delhi Violence) मदद करतें है।इस गैंग की पहुंच कितने ऊपर तक है इसका अंदाज़ कुछ दिन पहले देश को तब लगा जब उत्तरप्रदेश में दंगाइयों के पोस्टर लगाने पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर सरकार से जवाबतलब (Delhi Violence Court) कर लिया। गौरतलब है कि यूपी सरकार दंगाइयों से सख्ती से निपट रही है। इसी कड़ी में आगजनी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए पुलिस ने कुछ दंगाइयों (Delhi Is Burning)  को चिन्हित किया था और उनके पोस्टर सार्वजनिक किए थे।

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लेकिन कोर्ट (Cartoon On Court Supporting Riots) के मन में दंगाइयों (Delhi Riots 2020) के प्रति अचानक से हमदर्दी जागी और इस मामले पर स्वतः संज्ञान ले लिया गया।कोर्ट ने यूपी सरकार से ये पोस्टर हटाने को कहा क्योंकि उनके अनुसार ये दंगाइयों की निजता का उललंघन है। लेकिन यूपी सरकार भी कम नही है। उन्होंने आदेश के बावजूद पोस्टर नही हटाये और सुप्रीम कोर्ट में मामला लेकर गए। आज सम्भवतः सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कुछ निर्णय सुनाएगा।लेकिन सोचने लायक बात यहाँ ये है कि दंगाइयों की निजता (Delhi Burns) की कोर्ट को कितनी फिक्र है? निर्भया के बलात्कारियों को आज तक फांसी नही हुई है, आधी रात को आतंकवादी के लिए कोर्ट खुल रही है, शाहीन बाग़ पर कोर्ट को निर्णय सुनाने में डर लगता है लेकिन दंगाइयों (Delhi Protest) की निजता की बात आते ही कोर्ट ने स्वतः संज्ञान ले लिया। वाह मीलोर्ड। आपसे यही उम्मीद थी। अब से हो सकता है कोर्ट कल को कहे कि अपराधियों के नाम सार्वजनिक न किये जायें, पेशी पर भी उन्हें छुपाकर लाया जाए और कोई अखबार उनका नाम न छापने पाये। क्योंकि दंगाइयो, अपराधियों की निजता बनाये रखना कोर्ट के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है।

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दिल्ली-नोएडा  (Delhi Noida) की सड़क खुले चाहे न खुले, बस्तियां जल जाए, लौग मर जाएं चाहे शहर में आग लग जाये, बलात्कार (Delhi Rape cases) हो जाये, जंगल राज कायम हो जाये वो सब मंजूर है। लेकिन खबरदार, जो किसी ने दंगाइयों की निजता का उल्लंघन किया! दंगाइयों के पोस्टर चौराहों पर थोड़ी लगाने चाहिए इनका बाकायदा चेहरा ढककर, शाल-श्रीफल के साथ सम्मान किया जाना चाहिए। (Cartoon On Court Supporting Riots) इन्होंने बड़ा अच्छा काम किया है गाड़ियां फूंकी है, बसों के शीशे फोड़े है इसलिए इनकी निजता हर हाल में बरकरार रहना चाहिये।मानवाधिकार का झुनझुना पुराना हो गया है इसलिए अब निजता की बात की जाएगी। मीलोर्ड का कहना है भविष्य में बेटा हमारा ऊंचा नाम करेगा इसलिए इनकी निजता का सम्मान किया जाये। आज ये गाड़ी जला रहा है कल को शहर फूंक सकता है, जो आज बसों पर पत्थरों फेंक रहा है वो कल को सेना पर भी तो पत्थर फेंक सकता है। सुनहरा भविष्य उसके सामने है और योगी सरकार इनका भविष्य बर्बाद करने पर तुली है। ऐसा हम कैसे होने दे सकतें है? खूब दंगा करो बेटा, खूब पत्थर चलाओ, खूब बसें जलाओ, पापा है ना सब देख लेंगे..!!

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Sachin pauranik

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