कोरोना को लेकर नेता कर रहे राजनीति

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ऐसा माना जाता है कि नेताओं (Coronavirus) को जनता के बीच जाना पड़ता है (Wearing Mask In Lok Sabha) , उनके दुख-दर्द बांटने पड़ते है इसलिए वो ज़मीन से जुड़े होतें है। कम से कम जनता द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधियों से तो ये उम्मीद होती है कि वो ज़मीन से जुड़े होंगे। लेकिन कुछ नेताओं की बातें सुनकर लगता है कि उनका  (Coronavirus China) चुनाव जीतना भी कोई संयोग ही रहा होगा।अभी देश मे कोरोनावाईरस का खौफ चल रहा है और जनता को इससे डराने में नेता भी पीछे नही है। जनता को इस खतरे से जागरूक करने की बजाय ये सरकार को कोसने में लगे हुए है। अभी संसद का सत्र भी चल रहा है और ऐसे में कई सांसद मास्क लगाकर संसद पहुंच रहे है। इन्ही सांसदों में एक है महाराष्ट्र  (Coronavirus India) के अमरावती से चुनकर आयी नवनीत कौर राणा। नवनीत लगातार दूसरे दिन मास्क (Wearing Mask In Lok Sabha) लगाकर संसद पहुंचीं और सदन में अपनी बात रखी। लेकिन संसद से बाहर पत्रकारों के सामने जो उन्होंने कहा वो चौंकाने वाला था।

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मेडम  (Coronavirus Alert) ने कहा कि कोरोना से बचने के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे इंतज़ाम (Wearing Mask In Lok Sabha)  नाकाफी है। उन्होंने सलाह दी कि हर सार्वजनिक स्थल जैसे मेट्रो स्टेशन, बस स्टॉप, अस्पताल और रेलवे स्टेशन पर आने वाले हर शख्स की बाकायदा स्क्रीनिंग की जाए और फिर उन्हें इंट्री दी जाए। मेडम  (Coronavirus) की ये मांग कर्णप्रिय जरूर है लेकिन व्यवहारिक बिल्कुल नही। देश मे करोड़ो लौग रोजाना मेट्रो, बस और ट्रेनों में सफर करतें हैं। देश के ज्यादातर रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा के भी नाममात्र के इंतजाम होतें है।ऐसे में ऐसी जगहों पर पहुंचने वाले हर शख्स की स्क्रीनिंग करने की कोई सोच भी कैसे सकता है? इतने उपकरण, डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ क्या देश मे उपलब्ध  (Coronavirus Navneet Kaur Rana) है जो इन जगहों पर आने जाने वालों की जांच कर सके? देश के सभी अस्पताल बंद करके सभी डॉक्टरों को इस काम मे लगा दिया जाए तो भी ऐसा करना संभव नही हो सकता। सवा सौ करोड़ की जनसंख्या में जहां सभी तक मेडिकल सेवाएं भी नही पहुंच पाती वहां हर सार्वजनिक स्थल पर आनेजाने वाले स्क्रीनिंग करना सिर्फ हवाई फायर करना ही कहा जा सकता है।

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अगर किसी (Wearing Mask In Lok Sabha) तरह हर रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन पर यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू कर भी दी तो वहां इतनी लंबी लाइनें लग जाएंगी की उन्हें सम्हालना मुश्किल हो जायेगा। आधे से ज्यादा यात्रियों की गाड़ी छूट जाएंगी और पूरे देश मे अव्यवस्था (COVID 19) फैल जाएगी। लेकिन नेताओं का काम है उलजुलूल बातें करना और तालियां बटोरना। नेताओ को बोलने से पहले कम से कम इतना तो सोचना चाहिए कि उनके सुझाव व्यावहारिक भी है या नही? कोरोना से देश के नागरिकों  (Coronavirus Is Spreading) का बचाव हो ये सभी की मंशा है। इसलिए नेताओ को भी इस मुद्दे पर राजनीति करने की बजाय सरकार के साथ मिलकर जनता के हित में काम करना चाहिये।

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Sachin Pauranik

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